हिंसक आंदोलन का शिकार हो सकती है दिल्ली, लोगों को ऐसे गुजारने पड़ रहे दिन
Thu, 16 Feb 2017 12:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
सार
- हड़ताली नेता बृहस्पतिवार को दिल्ली सरकार के मंत्री के साथ होने वाली बैठक का कर रहे इंतजार
-नतीजा न निकलने पर आंदोलन हाथ से निकलने की चेतावनी
- बुधवार को भी करीब डेढ़ लाख टैक्सियां न चलने पर दिल्ली एनसीआर के लोगों को उठानी पड़ी परेशानी
सड़क पर उतरे टैक्सी चालकों ने मुसाफिरों से वसूला तीन गुना तक किराया
ओला-उबर चालकों की हड़ताल का खामियाजा मुसाफिरों को उठाना पड़ा। रेलवे स्टेशनों व अंतरराज्यीय बस अड्डों पर सुबह-सुबह पहुंचे मुसाफिरों से टैक्सी व ऑटो चालकों ने तीन गुना से ज्यादा किराया वसूला। ज्यादा किराया देने से मना करने पर टैक्सी चालक आगे चलने को तैयार नहीं थे। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर टैक्सी की तलाश कर रहे सतनाम सिंह ने बताया कि वह अक्सर 100 रुपये देखकर मॉडल टाउन तक जाते थे लेकिन इस वक्त तीन सौ से ज्यादा किराया मांगा जा रहा है। सवाल करने पर वह दूसरी सवारी ढूढ़ लेने की सलाह मिल जाती है। समझ में नहीं आ रहा कि परिवार के साथ घर तक कैसे जाऊं। हड़ताली नेता बृहस्पतिवार को दिल्ली सरकार के मंत्री के साथ होने वाली बैठक का कर रहे इंतजार, नतीजा न निकलने पर आंदोलन हाथ से निकलने की चेतावनी
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ओला उबर चालकों की हड़ताल राजधानी में हो सकती है हिंसक
ओला और उबर चालकों की हड़ताल बुधवार को छठें दिन भी जारी है। दिल्ली-एनसीआर की 90 फीसदी से ज्यादा चालक सड़क पर नहीं उतरे। करीब डेढ़ लाख टैक्सियां बुधवार को भी न चलने से एनसीआर में लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। हड़तालियों ने चेतावनी दी है कि कि बृहस्पतिवार दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन के साथ बैठक में अगर कोई हल नहीं निकला तो आंदोलन हिंसक भी हो सकता है। इसकी पूरी तरह जिम्मेदारी दोनों कंपनियों की होगी। वहीं, जंतर मंतर पर अनशन कर रहे दो चालकों की हालत गंभीर है। चिकित्सकों ने दोनों को सिर्फ आराम करने की सलाह दी है।
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दूसरी तरफ बुधवार को दिल्ली की सड़कों पर उतरीं टैक्सी चालकों शकी मनमानी भी चलती रही। दिल्ली के रेलवे स्टेशनों, अंतरराज्यीय बस अड्डों समेत दूसरी जगहों पर चालकों ने मुसाफिरों से तीन गुना से भी ज्यादा किराया वसूला। जंतर मंतर पर अनशन व हड़ताल की अगुवाई कर रहे नेताओं का कहना है कि छठें दिन करीब दो लाख चालकों की अधीरता बढ़ती जा रही है। अभी तक न तो कंपनियों की तरफ से कोई भरोसा मिला है। न ही सरकार इस मामले में ठोस दखल दे सकी है।
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इससे हड़ताल को वापस लेने का कोई सवाल नहीं है। दूसरी ओर अनशन स्थल पर आज भबडसैकड़ों टैक्सी चालकों ने पहुंचकर अपना समर्थन दिया। इस दौरान जंतर मंतर को जाने वाले रास्तों पर उबर व ओला से जुड़ी टैक्सियों की लाइन लगने से जाम के हालात बने रहे।
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रवि राठौर के साथ अनशन पर बैठे सर्वोदय ड्राइवर एसोसिएशन ऑफ दिल्ली के अध्यक्ष कमलजीत गिल ने कहा कि बुधवार को बार-बार प्रदर्शनकारियों को शांति कायम रखने के लिये समझाना पड़ा लेकिन गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है।
बृहस्पतिवार को दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन ने मुलाकात के लिये बुलाया है। जैन की ओला, उबर के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक होनी है। अगर इसमें कोई माकूल समाधान नहीं निकला तो प्रदर्शनकारियों को समझा पाना बेहद मुश्किल होगा। इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से कंपनियों की होगी।