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नोएडा : सुपरटेक के ट्विन टावर में ट्रायल ब्लास्ट सफल, 22 मई को इमारत ढहाने का रास्ता साफ

Mon, 11 Apr 2022 05:16 AM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नोएडा
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ट्रायल ब्लास्ट से पहले पुलिस बेरिकेड लगाई गई - फोटो : अमर उजाला
सेक्टर-93ए स्थित सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट के ट्विन टावर परिसर में रविवार को टेस्ट ब्लास्ट किया गया। दो में से एक 32 मंजिला एपेक्स टावर के बेसमेंट के पांच कॉलम और 13वीं मंजिल के एक कॉलम में विस्फोटक लगाकर धमाका किया, जो सफल रहा। इसमें चार-पांच किलोग्राम विस्फोटक का इस्तेमाल किया, जिसे पलवल से मंगाया गया था। टॉवर निर्माण में भारी अनियमितताओं की शिकायत के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गत वर्ष 31 अगस्त को दोनों टावर को गिराने का आदेश दिया था।

टावर गिराने वाली कंपनी एडिफिस इंजीनियरिंग की सहायक दक्षिण अफ्रीकी कंपनी जेट डिमोलिशन के एमडी जोय ब्रिंकमैन ने बताया कि अगले 10 से 15 दिन तक टेस्ट ब्लास्ट का अध्ययन किया जाएगा। इसकी रिपोर्ट के आधार पर दोनों टावर में 22 मई को किए जाने वाले ब्लास्ट का डिजाइन तैयार किया जाएगा। टेस्ट ब्लास्ट के दौरान अलग-अलग तरह से एहतियात बरती गईं। इसका मकसद यह पता लगाना रहा कि अंतिम ब्लास्ट किस प्रकार करना है और कितना विस्फोटक प्रयोग करना होगा ताकि इमारतों को सुरक्षित तरीके से गिराया जा सके।
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ट्रायल ब्लास्ट से पहले विभिन्न एजेंसियों के अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
ब्रिंकमैन ने कहा कि टेस्ट ब्लास्ट से पता चला है कि इमारत काफी मजबूत है और इसे गिराना एक चुनौती होगी। एडिफिस इंजीनियरिंग के पार्टनर उत्कर्ष मेहता ने बताया कि टेस्ट ब्लास्ट के दौरान आसपास होने वाले कंपन का विश्लेषण आईआईटी चेन्नई की टीम से कराया गया। इसकी भी रिपोर्ट एक सप्ताह में तैयार होगी। बता दें कि एमराल्ड कोर्ट का एपेक्स 16 नंबर टावर है, जो कि 32 मंजिला है। इसी तरह से सियान 29 मंजिला है, जो कि 17 नंबर टावर के तौर पर जाना जाता है। इस मौके पर एडिफिस इंजीनियरिंग, जेट डिमोलिशन, सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टिट्यूट, नोएडा प्राधिकरण और सुपरटेक की टीम मौजूद रहीं।

तीन बार सायरन बजा, किया अलर्ट

टेस्ट ब्लास्ट के दौरान तीन बार सायरन बजाकर लोगों को अलर्ट किया गया। दोपहर 2.15 बजे पहली बार सायरन बजा। इस दौरान पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों को खाली कराया। पुलिसकर्मी माइक से अनाउंसमेंट के माध्यम से लोगों को ट्विन टावर से दूर जाने को कह रहे थे। इसके बाद 2:30 बजे एक बार फिर सायरन बजा और फिर ब्लास्ट हुआ। ब्लास्ट के 15 मिनट बाद 2:45 में एक बार फिर सायरन बजने पर आसपास की सोसाइटी के लोग घरों से बाहर निकले।

एडिफिस इंजीनियरिंग की सहयोगी कंपनी जेट डेमोलिशन के एमडी जोय ब्रिंकमैन का कहना है कि इमारत को सुरक्षित गिराने के लिए नई डिजाइन तैयार करना बेहद जरूरी होगा। नई डिजाइन टेस्ट ब्लास्ट के परिणामों पर निर्भर करेगी। हमारी ओर से इमारत के छह कॉलम में विस्फोटक लगाकर टेस्ट ब्लास्ट कराया गया। इसके परिणामों पर अगले 15 दिन तक अध्ययन किया जाएगा। इससे पता चलेगा कि एक-एक कॉलम में कितने विस्फोटक का प्रयोग करना होगा। ब्लास्ट के दौरान ब्रिंकमैन के अलावा उनके सहयोगी केविन स्मिथ, एडिफिस के साइट इंचार्ज मयूर मेहता और एक सब इंस्पेक्टर अंदर थे। ब्लास्ट प्वाइंट से कुछ मीटर की दूरी पर इन्होंने रिमोट के माध्यम से ब्लास्ट किया।
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ट्रायल ब्लास्ट के लिए लाया गया विस्फोटक - फोटो : अमर उजाला

