सवर्ण बाहुल सुनपेड़ के लोगों के मुताबिक यह जातीय हिंसा 1983 में खूनी संघर्ष में तब्दील हुई। उसके बाद से अब तक दोनों पक्षों के कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
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PICS : 32 साल पुरानी खूनी रंजिश में जिंदा जला दिया परिवार
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बुजुर्ग राम प्रसाद बताते हैं कि गांव में सवर्णों के करीब 450 परिवार हैं, जबकि करीब 80 दलित परिवार हैं। राम प्रसाद बताते हैं कि 1983 में गांव का दलित युवक वेदराम खेत में ट्यूबवेल से पानी लगा रहा था।
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सवर्णों ने पहले अपने खेत में पानी लगाने का दबाव देते हुए वेदराम के साथ मारपीट की। इस पर गुस्साए वेदराम ने कस्सी से वार कर युवक की हत्या कर दी। इस घटना के बाद से गांव में जातीय हत्याओं का सिलसिला शुरू हुआ। 1985 में वेदराम की भी मौत हो गई।
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इसके बाद 14 मई 1989 को दो सवर्णों ने एक दलित महिला के साथ अश्लील हरकत और छेड़छाड़ की थी। इसको लेकर गांव में काफी दिन तनाव व्याप्त रहा। तब से दोनों जातियों में छिटपुट और कभी गंभीर झगड़े होते रहे। 2012 में दलित उदयवीर को कुछ सवर्ण उसकी क्लीनिक से बुला ले गए।
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दूसरे दिन उसका शव सड़क किनारे पड़ा मिला था। पांच अक्तूबर 2014 को मोबाइल फोन नाली से निकालने के विवाद में दलितों ने पप्पू उर्फ मोहनलाल, पप्पी उर्फ इंद्राज और बालू उर्फ भरतपाल की हत्या कर दी थी।
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मंगलवार को दलित जितेंद्र के परिवार को जिंदा जला दिया गया, इसमें दो बच्चों की मौत हुई। आगजनी का आरोप सवर्णों पर लगा है। गांव वालों की मानें तो बालू उर्फ भरतपाल और डालचंद के परिवारों के बीच शुरू हुआ यह विवाद अब पूरी तरह से जातीय रंग ले चुका है।
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मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर सुनपेड़ गांव के दो परिवार मोबाइल के झगड़े में तबाह हो गए हैं। आरोपी पक्ष यानि दबंगों के परिवार के तीन लोगों की पूर्व में हत्या की जा चुकी है।
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उन्हीं हत्याओं के आरोप में पीड़ित परिवार के नौ लोग अभी भी जेल में हैं। इनमें पीड़ित परिवार का निवर्तमान सरपंच भी शामिल है। यह मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है।बताया जाता है कि पीड़ित परिवार की गांव में ही परचून की दुकान है।
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उसी के परिवार के लोग मोबाइल रिपेयरिंग का भी काम करते थे। पांच अक्तूबर 2014 को छिद्दन सिंह परिवार का एक लड़का मोबाइल बनवाने के लिए दुकान पर गया था।
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वहां देते समय मोबाइल नाले में गिर गया। उसने मोबाइल देने के लिए कहा तो दलित परिवार ने नाले से मोबाइल निकालने से मना कर दिया। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बच्चों के बीच झगड़ा हो गया।
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दूसरे दिन इसी झगड़े ने गंभीर रूप ले लिया। आरोप है कि जितेंद्र के परिवार के लोगों ने चाकू से हमला कर दबंग परिवार के 35 वर्षीय पप्पू उर्फ मोहनलाल, 38 वर्षीय पप्पी उर्फ इंदराज, 40 वर्षीय बालू उर्फ भरतपाल, करतार और नौनिहाल को घायल कर दिया था।
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पीड़ित परिवार के नौ लोग जेल में इनमें से पप्पू और पप्पी की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि बालू उर्फ भरतपाल की 10 दिन बाद मौत हो गई। सवर्णों की हत्या के आरोप में वेद प्रकाश, वंशी, सरपंच जगमाल, दल्ले, अमित, पवन, सतेंदर, कल्लू, महिला लज्जा और संतोष के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर सदर पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
