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PHOTOS: देशभर में पूरे हर्ष उल्लास से मनाया जा रहा ईद का त्योहार, जानिए इसकी कुछ खास बातें

Sat, 16 Jun 2018 12:47 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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jama masjid - फोटो : अमर उजाला
प्रेम, भाईचारे और खुशियों का त्योहार ईद-उल-फितर आज पूरे देश में बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। सिर्फ ईद के दिन ही नहीं यह त्योहार मुस्लिम समुदाय अगले कई दिनों तक पूरे जोश और उत्साह से मनाते हैं। एक माह तक अल्लाह की ईबादत वाले माह रमजान के बाद आने वाली ईद हर किसी को खुशी के अलग एहसास से भर देती है। चाहे गरीब हो या अमीर यह त्योहार हर किसी को अलग खुशी देता है। देखिए दिल्ली-एनसीआर में कैसे मनाई गई ईद और क्या है इसका महत्व...
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eid - फोटो : ani
क्यों मनाते हैं ईद
जैसे हिंदुओं के दो प्रमुख त्योहार होते हैं होली और दीपावली वैसे ही मुस्लिमों के भी दो बड़े त्योहार होते हैं। ईद उल फितर और ईद उल जुहा (अजहा)। रमजान में पूरे महीने रोजे रखने के बाद पड़ने वाली ईद को ईद उल फितर कहते हैं।
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eid - फोटो : ani
ईद अल्लाह से ईनाम लेने का दिन है। ईद मनाने से पहले एक परंपरा निभाई जाती है जिसे फितरा कहा जाता है, इसके तहत ईद मनाने वाले हर मुस्लिम को अपने पास से गरीबों को कुछ अनाज देना जरूरी होता है, जिससे वह भी खुशी से ईद मना सके।

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eid - फोटो : ani
कैसे हुई ईद की शुरुआत ये सवाल कई बार सामने आता है कि आखिर पहली ईद कब मनाई गई। इस्लाम में माना जाता है कि पहली ईद हजरत मुहम्मद पैगंबर ने सन 624 ईस्वी में जंग-ए-बदर के बाद मनाई थी।
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eid - फोटो : ani
यह कुछ-कुछ हिंदुओं के दीपावली की तरह है जब भगवान राम के लंका विजय के बाद पहली बार दीपोत्सव की शुरुआत हुई थी, जो बाद में दीपावली के रूप में मनाया जाने लगा।
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eid - फोटो : अमर उजाला
ईद मनाने में चांद का क्या है महत्व- जिस तरह रमजान की शुरुआत चांद देखकर होती है वैसे ही रमजान का महीना बीत जाने के बाद चांद देखकर ही ईद मनाई जाती है। असल में त्योहारों में चांद का बड़ा महत्व है, हिंदुओं में भी कई त्योहार चांद देखकर ही मनाए जाते हैं। ईद का चांद से बड़ा गहरा संबंध है।
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eid - फोटो : ani
ईद उल फितर हिजरी कैलेंडर के दसवें महीने के पहले दिन मनाई जाती है और इस कैलेंडर में नया महीना चांद देखकर ही शुरू होता है। ईद भी रमजान के बाद नए महीने की शुरुआत के रूप में मनाई जाती है जिसे शव्वाल कहा जाता है।

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eid - फोटो : अमर उजाला
जब तक चांद न दिखे रमजान खत्म नहीं होता और शव्वाल शुरू नहीं हो सकता। वैसे इसका संबंध एक एतिहासिक घटना से भी है। कहा जाता है कि इसी दिन हजरत मुहम्मद ने मक्का शहर से मदीना के लिए कूच किया था।

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eid - फोटो : अमर उजाला
ईद पर ये काम है बहुत जरूरी यूं तो ईद खुशियां मनाने का त्योहार है, लेकिन कुछ नियम भी हैं जिनका पालन इस दिन करना जरूरी होता है। मसलन ईद वाले दिन की शुरुआत सुबह जल्दी उठकर फजर की नमाज अदा करने से होती है। उसके बाद खुद की सफाई जैसे, गुस्ल और मिस्वाक करना। इसके बाद साफ कपड़े पहनना सबसे साफ फिर उन पर इत्र लगाना और कुछ खाकर ईदगाह जाना।

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eid - फोटो : अमर उजाला
नमाज से पहले फिकरा करना भी जरूरी होता है। ईद की नमाज खुले में ही अदा की जाती है। सबसे खास बात ये है कि ईदगाह आने और जाने के लिए अलग-अलग रास्तों का इस्तेमाल किया जाता है।

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eid - फोटो : अमर उजाला
नए कपड़े नहीं हैं जरूरी ईद को लेकर एक बात ये भी कही जाती है कि इस दिन नए कपड़े पहनना जरूरी होता है। हालांकि यह बात सत्य नहीं है, ईद पर साफ कपड़े जरूरी होते हैं, नए नहीं।

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eid - फोटो : ani
साफ भी वो जो सबसे साफ हों, इसलिए नए कपड़े पहनने की कोई बाध्यता नहीं है। कपडों पर इत्र लगाने की भी परंपरा है, लेकिन यह भी जरूरी नहीं है।
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eid - फोटो : ani
पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी।
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