हाईकोर्ट ने विजय विहार स्थित आश्रम से मुक्त करवाई गई 48 लड़कियों में से किसी एक को पेश करने का निर्देश दिया है। इनमें से एक के माता पिता ने याचिका दायर कर उनके बालिग होने का दावा किया था।
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परिजनों के मुताबिक, यह लड़कियां बालिग हैं और आश्रम में ही रहना चाहती हैं। उन्हें जबरन अलीपुर स्थित सुधार गृह में रखा गया है। मामले की अगली सुनवाई छह मार्च को होगी।
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अाश्रम में महिलायें
जस्टिस एसपी गर्ग ने किसी भी एक लड़की को पेश करने का निर्देश दिया है ताकि उनका पक्ष सामने आ सके। दूसरी ओर दिल्ली सरकार ने कहा कि अब मामले की जांच सीबीआई कर रही है। उनका अब इससे कोई लेना देना नहीं है।
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वीरेन्द्र देव दीक्षित का अाश्रम
कोर्ट के समक्ष सीबीआई व बाल कल्याण समिति ने रिपोर्ट पेश करने के लिए समय की मांग की है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार, बाल कल्याण समिति व सीबीआई से 12 जनवरी को रिपोर्ट मांगी थी।
वहीं, याचिका पर जिरह करते हुए अधिवक्ता अमोल पोपने ने कहा था कि जिन लड़कियों को आध्यात्मिक विश्वविद्यालय से मुक्त करवाया गया है वह सब बालिग हैं और अपनी मर्जी से वहां पर रहती थीं।