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Noida Farmer Protest: किसानों के दिल्ली कूच से शहर में लगा महाजाम, प्रशासन को दी सात दिन की मोहलत; तस्वीरें

Mon, 02 Dec 2024 07:31 PM IST
आकाश दुबे माई सिटी रिपोर्टर, नोएडा

सार

महामाया फ्लाईओवर के पास से साढ़े तीन घंटा एक्सप्रेस-वे बंद रहा। ग्रेटर नोएडा जाने वाला ट्रैफिक भी करीब 50 मिनट रोका गया। ट्रैफिक दोनों तरफ से शहर के अंदर डायवर्ट करने से अंदर के रास्तों पर भी जाम लगा। कुछ किलोमीटर के सफर के लिए लोग घंटों परेशान रहे।
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Noida Farmer Protest - फोटो : अमर उजाला
नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरण से अपनी मांगें पूरी करने के लिए आंदोलन कर रहे किसानों ने सोमवार को महामाया फ्लाईओवर के पास जुटकर दिल्ली कूच किया। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले जुटे किसान पुलिस के रस्से और बैरिकेडिंग को पार करते हुए दलित प्रेरणा स्थल सेक्टर-95 में सेक्टर-18 के लिए चढ़ने वाले रैंप के पास तक पहुंच गए। फिर यहीं पर किसान सड़क पर बैठ गए। करीब एक घंटा प्राधिकरण व पुलिस अधिकारियों के साथ किसानों की वार्ता हुई। 
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Noida Farmer Protest - फोटो : अमर उजाला
किसान इस मांग पर अड़े रहे कि मांगे अभी मानी जाएं या उनको दिल्ली जाने दिया जाए। पुलिस-प्रशासन किसानों को वापस घर भेजने की कोशिश में था। आखिर में किसानों ने 7 दिन का समय दिया। तब तक किसान दलित प्रेरणा स्थल के अंदर ही धरना देंगे। इस दौरान एक्सप्रेस-वे दोनों तरफ से बंद होने से ट्रैफिक शहर के अंदर के रास्तों पर डायवर्ट कर दिया गया। फिर एक्सप्रेस-वे पर नोएडा आने वाले वाहन कई किलोमीटर लंबी लाइन में नजर आए। शहर के अंदर के रास्तों पर वाहनों का दबाव दोनों तरफ से अचानक से बढ़ने पर व्यवस्था चरमरा गई। इस तरह एक्सप्रेस-वे से लेकर शहर के अंदर की सड़कों पर लोग घंटों जाम में फंसे रहे। शाम तक वाहन रेंगते नजर आए। 
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Noida Farmer Protest - फोटो : अमर उजाला
संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से दिल्ली कूच के लिए दोपहर 12 बजे से किसान संगठनों को महामाया फ्लाईओवर के पास जुटने के लिए कहा गया था। मोर्चे में शामिल 10 संगठनों के किसान यहां पर जुटे और नारेबाजी की और फिर दिल्ली कूच का फैसला लिया। फिर किसान सड़क पर ही बैठ गए। इसके बाद अचानक उठकर आगे बढ़े और बैरिकेडिंग गिराते हुए दलित प्रेरणा स्थल के सामने तक पहुंच गए। यहां पर पुलिस और प्राधिकरण के अधिकारी वार्ता के लिए पहुंचे।

