रोहिणी के विजय विहार स्थित आध्यात्मिक विश्वविद्यालय के बाद अब द्वारका मोड़ का आश्रम भी चर्चा में है। हालांकि आश्रम में रहने वाली महिलाएं सभी आरोपों को गलत ठहरा रही हैं। उनका कहना है कि बाबा को फंसाने की साजिश रची जा रही है।
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बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित से जुड़े आश्रमों में शुक्रवार को भी पुलिस ने फिर छापा मारा था।
वहीं आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि आश्रम अभिचार के अड्डे हैं। यहां हर तरह की अनैतिक गतिविधियां होती हैं, जिससे उनका रहना दूभर हो गया है। आश्रम ऐेसे बने हैं कि भीतर परिंदा भी पर नहीं मार सकता।
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baba virendra dev dixit
- फोटो : अमर उजाला
आश्रम की महिला अनुयायियों का कहना है कि आश्रम में कोई गलत काम नहीं होता। हालिया कार्रवाई आश्रम के संचालक बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित को बदनाम करने की साजिश है। महिलाओं ने बताया कि संचालक पर 1998 में भी लांछन लगाया गया था, लेकिन वह जेल से छूटकर आ गए।
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बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित के आश्रम में रेप का मामला फिर आया सामने
किसी तरह का गलत काम होता तो पुलिस उनके खिलाफ जरूर कार्रवाई करती। उन्होंने कहा कि वह करीब 15 साल से आश्रम से जुड़ी हैं। उनसे आश्रम ने कभी भी एक रुपये का दान नहीं मांगा।
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baba virendra dev dixit
उनके मुताबिक, आश्रम में रहने वाली लड़कियों को बाहर की दुनिया से बचाने के लिए बाबा ने घर की घेराबंदी कराई है। यहां सभी के लिए एक सामान खाना बनता है। सभी फर्श पर सोते हैं।
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baba virendra dev dixit
यही तपस्वी जीवन है। हालांकि वे इस बात पर चुप्पी साध जाती हैं कि आश्रम को पिंजरे के रूप में क्यों बनाया गया है। आम लोगों को आश्रम में जाने की इजाजत क्यों नहीं है।
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baba virendra dev dixit
- फोटो : ANI
उधर, स्थानीय लोगों का कहना है कि आश्रम में लड़कियों का शोषण होता है। सब कुछ ठीक है तो फिर आश्रम को जेलनुमा क्यों बनाया गया है। बाहर के लोगों को आश्रम में जाने की अनुमति क्यों नहीं है।
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बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित
उनका कहना है कि यहां होने वाली सभी गतिविधियां संदिग्ध हैं। इसकी शिकायत भी की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब लड़कियों के परिजनों ने विरोध किया तो गलत काम का भंडाफोड़ हुआ है।
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- फोटो : अमर उजाला
गायब किशोरियां मिलने के भी कयास
विजय विहार और द्वारका के आश्रम में किशोरियों के मिलने के बाद लोगों ने कयास लगाने शुरू कर दिए हैं कि दिल्ली व आसपास के इलाके से गायब होने वाली किशोरियां इन्हीं आश्रमों में कैद हैं। आश्रम के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि यह बात सामने आ रही है कि यहां मिलने वाली किशोरियों के नाम-पते आश्रम के पास नहीं हैं। यह साबित करता है कि किशोरियों को बहला-फुसलाकर इन आश्रमों में कैद किया गया है। स्थानीय लोगों ने इन किशोरियों की पहचान कर उनके परिजनों के हवाले करने की मांग उठाई है।
तीसरी मंजिल पर कैद थीं लड़कियां
द्वारका स्थित आश्रम की तीसरी मंजिल पर लड़कियां कैद थीं। तीसरी मंजिल को जाल लगाकर पूरी तरह बंद किया गया है। उस पर टाट का पर्दा लगाकर ढंका गया है। शुक्रवार रात यहां दबिश के दौरान कुछ महिलाएं छत पर सोती हुई मिलीं। कई बीमार थीं। तीसरी मंजिल को इतना ढककर रखा गया था कि बाहर के लोग भीतर होने वाली किसी भी हरकत को नहीं देख पाते थे। स्थानीय लोगों ने बताया कि आश्रम में रहने वाले लोगों और मकान मालिक का पड़ोसियों से कोई वास्ता नहीं था। यहां नियमित रूप से लड़कियां आती थीं, लेकिन वह बाहर के लोगों से कोई बात नहीं करती थीं।