आज 26 नवंबर है। 2008 में आज ही के दिन मुंबई के ताज होटल समेत अन्य जगहों पर हुए आतंकी हमले ने पूरी दुनिया को हिला दिया था। इस घटना ने एक ओर पूरी दुनिया के सामने आतंक का खौफनाक चेहरा दिखाया, तो दूसरी ओर उस आतंक का जवाब देने वाले वीर एनएसजी कमांडो की जांबाजी को। 60 घंटे चले इस ऑपरेशन की लाइव रिपोर्टिंग ने पूरी दुनिया के सामने एनएसजी की बहादुरी को घर-घर तक पहुंचा दिया।
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- फोटो : अमर उजाला
1984 में स्थापना के बाद से मुंबई आतंकी हमला एनएसजी के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ है। इस घटना ने देश की सुरक्षा के लिए नए सिरे से सोचने पर मजबूर किया और इसके बाद गृह मंत्रालय की ओर से एनएसजी को और मजबूत करने की प्रक्रिया शुरू हुई, जो अब भी जारी है। आतंकी घटनाओं के बदलते पैटर्न को लेकर भी एनएसजी अब चिंतित है और इसके लिए लगातार नए प्रयोग और तकनीक से खुद को सक्षम बनाया है।
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मुंबई हमले के वक्त केवल मानेसर में ही एनएसजी का कैंप था। यहीं से पूरी टीम आतंकवादियों से लोहा लेने के लिए मुंबई गई थी, जिसमें एनएसजी कमांडो मेजर संदीप उन्नीकृष्णन शहीद हो गए थे, जबकि पटौदी से ताल्लुक रखने वाले कमांडो सुनील यादव को दो गोलियां लगी थीं। 16 अक्तूबर को एनएसजी के स्थापना दिवस पर महानिदेशक सुधीर प्रताप सिंह ने कहा था देश में किसी भी हमले से निपटने में सक्षम हैं। एनएसजी विश्व की एक ऐसी कमांडो टीम है, जहां कोई गलती नहीं होती है। उन्होंने वर्ल्ड क्लास जीरो एरर फोर्स नाम दिया था। महानिदेशक ने एनएसजी को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ काउंटर टेरररिज्म का दर्जा देने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि एनएसजी कमांडो के बौद्धिक विकास के लिए आतंक विरोधी अध्ययन के लिए अलग से सेंटर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
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5 रीजनल हब पर 16 टास्क फोर्स हमेशा रहती हैं तैयार: शुरुआती दौर में आतंकी घटना के लिए केवल दिल्ली-एनसीआर तक एनएसजी का ध्यान अधिक केंद्रित था, लेकिन मुंबई हमले के बाद एनएसजी ने पांच रीजनल हब की स्थापना की। मुंबई, चैन्नई, हैदराबाद, गांधीनगर और कोलकाता में इसकी स्थापना की गई, जिससे अब यह देश के चारों दिशाओं को पूरा कवर करता है। इसके लिए आज एनएसजी की 16 टास्क फोर्स हैं, जो देश के किसी भी कोने में विमान द्वारा तुरंत जाने को तैयार रहती हैं। पांच रीजनल हब को ट्रेनिंग नोड्स का दर्जा दिया गया, जो राज्य पुलिस फोर्स की क्षमता निर्माण में भूमिका निभाता है।
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विश्व के बेहतरीन हथियार: वक्त के साथ एनएसजी ने खुद को अत्याधुनिक बनाया है। एनएसजी कमांडो की मारक क्षमता, सर्विलांस और कम्युनिकेशन में व्यापक बढ़ोतरी हुई है। एनएसजी ने आतंकी घटनाओं से निपटने के लिए हाई इंटेनसिटी गाड़ी शेरपा, हाईजैक से निपटने के लिए मार्स व्हीकल व नाइट विजन डिवाइस और स्नीपर राइफल को शामिल किया है। इसके अलावा सर्विलांस रोबोट, यूएवी डिवाइस समेत अन्य आधुनिक उपकरणों को भी शामिल किया है।
यह भी जानें: स्थापना से अब तक 80 हजार कमांडो को दिया जा चुका है प्रशिक्षण।
एनएसजी ने किए हैं 116 ऑपरेशन, सभी सफल कोई फेल नहीं।
53 कमांडो को मिले हैं वीरता पुरस्कार। इसमें अशोक, कीर्ति व शौर्य चक्र शामिल हैं।
19 एनएसजी कमांडो हुए हैं शहीद।
एनएसजी ने यूएस और थाईलैंड की स्पेशल फोर्स के साथ किया संयुक्त विशेष अभ्यास।
2016 में पहली बार हाईजैक व आतंक विरोधी विषयों पर राष्ट्रीय सेमिनार हुआ।
15 वीवीआईपी को एनएसजी देती है सुरक्षा।
मोटरसाइकिल के जरिये 7000 किलोमीटर का सफर तय करके देशभक्ति का दिया संदेश।
(फोटो:26/11 में सर्च ऑपरेशन में शहीद एनएसजी कमांडो मेजर संदीप उन्नीकृष्णन)