प्रदूषण से बचाव के होंगे उपाय

टेस्ट ब्लास्ट से यह भी पता चलेगा कि अंतिम ब्लास्ट में जिओ फैब्रिक शीट की कितनी परतों की आवश्यकता होगी। इसका आकलन एडिफिस इंजीनियरिंग की ओर से किया जाएगा। इससे प्रदूषण से बचाव में कामयाबी हासिल होगी। माना जा रहा है कि अंतिम ब्लास्ट में धूल की 10 मीटर ऊंची परत उड़ेगी। इससे काफी प्रदूषण होगा। इसके अलावा नोएडा प्राधिकरण ने एडिफिस इंजीनियरिंग से इन्वायरनमेंटल इंजीनियरिंग प्लान ले लिया है। अब इस मामले में एहतियातन कार्रवाई शुरू की गई है। अभी से ही पीएम 10 और पीएम 2.5 की जांच हो रही है। इसकी साप्ताहिक रिपोर्ट तैयार हो रही है।

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ट्रायल ब्लास्ट से पहले मौके पर तैनात पुलिस अधिकारी - फोटो : अमर उजाला

छह प्वाइंट पर कराया गया कंपन का विश्लेषण

टेस्ट ब्लास्ट के दौरान छह प्वाइंट पर कंपन का विश्लेषण कराया गया। इसमें गेल की पाइपलाइन, एटीएस और एमराल्ड कोर्ट के छह प्वाइंट शामिल रहे। इसके लिए आईआईटी चेन्नई की विशेषज्ञ टीम लगी रही। यह टीम अब चेन्नई जाकर अगले 15 दिनों में जिओ टेक्नोलॉजी के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके माध्यम से यह पता चलेगा कि अंतिम ब्लास्ट के दिन कितना कंपन होगा।
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ट्रायल ब्लास्ट को देखने के लिए लगी भीड़ - फोटो : अमर उजाला

250 मीटर का एरिया कराया जाएगा खाली

एडिफिस इंजीनियरिंग के पार्टनर उत्कर्ष मेहता का कहना है कि अंतिम ब्लास्ट के दिन ट्विन टावर के 250 मीटर की रेडियस की सोसाइटियों को खाली कराया जाएगा। इसमें एमराल्ड कोर्ट के 15 टावर समेत एटीएस विलेज के सभी टावर शामिल होंगे। लोगों को कुछ समय के लिए घर खाली करने को कहा जाएगर्ष मेहता का कहना है कि अगर लोग घरों में भी रहें तो कोई दिक्कत नहीं होगी, लेकिन हम रिस्क नहीं लेना चाहते।

22 मई को टावर ढहाने का रास्ता साफ

सेक्टर-93ए स्थित एमराल्ड कोर्ट के ट्विन टावर के टेस्ट ब्लास्ट के बाद अब 22 मई को होने वाले अंतिम ब्लास्ट का रास्ता तैयार होगा। करीब 15 दिन अध्ययन के बाद अंतिम चरण के ब्लास्ट के लिए नई डिजाइन तैयार होगी। इसमें इमारत को गिराने के लिए हर पहलू को शामिल किया जाएगा।
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ट्रायल ब्लास्ट के बाद खुशी जताती सोसायटी की सुरक्षा टीम - फोटो : अमर उजाला
एडिफिस इंजीनियरिंग की सहयोगी कंपनी जेट डेमोलिशन के एमडी जोय ब्रिंकमैन का कहना है कि इमारत को सुरक्षित गिराने के लिए नई डिजाइन तैयार करना बेहद जरूरी होगा। नई डिजाइन टेस्ट ब्लास्ट के परिणामों पर निर्भर करेगी। हमारी ओर से इमारत के छह कॉलम में विस्फोटक लगाकर टेस्ट ब्लास्ट कराया गया। इसके  परिणामों पर अगले 15 दिन तक अध्ययन किया जाएगा। इससे पता चलेगा कि एक-एक कॉलम में कितने विस्फोटक का प्रयोग करना होगा। ब्लास्ट के दौरान ब्रिंकमैन के अलावा उनके सहयोगी केविन स्मिथ, एडिफिस के साइट इंचार्ज मयूर मेहता और एक सब इंस्पेक्टर अंदर थे।
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ब्लास्ट के बाद इमारत के पास उड़ते पक्षी - फोटो : अमर उजाला

100 करोड़ से ज्यादा का बीमा

एमराल्ड कोर्ट के तीन और एटीएस के चार टावरों का सर्वे किया जा रहा है। इनके सभी फ्लैटों का बीमा कराया जा रहा है, जो कि करीब 100 करोड़ से ज्यादा का होगा। इसका मकसद यह है कि अगर अंतिम ब्लास्ट के बाद इन फ्लैटों को क्षति पहुंचती है तो इसकी भरपाई की जा सके। इसके लिए बीमा प्रीमियम भरने का काम एडिफिस इंजीनियरिंग के जिम्मे होने की बात कही गई। बीमा के लिए नेशनल इंश्योरेंस, न्यू इंडिया इंश्योरेंस और टाटा एआईजी से संपर्क साधा गया है।
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