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लज्जा और संतोष इन दिनों जमानत पर हैं, जबकि अन्य नौ लोग अभी भी जेल में हैं। अभी यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। नाक की इस लड़ाई ने सवर्णों और दलित दोनों परिवारों को तबाह कर दिया है।
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सदर थाना क्षेत्र के सुपनेड़ गांव में मंगलवार तड़के दबंगों ने एक दलित परिवार के चार लोगों को जिंदा जला दिया। घटना में ढाई साल के बच्चे वैभव और 10 माह की बच्ची दिव्या की मौत हो गई। पिता जितेंद्र (31) और मां रेखा (27) झुलस गए।
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घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए कई बार जाम लगाया। पुलिस ने दो आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। पीड़ित जितेंद्र ने 11 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया है। सभी के नाम उसने रिपोर्ट में बता दिए हैं।
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पुलिस आयुक्त सुभाष यादव के मुताबिक घटना का कारण दो परिवारों में चली आ रही रंजिश है। सुनपेड़ गांव निवासी जितेंद्र रजिस्टर्ड मेडिकल प्रेक्टिशनर (आरएमपी) हैं।
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जितेंद्र ने बताया कि सोमवार की शाम गांव में माता का जागरण था। परिवार के अन्य सदस्य जागरण में गए हुए थे। वह पत्नी रेखा और दो बच्चों वैभव, दिव्या के साथ घर के बाहरी कमरे में सो रहा था।
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मंगलवार तड़के 2:30 बजे बलवंत और उसके परिवार के कुछ लोग दीवार फांद कर घर में घुस आए। कमरे में लगी खिड़की से इन लोगों ने बेड पर सो रहे परिवार वालों पर पेट्रोल छिड़क दिया। छींटे पड़ने से जितेंद्र की आंख खुल गई।
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खिड़की के पास ही होने की वजह से दोनों बच्चे पेट्रोल से तर हो गए। इस पर जितेंद्र दरवाजा खोलकर बाहर निकला तो बलवंत, जगत, ऐदल और नौनिहाल कमरे में घुस आए जबकि जोगिंद्र, सूरज, आकाश, अमन, संजय, धर्मसिंह और देशराज बाहर ही रहे।
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जितेंद्र का आरोप है कि ऐदल और नौनिहाल ने माचिस की तीली जलाकर कमरे में आग लगा दी। आग लगते ही सभी हमलावर जाति सूचक गालियां और जान से मारने की धमकियां देते हुए भाग निकले। जागरण से लौट रहे एक युवक ने आग लगी देखी तो लोगों को जानकारी दी।
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गांव की सुरक्षा में लगाए गए पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और झुलसे हुए जितेंद्र, रेखा, वैभव और दिव्या को सिविल अस्पताल लाए। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद चारों को सफदरजंग अस्पताल दिल्ली रेफर कर दिया। अस्पताल ले जाते समय वैभव और दिव्या की रास्ते में ही मौत हो गई।
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घटना से गुस्साए लोगों ने गांव के बाहर सड़क जाम कर दी। मौके पर पहुंचे पुलिस आयुक्त सुभाष यादव एसीपी विष्णुदयाल और एसीपी गजेंद्र ने दो आरोपियों को हिरासत में लिए जाने के बारे में बताया, तब जाकर लोगों ने जाम खोला।
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पुलिस आयुक्त सुभाष यादव ने बताया कि पांच अक्तूबर 2014 को गांव में तीन युवकों की हत्या हुई थी, इस घटना में जितेंद्र के परिवार के 11 लोग नामजद हुए थे। जिन्हें पुलिस ने जेल भेज दिया था।
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मंगलवार तड़के हुए आगजनी की घटना में विरोधी पक्ष के 11 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इनमें से दो को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।