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Noida Farmer Protest - फोटो : अमर उजाला
मोर्चे में शामिल भारतीय किसान परिषद के अध्यक्ष सुखबीर खलीफा ने बताया कि मांगे पूरी करवाने के लिए अधिकारी 7 दिन में सचिव स्तर की वार्ता का प्रस्ताव लेकर शासन की तरफ से पहुंचे थे। वार्ता में किसानों ने अपना पक्ष स्पष्ट किया कि वार्ता होने और मांगे पूरी होने तक वह वापस नहीं लौटेंगे। इसके बाद किसानों ने सड़क खाली कर दी और अंदर जाकर दलित प्रेरणा स्थल में बैठ गए हैं। सुखबीर खलीफा ने यह भी कहा कि मांगे पूरी न होने पर किसान फिर से दिल्ली कूच करेंगे। किसान नेता अतुल यादव ने कहा कि किसान अब दिन रात दलित प्रेरणा स्थल में डेरा डाले रहेंगे। 
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Noida Farmer Protest - फोटो : अमर उजाला
साढ़े तीन घंटे बंद रहा एक्सप्रेस-वे, 3 किलोमीटर लंबी लगी वाहनों की लाइन
किसानों ने महामाया फ्लाईओवर के नीचे दोपहर 12 बजे से जुटना शुरू किया। भीड़ बढ़ने के साथ ही ग्रेटर नोएडा से नोएडा और दिल्ली आने वाले ट्रैफिक के लिए सिर्फ एक लेन बची। नारेबाजी के बीच किसान 12.40 बजे दिल्ली की तरफ बढ़े तो पूरी सड़क पर किसानों को देखते हुए फ्लाईओवर के पहले से एक्सप्रेस-वे का ट्रैफिक रोक दिया गया। ट्रैफिक सेक्टर-94 चरखा गोल चक्कर से मोड़कर दिल्ली की तरफ जाने वाले वाहनों को कालिंदीकुंज की तरफ डायवर्ट किया गया।
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Noida Farmer Protest - फोटो : अमर उजाला
तीन किलोमीटर लंबी वाहनों की कतार लगी
किसान और आगे बढ़े फिर महामाया फ्लाईओवर का वह लूप जिससे चढ़कर वाहन सेक्टर-38 की तरफ आते हैं वह खोल दिया गया और यहीं पर बैरिकेडिंग लगा दी गई। इसके बाद चिल्ला और डीएनडी बॉर्डर से आकर ग्रेटर नोएडा की तरफ जाने वाला ट्रैफिक भी रोक कर शहर की तरफ फिल्म सिटी फ्लाईओवर के समानांतर व उद्योग मार्ग से मोड़ दिया गया। करीब 50 मिनट बाद एक्सप्रेस-वे पर ग्रेटर नोएडा की तरफ जाने वाली सड़क खोली गई। लेकिन महामाया से डीएनडी, चिल्ला बॉर्डर व नोएडा आने वाले ग्रेटर नोएडा की तरफ से आने वाले वाहनों व कालिंदीकुंज से आने वाले वाहनों के लिए रास्ता बंद रहा। इस वजह से एक्सप्रेस-वे पर वाहनों का दबाव बढ़ा करीब 3 किलोमीटर तक वाहनों की लंबी लाइन लगी रही।
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प्रदर्शन करते किसान - फोटो : अमर उजाला
शहर के अंदर भी जाम जैसे हालात बने
शहर के अंदर जो ट्रैफिक मोड़ा गया उससे सेक्टर-38 से लेकर सेक्टर-1 न्यू अशोक नगर बॉर्डर तक जाम के हालात बन गए। उद्योग मार्ग से ग्रेटर नोएडा की तरफ जाने वाले वाहन मोड़े गए उनसे सेक्टर-15 से लेकर 38 तक जाम की स्थित बन गई। इसी तरह डीएनडी से लेकर पर्थला व अन्य रास्तों पर जाम की स्थिति रही। किसान करीब 4 बजकर 12 मिनट पर दलित प्रेरणा स्थल के सामने की सड़क खाली कर अंदर बैठने गए। फिर बैरिकेडिंग हटाने की शुरुआत हुई। इसके बाद करीब डेढ़ घंटे बाद ट्रैफिक सामान्य हो पाया। 

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किसानों का प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
जाम में कई एंबुलेंस भी फंसीं
नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेस-वे बंद होने से लगे जाम में कई एंबुलेंस भी फंसी। पहले दो एंबुलेंस आने पर किसानों का दिल्ली कूच जब नहीं शुरू हुआ था तब महामाया फ्लाईओवर के पास से उनको रास्ता देकर निकाला गया। इसके बाद एक एंबुलेंस तब आ गई जब किसान दलित प्रेरणा स्थल के सामने बैरिकेडिंग के ऊपर चढ़ गए थे। यहां की बैरिकेडिंग में क्रेन व गाड़ियां भी शामिल थीं जिनको हटाना मुमकिन नहीं था। इसलिए एंबुलेंस मुड़वाकर दूसरे रास्ते से निकाली गई।
 

