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कर्नाटक में ऑपरेशन कमल 3.0 शुरू, अब क्या होगा?

Tue, 15 Jan 2019 05:53 PM IST
दुष्यंत शर्मा बीबीसी, नई दिल्ली
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karnataka mla - फोटो : अमर उजाला

भारतीय जनता पार्टी कर्नाटक में जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) और कांग्रेस की गठबंधन सरकार को तोड़ने के प्रयास पहले भी कर चुकी है। ऑपरेशन कमल 3.0 इन प्रयासों से अलग नहीं है। कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे 15 मई को आए थे और उस दिन के बाद से ही बीजेपी असंतुष्ट कांग्रेसी विधायकों को अपनी ओर खींचने के प्रयास करती रही है और असंतुष्ट कांग्रेसी विधायकों ने भी मंत्री पद या अहम स्थान न मिलने की स्थिति में पाला बदलने की मंशा जाहिर करने में कोई हिचक नहीं दिखाई है। वो रह-रह पार्टी आलाकमान को संकेत देते रहे हैं। (सभी फोटोः मोहम्मद शाहिद/अमर उजाला)

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karnataka mla - फोटो : अमर उजाला

2008 में कर्नाटक में जब भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई थी तब पार्टी नेताओं ने बहुमत हासिल करने के लिए ऑपरेशन कमल की तरकीब ईजाद की थी। 224 सदस्यों की विधानसभा में भाजपा को 110 सीटें मिलीं थीं। वो बहुमत से दो सीट दूर थी। बहुमत हासिल करने के लिए बीजेपनी नेतृत्व ने तत्कालीन मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के मार्गदर्शन में कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों को अपनी ओर खींचा। विधायकों ने निजी कारण बताकर इस्तीफे दिए थे। विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद भाजपा ने इन विधायकों को अपने टिकट दिए और ये चुनकर फिर से सदन में पहुंच गए। ऑपरेशन कमल में हिस्सा लेने वाले आठ विधायकों में से पांच ही जीतने में कामयाब रहे। बाक़ी तीन को मतदाताओं ने हरा दिया। ये ऑपरेशन कमल 1.0 था।

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BJP Karnataka MLAs in hotel at gurugram - फोटो : self

केंद्र में सत्ताधारी भाजपा मोदी लहर में राज्य में सत्ता तक पहुंचने के लिए आश्वस्त दिख रही थी। लेकिन ये जोश तब ठंडा पड़ गया जब रुझानों में भाजपा 108 से ऊपर का आंकड़ा नहीं पकड़ सकी और अंततः पूरे नतीजे आने तक 104 सीटों पर जाकर रुक गई। 80 विधायक लाने वाली कांग्रेस ने 37 विधायक लेकर आई जनता दल सेक्यूलर को सरकार बनाने का न्यौता देकर सबकों चौंका दिया। एचडी कुमारास्वामी को कांग्रेस ने मुख्यमंत्री बनने का प्रस्ताव दिया। दोनों पार्टियों की संख्या को मिलाकर गठबंधन के पास कुल 117 सीटें हो गईं यानी बहुमत से पांच ज्यादा।

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karnataka mla - फोटो : अमर उजाला

बावजूद इसके राज्यपाल वाजूभाई वाला ने गठबंधन को नजरअंदाज़ करके सबसे ज्यादा सीटें लाने वाली भाजपा के येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्यौता दे दिया। येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए पंद्रह दिनों का समय दिया गया। लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और पंद्रह दिनों का समय करके एक दिन कर दिया गया। कांग्रेसी और जेडीएस के विधायकों को लुभाने के लिए भाजपा ने सभी प्रयास किए।सत्ता और पैसे का लालच दिया गया। एक ओर विधानसभा में विश्वास मत पर बहस शुरू हुई तो दूसरी ओर कांग्रेस ने अपने विधायकों को खरीदने की कोशिश के ऑडियो टेप जारी कर दिए। इनमें दावा किया गया कि कांग्रेसी विधायकों को बीजेपी के ताकतवर नेताओं ने ख़रीदने की कोशिश की। येदियुरप्पा ने विश्वास मत पर मतदान होने से पहले एक भावुक भाषण में अपने इस्तीफ़े की घोषणा कर दी और राजभवन की ओर चले गए। राज्यपाल ने एचडी कुमारास्वामी को सरकार बनाने और बहुमत साबित करने का न्यौता दिया।

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karnataka mla - फोटो : अमर उजाला
जून, जुलाई और अगस्त 2018
चर्चाएं चलती रहीं कि अपने भाई रमेश जार्कीहोली को मंत्री बनाए जाने से नाराज सतीश जार्कीहोली पाला बदलकर बीजेपी में जा सकते हैं। लेकिन सतीश जार्कीहोली ने साफ़ कर दिया कि उनका कांग्रेस पार्टी को छोड़ने का कोई इरादा नहीं है। बीजेपी नेता दावा करते रहे कि कांग्रेस और जेडीएस की सरकार ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाएगी और लोकसभा चुनावों से पहले गिर जाएगी। कांग्रेस भी मंत्री बनने की चाह रखने वालों की भावनाओं को शांत करती रही। कांग्रेसी विधायक जेडीएस के मंत्रियों के अपने काम न करने को लेकर नाराजगी जाहिर करते रहे। बीजेपी ने स्थिति पर क़रीबी नजर बनाए रखी।
 
