पुराना उस्मानपुर गांव की झुग्गियों में शनिवार देर रात आग लग गई। हादसे में एक महिला के सामने ही उसके तीन मासूम बच्चों- रीना (7), मीना (4) और मुबारक (7 माह) की मौत हो गई। वहीं पड़ोस में रहने वाले अल्लारक्खा का बेटा शुक्रउद्दीन (7) करीब 80 फीसदी तक झुलस गया। गंभीर हालत में उसे जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रविवार को पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने तीनों शव परिवार को सौंप दिए। न्यू उस्मानपुर थाना पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। (सभी फोटो: अनिल कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली)
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आग का तांडव, मां के सामने ही जल गए तीनो मासूम
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पुलिस के मुताबिक हादसा दूसरा पुश्ता, पुराना उस्मानपुर गांव स्थित झुग्गियों में हुआ। मूलरूप से झारखंड का रहने वाला रकीम उर्फ कल्लू पत्नी भदौरी और तीन बच्चों-रीना, मीना और मुबारक के साथ रहता था। वह रात के समय प्लास्टिक बीनने का काम करता है। शनिवार रात वह पत्नी और बच्चों को झुग्गी में सोता छोड़कर चला गया। रात करीब 11:30 बजे अचानक झुग्गियों में आग लग गई। देखते ही देखते आग ने भयावह रूप ले लिया।
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आग की चपेट में झुग्गी आने के बाद मचे शोरगुल के बीच भदौरी जैसे ही बाहर निकली, वैसे ही जलता हुआ छप्पर तीनों बच्चों पर गिर गया। रोती-चिल्लाती भदौरी के सामने ही उसके तीनों मासूम जल गए। पुलिस और दमकल कर्मियों ने स्थानीय लोगों की मदद से करीब 12.30 बजे आग पर काबू पाया। आग के दौरान दो छोटे सिलेंडर भी ब्लास्ट हुए। हादसे में 11 झुग्गियां जलकर राख हो गईं। देर रात 3:00 बजे जब रकीम वहां पहुंचा तो उसे बच्चों की मौत का पता चला।
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झुग्गियों में आग की सूचना मिलने के बाद दमकल वाहनों के घटनास्थल पर पहुंचने में देरी से स्थानीय लोगों में काफी रोष है। लोगों का कहना है कि आग लगने के बाद स्थानीय लोगों ने खुद ही पानी डालकर उसे बुझाने का प्रयास किया। स्थानीय निवासी सलमान ने दावा किया कि आग बुझाने के बाद दमकल की गाड़ियां वहां पहुंचीं। वहीं दमकल अधिकारियों का कहना था कि अगर दमकल वाहन समय पर नहीं पहुंचते तो और झुग्गियां जल जातीं।
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हादसे के बाद भदौरी बार-बार बेहोश हो रही थी। शोर-शराबा सुनकर जागी भदौरी जब माजरा समझने के लिए बाहर निकली तब उसे पता चला कि उसकी झुग्गी में भी आग लगी थी। इससे पहले की वह अपने बच्चों को झुग्गी से बाहर निकालती, जलता हुआ छप्पर तीनों पर गिर गया। इस बीच बच्चों को बचाने के लिए भदौरी ने झुग्गी में जाने की कोशिश की, लेकिन आग का भयावह रूप देखकर लोगों ने उसे पकड़ लिया। देखते ही देखते उसके तीनों बच्चे जिंदा जल गए।
स्थानीय लोगों की मानें तो रात के समय अल्लारक्खा की झुग्गी में रोशनी के लिए मोमबत्ती जली हुई थी। आग वहीं से लगी। देखते ही देखते उसने आसपास की 11 झुग्गियों को अपनी चपेट में ले लिया। लोगों को सामान भी बाहर निकालने का समय नहीं मिला। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह भी आग लगने की वजह हो सकती है। इधर, खबर मिलते ही एसडीएम व अन्य लोग मदद के लिए वहां पहुंच गए और बेघर हुए लोगों के लिए अस्थायी टेंट लगाकर उनके रहने की व्यवस्था की गई।