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नोएडा सेक्टर 11: ऐसे लगा जैसे भूकंप आया और पल भर में सभी मलबे के नीचे दब गए, घायल आशु ने सुनाई आपबीती

Sun, 02 Aug 2020 12:14 PM IST
प्राची प्रियम गौरव शर्मा, नोएडा
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नोएडा सेक्टर 11 हादसा - फोटो : अमर उजाला
‘शुक्रवार शाम करीब 6:35 बजे का समय होगा। पहली मंजिल के आगे लगी शटरिंग पर कुर्सी पर बैठकर मैं फोन पर बात कर रहा था। नजदीक में गोपी खड़ा था। जबकि दूसरा प्लंबर सागर नजदीक के एक कमरे में खड़ा काम कर रहा था। ठेकेदार जैनेंद्र भी आसपास ही काम में लगा था। गोपी ने मुझसे कहा कि शाम हो रही है, मशीन का तार लपेट लो। जैसे ही मैंने हाथ पर तार लपेटना शुरू किया। ऐसे लगा जैसे भूकंप आया हो। शटरिंग एक ओर तेजी से नीचे खिसकी और धड़ाम से गिर गई।’ 

 
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नोएडा सेक्टर 11 हादसा - फोटो : अमर उजाला
यह बातें सेक्टर-11 स्थित फैक्ट्री में हादसे में घायल व जिला अस्पताल में भर्ती प्लंबर आशु ने बताईं। आशु ने बताया कि हादसा होते ही जैनेंद्र, गोपी, सागर और मैं एक झटके से नीचे आ गिरे। ऊपर मलबा पड़ा हुआ था। शरीर के ऊपर एक गर्डर था। नीचे एक पत्थर लगा हुआ था। शरीर पर कुछ मलबा था। आंखें खुल नहीं पा रही थीं। गर्डर के कारण सांस लेने में तकलीफ हुई तो फफककर रो पड़ा। फिर खुद को थोड़ी हिम्मत बंधाई और एक हाथ बाहर निकाला। 

 
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नोएडा सेक्टर 11 हादसा - फोटो : अमर उजाला
आंखें खोलकर आसपास का भयावह मंजर देखा। सिर की तरफ मलबे के बाहर उंगली और हथेली दिख रही थीं। वह हाथ जैनेंद्र का था। मैंने उसे कई बार हिलाकर देखा कि जिंदा है या नहीं, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। पैरों की तरफ गोपी दबा हुआ था। उसका केवल घुटना दिख रहा था। उसके घुटने पर पैर मारा, लेकिन वहां भी कोई हलचल नहीं हुई। 

 

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नोएडा सेक्टर 11 हादसा - फोटो : अमर उजाला
सागर दूर कहीं पूरा मलबे में दबा पड़ा था। सबसे पहले गोपी को निकाला गया। गोपी ने पांच बार तेज सांस ली। उसके बाद दम तोड़ दिया। जैनेंद्र को बाहर निकाला तो शरीर में कोई हलचल नहीं थी। फिर मुझे गर्डर हटाकर निकाला गया। बाद में गोपी को दबे मलबे से निकालकर एंबुलेंस से भेजा गया।

 
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नोएडा सेक्टर 11 हादसा - फोटो : अमर उजाला
जिंदगी-मौत से जूझ रहा सागर
आशू ने बताया कि हादसे के बाद मदद मिलने में करीब डेढ़ घंटे का समय लगा। सागर की स्थिति गंभीर है। उसे सिर में गंभीर चोट है। वह दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है।

 
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नोएडा सेक्टर 11 हादसा - फोटो : अमर उजाला
फैक्ट्री में थी दरार, फिर भी शुरू करा दिया काम
दसवीं कक्षा की पढ़ाई कर रहे आशु ने बताया कि फैक्टरी बेहद जर्जर हालत में है। तीसरी मंजिल के अलावा नीचे की दो मंजिलों पर भी निर्माण कार्य चल रहा था। प्लंबर का काम भी शुरू कर दिया गया था। फैक्ट्री की दीवारों में कई दरारें पड़ी हुई थीं। जेंनेंद्र को बताया कि फैक्ट्री की हालत ठीक नहीं है, लेकिन उसने यह कहकर टरका दिया कि हमारा काम केवल प्लंबर का है। वहीं, आशू के पिता सतीश कुमार ने बताया कि फैक्ट्री मालिक की लापरवाही है। जर्जर फैक्ट्री होने के बावजूद उसमें काम शुरू करा दिया। उन्होंने फैक्ट्री मालिक के खिलाफ तहरीर दी है।
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