ट्रायल ब्लास्ट से पहले विभिन्न एजेंसियों के अधिकारी
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ब्रिंकमैन ने कहा कि टेस्ट ब्लास्ट से पता चला है कि इमारत काफी मजबूत है और इसे गिराना एक चुनौती होगी। एडिफिस इंजीनियरिंग के पार्टनर उत्कर्ष मेहता ने बताया कि टेस्ट ब्लास्ट के दौरान आसपास होने वाले कंपन का विश्लेषण आईआईटी चेन्नई की टीम से कराया गया। इसकी भी रिपोर्ट एक सप्ताह में तैयार होगी। बता दें कि एमराल्ड कोर्ट का एपेक्स 16 नंबर टावर है, जो कि 32 मंजिला है। इसी तरह से सियान 29 मंजिला है, जो कि 17 नंबर टावर के तौर पर जाना जाता है। इस मौके पर एडिफिस इंजीनियरिंग, जेट डिमोलिशन, सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टिट्यूट, नोएडा प्राधिकरण और सुपरटेक की टीम मौजूद रहीं।
तीन बार सायरन बजा, किया अलर्ट
टेस्ट ब्लास्ट के दौरान तीन बार सायरन बजाकर लोगों को अलर्ट किया गया। दोपहर 2.15 बजे पहली बार सायरन बजा। इस दौरान पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों को खाली कराया। पुलिसकर्मी माइक से अनाउंसमेंट के माध्यम से लोगों को ट्विन टावर से दूर जाने को कह रहे थे। इसके बाद 2:30 बजे एक बार फिर सायरन बजा और फिर ब्लास्ट हुआ। ब्लास्ट के 15 मिनट बाद 2:45 में एक बार फिर सायरन बजने पर आसपास की सोसाइटी के लोग घरों से बाहर निकले।
एडिफिस इंजीनियरिंग की सहयोगी कंपनी जेट डेमोलिशन के एमडी जोय ब्रिंकमैन का कहना है कि इमारत को सुरक्षित गिराने के लिए नई डिजाइन तैयार करना बेहद जरूरी होगा। नई डिजाइन टेस्ट ब्लास्ट के परिणामों पर निर्भर करेगी। हमारी ओर से इमारत के छह कॉलम में विस्फोटक लगाकर टेस्ट ब्लास्ट कराया गया। इसके परिणामों पर अगले 15 दिन तक अध्ययन किया जाएगा। इससे पता चलेगा कि एक-एक कॉलम में कितने विस्फोटक का प्रयोग करना होगा। ब्लास्ट के दौरान ब्रिंकमैन के अलावा उनके सहयोगी केविन स्मिथ, एडिफिस के साइट इंचार्ज मयूर मेहता और एक सब इंस्पेक्टर अंदर थे। ब्लास्ट प्वाइंट से कुछ मीटर की दूरी पर इन्होंने रिमोट के माध्यम से ब्लास्ट किया।