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karnataka mla - फोटो : अमर उजाला
सितंबर 2018
बेलगावी में को-आपरेटिव बैंक के लिए हुए चुनावों भाई और कांग्रेसी विधायकों रमेश जार्कीहोली और सतीश जार्कीहोली और मुश्किल समय में कांग्रेस के संकटमोचक और जल संसाधन मंत्री डीके शिवा कुमार के बीच खुली झड़पें हुईं। शिवा कुमार ने जोर दिया कि जिले के प्रभारी मंत्री होने के नाते वो यहां के मामलों में दख़ल दे सकते हैं। मामला शांत करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बीच-बचाव कराया. रमेश जार्कीहोली ने कांग्रेस पार्टी छोड़ने की धमकी दी। जीत शिवा कुमार की हुई और उनके उम्मीदवार ने चुनाव जीत लिया। इसके बाद कांग्रेस को पता चला कि उसके तीन समर्थक- एमटीबी नागराज, डॉ. सुधाकर और एच नागेश पड़ोसी राज्यों के दौरे पर हैं। बीजेपी एक बार फिर से सक्रिय हो गई. कांग्रेसी विधायकों से कहा गया कि वो मंत्रीमंडल विस्तार को लेकर सब्र बनाए रखें। लेकिन बीजेपी के विधायकों को लुभाने के गंभीर प्रयास करने के बाद कांग्रेस की चिंताएं फिर सामने आईं।
 
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karnataka mla - फोटो : अमर उजाला
अक्तूबर
सिद्धारमैया ने येदियुरप्पा से कहा कि सरकार गिरने की भविष्यवाणी करना और कांग्रेसी विधायकों को लुभाना बंद करें।
नवंबर
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाएं फिर शुरू हुईं। बीजेपी ने स्थिति पर नज़र बनाए रखी।
दिसंबर- ऑपरेशन कमल 2.0
22 दिसंबर को मंत्रिमंडल विस्तार किया गया। कांग्रेस नेतृत्व ने रमेश जार्कीहोली को मंत्रीपद से हटाकर उनके भाई को मंत्री बनाने का निर्णय कर लिया। रमेश भूमिगत हो गए और बीजेपी के नेताओं ने ऑपरेशन कमल 2.0 शुरू होने की कानाफूसी शुरू कर दी। 26 दिसंबर को येदियुरप्पा के क़रीबी उमेश कट्टी ने कहा कि 12 कांग्रेसी विधायक उनके संपर्क में हैं और सरकार का गिरना तय हो गया है। येदियुरप्पा रमेश जार्कीहोली को दिल्ली लेकर पहुंचे लेकिन खाली हाथ लौटे। केंद्रीय नेतृत्व ने कहा कि पहले संख्या पूरी करो फिर आगे की बात करो। लेकिन वो अधिकतम तीन या चार विधायक ही जुटा सके। ये संख्या सरकार गिराने के लिए काफी नहीं है। कम से कम 14 विधायकों का इस्तीफा देना जरूरी है। इससे विधानसभा की संख्या 207 हो जाएगी और बहुमत भाजपा के हाथ में आ जाएगा।
 
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कर्नाटक तख्तापलट - फोटो : self
जनवरी 2019- ऑपरेशन कमल 3.0
रमेश जार्रकीहोली और चार अन्य कांग्रेसी विधायक मुंबई पहुंचे और एक होटल में टिक गए। चर्चाएं शुरू हो गईं कि कई और विधायक उनके पास पहुंच सकते हैं। कांग्रेस ने अपने सभी मंत्रियों और प्रभारी मंत्रियों को सतर्क कर दिया। एक नेता ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बीबीसी हिंदी से कहा, "करीब एक दर्जन विधायक हमारे साथ हैं लेकिन सभी को एक जगह नहीं रखा गया है। जैसे ही ये संख्या 17 पहुंचेगी हम उन्हें दिल्ली में एक प्रेसवार्ता में सामने लेकर आएंगे और ये सरकार लोकसभा चुनावों से पहले ही गिर जाएगी।" मुख्यमंत्री एचडी कुमारास्वामी ने दावा किया कि इस बार जेडीएस के विधायकों को भी लुभाया जा रहा है और कुछ को पचास करोड़ रुपए और मंत्री पद तक का प्रस्ताव दिया गया है। ऑपरेशन कमल 3.0 कामयाब होगा या नहीं ये अगले कुछ दिनों में पता चल जाएगा। फिलहाल कर्नाटक में नया राजनीतिक शो चालू है।
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