साइबर सिटी में हर रोज दर्ज होते हाई प्रोफाइल मामलों के बीच यहां के पूर्व जिला उपायुक्त आरपी भारद्वाज के बेटे अजय भारद्वाज पर चल रहे दुष्कर्म के केस मे ऐसा क्या है कि दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के बीच तकरार हो गई। यह लड़ाई गुड़गांव कमिश्नरी से लेकर गृह मंत्रालय और देश की आईपीएस लॉबी में भी चर्चा का विषय बन गई। जानकार कहते हैं कि आखिर कुछ तो गड़बड़ है कि दोनों अधिकारी इसमें इतनी दिलचस्पी ले रहे हैं। (रिपोर्ट: ओम प्रकाश- सभी फोटो: दिनेश कुमार/अमर उजाला, गुड़गांव)
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खुन्नस के बावजूद मुस्कुराते हुए एक ही मेट्रो में सवार थे दोनों IPS
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इन सबके बावजूद कार फ्री डे के दिन दोनों ही आईपीएस अधिकारी एक ही मेट्रो में सवार होकर ऑफिस पहुंचे। दोनों के बीच की गड़बड़ी का मामला इतना गहरा है कि इसमें दो-दो जांच अधिकारी बदल चुके हैं, वह भी एसीपी रैंक के। गुड़गांव में हर रोज करीब 50 केस दर्ज होते हैं। लेकिन किसी केस में अधिकारी इतनी दिलचस्पी नहीं लेते कि उनका झगड़ा दफ्तर की फाइलों से निकलकर बाहर आ जाए।
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खुन्नस के बावजूद मुस्कुराते हुए एक ही मेट्रो में सवार थे दोनों IPS
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सऊदी अरब के राजनयिक मामले में भी अधिकारियों की इतनी दिलचस्पी नहीं दिखी थी। अब इस केस को लेकर दोनों आईपीएस आमने-सामने हैं। बताया यह जा रहा है कि उलझे हुए इस केस के बहाने दोनों अपनी पुरानी खुन्नस निकाल रहे हैं। जानकारों का कहना है कि भारती के पास कोई मजबूत तथ्य जरूर हैं जो वह इतना खुलकर पुलिस कमिश्नर पर आरोप जड़ रही हैं।
खुन्नस के बावजूद मुस्कुराते हुए एक ही मेट्रो में सवार थे दोनों IPS
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भारती अरोड़ा के पति विकास अरोड़ा भी आईपीएस अधिकारी हैं। आरोप है कि गुड़गांव में एक सरकारी आवास उन्होंने समय पर खाली नहीं किया। इस पर विर्क ने 6.5 लाख रुपये का जुर्माना सहित रेंट वसूल कराया। इसके बाद भारती और विर्क में तनातनी शुरू हो गई।
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बताया जा रहा है कि इसके बाद से ही दोनों अधिकारियों में शीत युद्ध चल रहा था। रिटायर्ड आईपीएस श्यामलाल गोयल का कहना है कि इतने वरिष्ठ अधिकारियों को किसी केस को लेकर इस तरह मैदान में नहीं आना चाहिए था। दोनों के कोई न कोई हित जुड़े हैं कि वे इस तरह से लड़ रहे हैं।
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कार फ्री डे पर नवदीप सिंह विर्क और भारती अरोड़ा मंगलवार सुबह साथ-साथ थे। मेट्रो में साथ चढ़े, साथ खड़े रहे। लेकिन, उनके मन में एक दूसरे के प्रति गुबार भरा था, जो रैली के बाद ही प्रेस कांफ्रेंस में फूट पड़ा। कहा जा रहा है कि प्रदेश के इतिहास में किसी केस को लेकर दो आईपीएस इससे पहले शायद ही इस तरह से लड़े हों। इसलिए इस पर सरकार भी नजरें लगाए हुए हैं।