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प्रदर्शन करते किसान - फोटो : अमर उजाला
सुबह दिल्ली पुलिस की चेकिंग में लग गई सभी बॉर्डर पर वाहनों की लाइनें
किसानों के दिल्ली कूच को लेकर दिल्ली पुलिस सतर्क थी। सोमवार सुबह करीब 9 बजे से दिल्ली पुलिस ने चिल्ला, डीएनडी, न्यू अशोक नगर बॉर्डर पर बैरिकेडिंग लगाकर दिल्ली पुलिस ने वाहनों की चेकिंग शुरू कर दी। इससे व्यस्त समय में दिल्ली जाने वाला ट्रैफिक फंस गया। डीएनडी, सेक्टर-1 ए लिंक रोड पर वाहनों की लंबी लाइन लग गई। 

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प्रदर्शन करते किसान - फोटो : अमर उजाला
तीनों प्राधिकरण से हैं किसानों की मांगें
दिल्ली कूच का ऐलान करने वाले किसानों का केंद्र या राज्य सरकार से कोई गतिरोध नहीं है। इनकी मांगे नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरण से जुड़ी हुई हैं। किसानो की प्रमुख मांगे तीनों प्राधिकरण के किसानों को 10 प्रतिशत प्लॉट, 2013 भूमि अधिग्रहण नियमावली प्रभावी करने और संपूर्ण आबादी निस्तारण की हैं। इसके अलावा अलग-अलग संगठनों की प्राधिकरण से मांगे गांव के विकास, मुआवजा न दिया जाना, अतिक्रमण के नाम पर बुल्डोजर चलाने पर रोक व अन्य हैं। 

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दिल्ली बॉर्डर पर भारी पुलिस बल तैनात - फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला से भारतीय किसान दल के नेता बोले- किसानों की मांग नहीं सुन रही सरकार
भारतीय किसान दल के नेता हरीश कुमार ने अमर उजाला से कहा कि किसानों की लंबे समय से मांग सरकार लगातार नहीं सुन रही है। हमारी ही जमीन को विकसित करने के नाम पर सरकार हमसे जमीन ले रही है, लेकिन इसके बाद हमारे ही बच्चे हमेशा-हमेशा के लिए बेरोजगार हो जाएंगे। उनके पास मजदूरों की तरह काम करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं रहेगा। हरीश कुमार ने कहा कि उनकी मांग है कि जिस किसान की जितनी भी जमीन ली जाए, विकसित करने के बाद उसके दस प्रतिशत के बराबर जमीन उसे दे दी जाए। इन जमीनों पर किसान अपने लिए दाल-रोटी का जुगाड़ कर सकेंगे। वे कोई दुकानदारी या होटल जैसा काम करके अपना पेट पाल सकेंगे। लेकिन यदि किसानों से सब कुछ ले लिया जाएगा तो उनके पास भीख मांगने और मजदूरी करने के अलावा और कोई काम नहीं बचेगा।
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महामाया फ्लाईओवर से आगे बढ़ते किसान - फोटो : अमर उजाला
किसान प्रदर्शनकारी नरेश कुमार ने कहा कि सरकार समय रहते उनकी मांगें सुन लेती तो उन्हें प्रदर्शन न करना पड़ता। लेकिन सरकार उनकी मांगें सुनने की बजाय दूसरे सभी काम कर रही है। वे ठंड के महीने में सड़कों पर नहीं रहना चाहते हैं, लेकिन सरकार उन्हें मजबूर कर रही है कि किसान सड़कों पर ही रात बिताए। नरेश कुमार ने कहा कि उनके जैसे दस हजार से अधिक साथी इस किसान प्रदर्शन में लगातार धरना देने के लिए तैयार हैं।
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