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आधार नहीं था तो दर्द से तड़पती गर्भवती को अस्पताल से निकाला, सड़क पर दिया बच्चे को जन्म

Mon, 12 Feb 2018 09:59 AM IST
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुरुग्राम
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pregnant lady delivery on road - फोटो : अमर उजाला
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली भाजपा सरकार में नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों ने संवेदनहीनता की हदें कर दीं। एक ओर प्रसव पीड़ा के मारे दर्द से 25 वर्षीय मुन्नी कराहती रही, रोती रही।
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pregnant lady delivery on road - फोटो : अमर उजाला
इलाज के लिए उसका पति एक कमरे से दूसरे कमरे तक भटकता रहा, लेकिन आधार कार्ड के बिना इलाज से मना कर दिया गया। तीन घंटे तक महिला को इलाज नहीं मिला। अंत में बिना किसी डॉक्टर या नर्स के रोड पर महिला ने बच्ची को जन्म दिया। महिला के पति अरुण कुमार उर्फ बबलू का कहना है कि 8.45 पर अस्पताल पहुंचे। इमरजेंसी में न तो किसी ने इलाज किया और न ही किसी ने देखा।
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pregnant lady delivery on road - फोटो : अमर उजाला
सीधे प्रथम तल पर गायिनी वार्ड में जाने को कहा। किसी तरह वहां पहुंचे तो इलाज करने की बजाय उसे पहले अल्ट्रासाउंड कराने को कहा। वहां महिला रोती रही। जब नीचे आने लगे, तो रास्ते में एक दर्जन नर्स मिलीं। कदम-कदम पर डॉक्टर मिले, लेकिन किसी ने हमदर्दी नहीं दिखाई। नीचे अल्ट्रासाउंड कराने गए तो वहां भी आधार कार्ड मांगा। वहां आधार नंबर दिया, लेकिन उन्हें भी आधार कॉपी चाहिए था। वक्त बीतता गया। मुन्नी रोती रही। दर्द से कराहती रही, लेकिन मरीजों की शोर में उसकी आवाज दब गई।

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pregnant lady delivery on road - फोटो : अमर उजाला
जेठ सुंदर लाल का कहना है कि जब तक परिजन पहुंचे, तब तक कुछ स्वास्थ्य कर्मचारियों ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। इमरजेंसी से 20 कदम की दूरी पर बैठकर वह रोती रही, लेकिन किसी ने पूछने की हिम्मत नहीं की। जब परिजन पहुंचे, तो इमरजेंसी में गए। तब तक प्रसव पीड़ा इतनी बढ़ गई कि मुन्नी ने बैठे-बैठे ही बच्ची को जन्म दे दिया। 
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pregnant lady delivery on road - फोटो : अमर उजाला
डिलीवरी के वक्त लोग बनाते रहे वीडियो
डिलीवरी के वक्त लोग भी तमाशबीन बने रहे। जब महिलाओं ने पीड़िता को देखा तो चारों तरफ से घेरा, लेकिन इस दौरान कई लोग वीडियो बनाते रहे। औरतों ने ही हमदर्दी दिखाई। लोगों को वहां से हटाया। फिर डॉक्टर पहुंची और डिलीवरी प्रक्रिया को पूरा किया। 
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pregnant lady delivery on road - फोटो : अमर उजाला
पहले भी बाहर होती रही हैं डिलीवरी: बीते एक वर्ष में करीब 7 महिलाओं की अस्पताल के बाहर डिलीवरी हुई है। इसमें अमूमन महिलाओं की लापरवाही की बात आती रही है। मरीज के देरी से आने के कारण गेट पर डिलीवरी का मामला सामने आया है।
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pregnant lady delivery on road - फोटो : अमर उजाला
क्या कहती हैं महिलाएं
शीला: अस्पताल की लापरवाही से एक महिला की इज्जत तार-तार हो गई। इस तरह की लापरवाही से जच्चा-बच्चा दोनों की जान चली जाती तो कौन जिम्मेदार होता।
-पिंकी: एक महिला के लिए बहुत ही शर्मिंदगी वाली बात है। इलाज की बजाय आधार मांगना जायज नहीं है। डॉक्टर, नर्स और सभी लोगों ने संवेदनहीनता दिखाई। 
-संतोष: पहले मरीज की जान डॉक्टर की प्राथमिकता होती है, लेकिन आधार के लिए इलाज नहीं दिया गया। लापरवाही की हद है। हम लोगों ने ही घेरा बनाकर डिलीवरी कराई। 
-संध्या कुमारी: डिलीवरी के बाद भी सूचना दी गई, लेकिन जल्दबाजी नहीं दिखाई गई। लोग वीडियो बनाते रहे, लेकिन मदद के लिए कोई आगे नहीं आया। गरीबों का कोई सुनने वाला नहीं है। 
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