नोएडा की कई बहुचर्चित घटनाओं को देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टीगेशन (सीबीआई) भी नहीं सुलझा सकी है। कई मामलों में तो सीबीआई ही उलझ गई और आरोपियों को कोर्ट से राहत मिल गई। वहीं, एक मामले की जांच सीबीआई करती रही। जबकि, दूसरी एजेंसी ने घटना का खुलासा कर दिया। अभी भी कई मामलों की जांच सीबीआई के पास हैं लेकिन, इन मामलों में अभी तक सीबीआई कुछ खास सफलता हासिल नहीं कर सकी है। ऐसे में न्याय की आस लगाए बैठे पीड़ित आज भी एजेंसी और कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं।
वहीं, कमजोर साक्ष्यों का लाभ पाकर मामलों में दोषी बनाए गए कई आरोपी बाहर घूम रहे हैं। कानून के जानकारों और सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों की मानें तो किसी भी घटना में प्राथमिक साक्ष्यों को इकट्ठा करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। शुरुआत में ही स्थानीय पुलिस इन साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से एकत्र नहीं करती है। जब तक यह मामला सीबीआई तक पहुंचता है, तब तक सबूत इधर से उधर हो जाते हैं। ऐसे में मामलों को सुलझाना टेढ़ी खीर साबित होता है। आइए ऐसे ही कुछ केसों पर नजर डालते हैं जिनमें कातिलों को तलाशना सीबीआई के लिए भी कठिन हो रहा है।