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साहित्योत्सव जश्न-ए-अदब के मंच पर छाया 'मिर्जापुर', अभिनेता अली फजल और पंकज त्रिपाठी ने बांधा समां

Sat, 02 Mar 2019 12:53 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जश्न-एअदब - फोटो : अमर उजाला
जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी में शुक्रवार से शेरो-शायरी और कविताओं के साहित्योत्सव ‘जश्न-ए-अदब’ का आगाज हो गया। तीन दिन तक चलने वाले इस उत्सव के पहले दिन फिल्म अभिनेता अली फजल और अभिनेता पंकज त्रिपाठी की मौजूदगी ने छात्रों में मिर्जापुर वेब सीरीज की याद दिलाई। 
 
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जश्न-ए-अदब - फोटो : अमर उजाला

वहीं इस मौके पर नामी फिल्मकार एवं कथाकार मुजफ्फर अली और कथाकार एवं लेखक अशोक चक्रधर की मौजूदगी ने साहित्य प्रेमियों में उत्साह भर दिया। बहरहाल दो पीढ़ियों के बीच साहित्य के संगम से लबरेज इस साहित्योत्सव में दोनों पीढ़ियों को नजदीक लाने पर जोर देने की कवायद की गई। 
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जश्न-ए-अदब - फोटो : अमर उजाला
इस साहित्योत्सव में अमर उजाला साहित्यकारों को बढ़ावा देने के लिए बतौर मीडिया पार्टनर की भूमिका निभा रहा है। जश्न-ए-अदब उत्सव का आयोजन जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. सयेद एहतेशाम हुसनैन द्वारा किया गया। साहित्योत्सव के मंच पर कार्यक्रम की शुरुआत साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित करके की गई। 

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जश्न-ए-अदब - फोटो : अमर उजाला
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में उत्कृष्ट कार्य के लिए राजेश रैना, प्रिंट मीडिया में उत्कृष्ट कार्य के लिए आलोक मेहता, उर्दू उपन्यास के लिए प्रो. बेग ऐहसास और भारतीय थियेटर जगत में बेहतर भूमिका निभाने के लिए प्रो. राज बिसारिया को सम्मानित किया गया। वहीं इस मौके पर उपस्थित अतिथियों द्वारा लेखक खुशबीर सिंह शाद की पुस्तक ‘हवा पत्ते उड़ाती जा रही है’ का विमोचन किया गया। इस मौके पर पुस्तक में पेश की कई कविताओं का मंचन भी किया गया।
 
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जश्न-ए-अदब - फोटो : अमर उजाला
वहीं कथा शिखर सम्मान से डॉ. सचिदानंद जोशी को नवाजा गया। उन्होंने कहा कि जामिया हमदर्द के इस प्रयास से साहित्य को बढ़ावा मिलेगा और ऐसे आयोजनों से छात्रों का भी ज्ञानवर्धन होगा।
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जश्न-ए-अदब - फोटो : अमर उजाला
इस चर्चा का संचालन पत्रकार अभिज्ञान प्रकाश ने किया। चर्चा में थियेटर और सिनेमा के पहलुओं को समझाने के लिए पुराने समय के सास-बहू वाले टीवी सीरियल की तुलना वर्तमान में चल रही मिर्जापुर जैसी वेब सीरीज से की गई। 
 
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जश्न-ए-अदब - फोटो : अमर उजाला
इस चर्चा में जहां मिर्जापुर वेब सीरीज को अपराध को महिमामंडित करने वाला बताया गया, वहीं पंकज त्रिपाठी और अली फजल ने कहा कि इसमें अपराध का महिमामंडल नहीं किया गया, बल्कि यह समझाने की कोशिश की गई है, जहां गुंडे पैदा होते हैं, वहीं आईएएस और आईपीएस भी बनते हैं। इस चर्चा के बाद छात्रों के बीच कदर मुस्तफाबाद खान ने शाम-ए-सूफीयाना, ‘तो से नैना मिलाय के’ और साबरी ब्रदर्स द्वारा कव्वाली पेश की गई।
 
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