pranab mukherjee
मालूम हो कि यह मामला 2016 का है, उस वक्त देश के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी थे। उस समय उन्होंने उस बिल पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था जिसमें संसदीय सचिव के पद को ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के दायरे से बाहर रखा गया था। उस वक्त आम आदमी पार्टी ने अपने विधायकों के बचाव में यह कहा था कि उन्होंने किसी भी प्रकार का लाभ नहीं लिया है और सभी अपॉइंटमेंट कानूनी हैं।