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मरने के बाद यहां लाशों संग हो रहा ऐसा बर्ताव, सुनकर कई दिनों तक खाना नहीं खा पाएंगे आप

Mon, 15 May 2017 10:25 AM IST
नेहा शर्मा/अमर उजाला, नोएडा
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नोएडा का पोस्टमॉर्टम हाउस - फोटो : अमर उजाला
नोएडा के सेक्टर-94 स्थ‌ित पोस्टमार्टम हाउस में शवों के साथ ऐसा बर्ताव क‌िया जाता है ज‌िसकी कल्पना भी मुश्क‌िल है। अगर आप यहां की हालत देख लें तो कई द‌िनों तक तो यहां की तस्वीरें आपके मन से हटेंगी ही नहीं और आपका खाना खाना भी दुश्वार हो जाएगा। यहां की व्यवस्था इतनी बदहाल है ‌क‌ि मृतकों का शरीर रखने वाले कमरे का गेट पिछले छह महीने से टूटा पड़ा है। (सभी फोटोः लाल स‌िंह)
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नोएडा पोस्टमार्टम हाउस में अब्यवस्था के कारण लोग शव को गाडी में ही रहने देते है और जब नंबर आता है तब अंदर भेजते है - फोटो : लाल स‌िंह/अमर उजाला
वहीं शव को रखने के लिए अधिकांश डीप फ्रिजर खराब हो चुके हैं। इस वजह से मृतक के शरीर को खुले में ही रखना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी लावारिस शव में आती है। क्योंकि इसकी बदबू पूरे पोस्टमार्टम हाउस के बाहर फैली रहती है। इससे यहां कुत्ते भी आ जाते हैं और गेट टूटा देखकर अंदर घुस जाते हैं। ये कुत्ते लावारिस शवों में मुंह तक मारते हैं। बता दें कि सेक्टर-94 स्थित पोस्टमार्टम हाउस में आठ डीप फ्रिजर लगे हैं। इसमें अधिकतर पिछले कई वर्षों से खराब पड़े हैं। अगर किसी शव को लाया जाता है तो उसको बाहर ही रखना पड़ता है।
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नोएडा का पोस्टमॉर्टम हाउस - फोटो : लाल स‌िंह/अमर उजाला
अक्सर पुलिस को मरने के दो से तीन दिन में लावारिस बॉडी मिलती है। उसके बाद पोस्टमार्टम हाउस में लाया जाता है। तब तक शव से बदबू आने लगती है। पोस्टमार्टम होने के बाद भी 72 घंटे (3 दिन) तक लावारिस शव को रखना पड़ता है। ताकि अगर कोई क्लेम करे तो उसको अंतिम संस्कार के लिए दिया जा सके, लेकिन डीप फ्रीजर खराब होने से बाहर ही रख देते हैं। इस दौरान शव पूरी तरह से गल जाता है और कुत्ते इसी बदबू को सूंघकर टूटे गेट से अंदर घुस आते हैं।
भगाने पर काटने को दौड़ते हैं कुत्ते 
एक व्यक्ति ने बताया कि पीछे की तरफ कैंटीन बनी है। वहां से पोस्टमार्टम हाउस का गेट भी है। कुत्ते वहां से अंदर आ जाते हैं और लावारिस शव में मुंह लगाने लगते हैं। ये कुत्ते भगाने पर भागते तक नहीं हैं। उल्टा काटने को दौड़ते हैं। बड़ी मुश्किल से इन कुत्तों पर काबू पा पाते हैं। इनको कितना भी भगाओ बदबू सूंघकर फिर से वापस आ जाते हैं।

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नोएडा का पोस्टमॉर्टम हाउस - फोटो : लाल स‌िंह/अमर उजाला
डॉक्टरों तक का बुरा हाल
यहां के एक कर्मचारी ने बताया कि हम लोग कई बार इसकी शिकायत सीएमओ से कर चुके हैं। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यहां के एसी तक खराब पड़े हैं। हालत ये होती है कि पोस्टमार्टम रूम में डॉक्टर तक नहीं आ पाते हैं। बड़ी मुश्किल से पोस्टमार्टम होता है।
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नोएडा का पोस्टमॉर्टम हाउस - फोटो : लाल स‌िंह/अमर उजाला
क‌िसका क्या है कहना
मैंने एक डीप फ्रीजर अपने पैसों से ठीक  करवाया है। अन्य को सही करवाने के लिए दिल्ली से सामान आना बाकी है। उसके लिए भी प्राधिकरण की तरफ से काम किया जा रहा है। वहीं गेट को भी ठीक करवाया जा रहा है। एसी को भी जल्द ठीक करा लिया जाएगा।- डॉ. अनुराग भार्गव, सीएमओ
2004 में हम लोगों ने दो डीप फ्रिजर दिए थे, क्योंकि उस वक्त शवों पर कीड़े रेंग रहे थे। लेकिन डीप फ्रिजर का रखरखाव ठीक नहीं होने से खराब हो गए। इस दोबारा ठीक भी नहीं करवाया गया।- अनूप खन्ना, अध्यक्ष, केमिस्ट एसोसिएशन
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