दिल्ली के आध्यात्मिक आश्रम से छुड़ाई गईं लड़कियों को जब वहां से आजाद करवाया गया तब उन्होंने यह कहा कि...
विज्ञापन
2 of 7
अाश्रम में महिलायें
उनके लिए सब कुछ उनके बाबा हैं। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि बाबा ने जो शिक्षा दी है उसके आधार पर ही वह पूरी जिंदगी गुजारेंगी। बाबा द्वारा दी गई शिक्षा के खिलाफ वह कुछ नहीं करेंगी। बाहर का खाना, पहनना और किसी से बातें करना यह सब वह नहीं करेंगी। इस वजह से वह चाइल्ड वेलफेयर होम का खाना नहीं खा रही और यूनिफॉर्म से अलग कपड़े पहनने के लिए भी वह नहीं तैयार हैं।
विज्ञापन
3 of 7
अाश्रम में महिलायें
हाल ही में विजय विहार स्थित आश्रम से दिल्ली पुलिस ने 41 नाबालिग लड़कियों को रेस्क्यू कर अलीपुर के मिंडा बाल गृह भेज दिया गया है। वहां की सीनियर काउंसलर के मुताबिक लड़कियां मेड के हाथ का बना खाना खाने के लिए तैयार नहीं है। वहां पहुंचने के बाद पहले दिन तो किसी भी लड़की ने खाना नहीं खाया।
4 of 7
बाबा वीरेंद्र देव दीक्षित
नाबालिग लड़कियों के अनुसार, किसी और के हाथ का बना खाना आध्यात्मिक शिक्षा के खिलाफ है। इसे अन्नदोष माना जाता है तो बस इसलिए वह खुद ही अपने हाथों से खाना बनाकर ही खा रही हैं।
विज्ञापन
5 of 7
baba virendra dev dixit
बाबा के आश्रम से मिली यूनिफॉर्म के अलावा दूसरे कपड़े भी पहनने के लिए नहीं मान रहीं है। बाल गृह से एक टीम लड़कियों के कपड़े विजय विहार में बाबा के आश्रम से लेकर आई है।
विज्ञापन
6 of 7
baba virendra dev dixit
- फोटो : अमर उजाला
बंद कमरे में ही रहना पसंद है
बाल गृह में भी वह नाबालिग लड़कियां केवल बंद कमरे में ही रहना चाह रही हैं। काउंसलर ने उनको लाख समझाया पर वह खुले पार्क में घूमना नहीं चाहती। ठंड पड़ने के बावजूद भी धूप में रहना पसंद नहीं करतीं। वह दूसरों से बात करना भी पसंद नहीं करतीं वह केवल आपस में ही बातें करती है।
अगर कोई उनके पास चला भी गया तो वह मुंह ढ़ककर शांति से बैठ जाती हैं। आश्रम के बारे में कुछ नहीं बतातीं। सिर्फ एक बात की रट लगाती हैं कि-बाबा ही मेरे लिए सब कुछ हैं।