बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी’ ‘खूब लड़ी मदार्नी वह तो झांसी वाली रानी थी। मणिकर्णिका यानि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की जयंती के मौके पर उनकी शौर्य गाथा से रविवार को कनॉट प्लेस का सेन्ट्रल पार्क गूंज उठा। राष्ट्र सेविका समिति के तरुणी विभाग और शरण्या स्वयंसेवी संगठन द्वारा आयोजित मणिकर्णिका दौड़ (एक निरंतर दौड़, देश के लिए) में हजारों युवतियां दौड़ीं। खास बात यह है कि इस दौड़ में सबसे छोटी पर्वातारोही शिवांगी पाठक ने भाग लिया, जिन्हें देखकर अन्य प्रतिभागी प्रोत्साहित हुए।
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Manikarnika marathon
- फोटो : अमर उजाला
इस मौके पर अखिल भारतीय तरुणी प्रमुख भाग्यश्री साठे ने कहा कि महारानी लक्ष्मीबाई ने जिस तरह से भारत की स्वतंत्रता के लिए जीवन के अंतिम क्षण तक निश्चयपूर्वक अंग्रेजों के खिलाफ निरंतर संघर्ष किया, वैसे ही उनकी याद में यह ‘निरंतर दौड़’ की जा रही है। उन्होंने कहा कि शारीरिक क्षमता बढ़ाने के लिए ऐसे आयोजन आवश्यक हैं और इससे तरुणियों (टीनेजर्स) में देश-प्रेम का भाव भी जागृत होता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट में भारत की ए.एस.जी पिंकी आनंद ने की।
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उन्होंने इस बीच कहा कि यदि आज की युवा पीढ़ी रानी झांसी की छवि को मन मस्तिष्क में बढ़ाकर आगे बढ़े तो इससे बेहतर कोई लक्ष्य नहीं हो सकता। इस दौड़ में 14 वर्षीय किशोरी से लेकर 63 वर्षीय महिलाओं तक ने भागीदारी की। 5 किलोमीटर की दौड़ में अव्वल आने वाली विजेताओं को 3100 रुपये और ट्रॉफी, दूसरे स्थान पर आने वाली युवतियों को 2100 रुपये और ट्रॉफी और तीसरा स्थान प्राप्त करने वाली युवतियों को 1100 रुपये और ट्रॉफी से सम्मानित किया गया, जबकि अनेक प्रतिभागियों को 500 रुपये और ट्रॉफी सांत्वना पुरस्कार से नवाजा गया।
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इस दौड़ में 63 वर्षीय सरोज शर्मा और 53 वर्षीय अंजू डागर को उत्साह को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें विशेष सम्मान से नवाजा गया। दौड़ की प्रतिभागी प्रीति शर्मा ने कहा कि यह मणिकर्णिका दौड़ से उन्हें बेहद अच्छा और रोमांचक अनुभव मिला है। इस बीच उन्होंने भारत माता की जय के नारे लगाए और रानी लक्ष्मीबाई की शौर्य गाथा को याद किया। उन्होंने कहा कि इस दौड़ में हिस्सा लेकर वह बहुत गौरवान्वित महसूस कर रही हैं। समारोह में अनेक जानी-मानी सुप्रसिद्ध महिलाएं अतिथि के रूप में उपस्थित थीं, जिनमें बर्ड ग्रुप की अध्यक्ष राधा भाटिया, नीलम रूडी, मल्लिका नड्डा, प्रीति गोयल, मोनिका अरोड़ा, ललिता निझावन और राष्ट्र सेविका समिति दिल्ली प्रांत की सभी वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थीं।
मणिकर्णिका दौड़ में हरियाणा के हिसार की 17 वर्षीय शिवांगी पाठक ने भी हिस्सा लिया। शिवांगी ने 16 वर्ष की उम्र में माउंड एवरेस्ट पर चढ़ाई में सफलता हासिल की और उसके बाद दक्षिण अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी किलीमंजारो और आस्ट्रिया के माउंट एल्बर्न पर भी फतेह हासिल कर चुकी हैं। शिवांगी ने बताया कि यहां आकर उन्हें बहुत खुशी हुई और उनकी हम उम्र लड़कियों को प्रोत्साहन भी मिला। उन्होंने कहा कि ऐसी दौड़ महिलाओं में सशक्तिकरण को बढ़ावा देती हैं, इसीलिए वह विशेष रूप से दौड़ में हिस्सा लेने पहुंचीं। उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि लड़कियां उन क्षेत्रों में बढ़चढ़ कर हिस्सेदारी लें, जिनके बारे में उन्होंने कभी सोचा नहीं, तभी उनकी एक अलग पहचान भी बनेगी और देश का नाम भी रौशन होगा।