हरेंद्र चौहान को अब वजन तौलने की मशीन लेकर फुटपाथ पर नहीं बैठना पड़ेगा। उसे अब अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए सड़क पर बैटने की जरूरत नहीं है। यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कक्षा नौवीं के इस छात्र को रविवार को 5 लाख का चेक प्रदान किया है। हरेंद्र के घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि उसे अपनी पढ़ाई के लिए खुद ही कमाना पड़ता है। इसके लिए वो नोएडा सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन के बाहर वजन तौलने की मशीन रखकर वहीं अपनी पढाई भी करता है।
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किन हालात के चलते फुटपाथ पर पढ़ने को मजूबर हुआ हरेंद्र
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हरेंद्र लोगों की नजरों में तब आया जब नोएडा के ही रहने वाले विकास शारदा ने उसकी फोटो खींचकर अपने फेसबुक पर पोस्ट की और वो वायरल हो गई। इसके बाद सीएम ने खुद हरेंद्र को बुलाकर उसे पुरस्कृत किया। इसके बाद तो हरेंद्र के लिए मदद करने वालों की लाइन लग गई है।
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गौरतलब है कि कई स्वयंसेवी संस्थाए, व्यापारिक घराने, उद्यमी और राजनेता भी हरेंद्र की मदद के लिए सामने आए हैं। एक खेल एनजीओ के संचालक महेंद्र अग्रवाल ने मुंबई से मेल करके पूछा है कि वो इस बच्चे की कैसे मदद कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने ये भी पूछा है कि वो किसके नाम से चेक भेज सकते हैं? दिलीप कड़ाकिया ने पुणे से हरेंद्र के स्कूल का पता पूछा है ताकि वो हरेंद्र की फीस भर सकें। वहीं सरीन कुरैशी ने बताया कि हरेंद्र की कहानी सुनकर वो रो पड़े।
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बता दें कि सीएम अखिलेश के मदद देने से पहले ही हरेंद्र की तस्वीर वायरल हो जाने के बाद कई लोगों ने उसे मदद के लिए प्रस्ताव रखा था। इसमें समाजवादी पार्टी युवा मोर्चा के नोएडा अध्यक्ष आश्रय गुप्ता भी शामिल हैं। आश्रय ने तो हरेंद्र से ये भी वादा लिया कि अब वो मेट्रो स्टेशन के बाहर नहीं बैठेगा। रविवार को आश्रय ने कहा कि वो हरेंद्र की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहेगा और उसकी पढ़ाई में उसे मदद करेगा।
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आखिर हमारे बेटे की मेहनत रंग लाई और उसकी वजह से हम लखनऊ में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलने पहुंच पाए। यह कहना है कि छात्र हरेंद्र के पिता रामगोपाल सिंह चौहान का। रविवार शाम को अपने बेटे के साथ मुख्यमंत्री के हाथों से सम्मानित होकर वापस नोएडा पहुंचे थे। नोएडा पहुंचने के बाद प्रशासन की ओर से पिता-पुत्र को घर छोड़ने से पहले खाना खिलाया गया।
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घर पहुंचने पर आसपास के लोगों ने उनका स्वागत किया। पड़ोस के लोगों ने घर पहुंचने पर उन्हें घेर लिया। मूल रूप से इटावा निवासी और नोएडा के होशियारपुर में रहने वाले रामगोपाल एक दिन के बतौर राजकीय अतिथि के तौर पर सम्मानित होकर फूले नहीं समा रहे थे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की ओर से उनके बेटे को पांच लाख रुपये का चेक दिया गया। इसके अलावा एक डायरी दी गई, जिसमें 2012 के बाद यूपी सरकार की ओर से सम्मानित किए गए लोगों का ब्योरा दिया गया है। वहीं एक गुलदस्ता भी मिला।
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उन्होंने बताया कि बेटे की वजह से ही उन्हें मुख्यमंत्री से मिलने और हाथ मिलाने का मौका मिला। बेटे को मिले पांच लाख रुपये उसके अकाउंट में जमा कराने की बात कही। उनका कहना है कि इस पैसे में से वह एक रुपया भी नहीं लेंगे। यह पैसा हरेंद्र का है और वह इससे अपनी आगे की पढ़ाई में मदद लेगा। छात्र हरेंद्र से बातचीत करने पर उसने बताया कि उसे मुख्यमंत्री से मिलकर बहुत अच्छा लगा। वह फौजी अफसर बनकर देश की सेवा करना चाहेगा। उसने आगे पढ़ाई में और मेहनत करने की बात कही।
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पहली बार फ्लाइट से दिल्ली से लखनऊ और वापसी के बाद छात्र और परिजन बेहद खुश नजर आए। पिता रामगोपाल ने बताया कि उसने जीवन में कभी भी नहीं सोचा था कि वह हवाई जहाज में बैठेंगे। हरेंद्र भी हवाई जहाज में बैठकर बेहद खुश था। पहली बार हवाई यात्रा की वजह से हरेंद्र की तबियत खराब हो गई। नोएडा पहुंचने पर उसने कई बार उल्टियां की। पिता का कहना है कि सुबह से शाम तक बेहद व्यस्त कार्यक्रम और हवाई यात्रा की वजह से उसकी तबियत खराब हो गई। श्रीकृष्ण इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल हरपाल सिंह ने बताया कि कॉलेज प्रबंधन की ओर से छात्र हरेंद्र की हरसंभव मदद की जाएगी। छात्र का नाम गरीब बच्चों की लिस्ट में रखा गया है और ऐसे बच्चों को किताबें और यूनिफॉर्म आदि मुफ्त में दिया जाता है।
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13 साल का हरेंद्र नोएडा सेक्टर-51 के एक कमरे वोल घर में रहता है। वो रोज सुबह 6 बजे उठ जाता है। स्कूल जाने के लिए उसे 5 किमी पैदल चलना पड़ता है। स्कूल के बाद वो कंप्यूटर की पढ़ाई करता है और शाम 7 बजे वो मेट्रो स्टेशन पर जाकर बैठ जाता है जहां वो 9 बजे तक रहता है। उसके पिता ने 2013 में अपनी नौकरी गंवा दी थी जिसके बाद वो वजन तौलने की मशीन लेकर मेट्रो स्टेशन पर बैठने लगे। उसी साल जून में उसके माता-पिता अपने गांव इटावा चले गए। चूंकि उसे अपने स्कूल का कुछ प्रोजेक्ट पूर करना था तो हरेंद्र गांव नहीं गया।
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स्कूली प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए उसे कुछ पेपर, कलर और फाइल खरीदने थे लेकिन उसके लिए हरेंद्र को पैसों की जरूरत थी। तब उसने अपने पिता की वजन तौलने वाली मशीन उठाई और मेट्रो स्टेशन पर जाकर बैठ गया। वो वहां अपने किताबों के साथ जाता था ताकि वो पढ़ाई भी कर सके जिससे उसका समय व्यर्थ ना जाए। इस तरह उसने करीब 200 रुपए अपने प्रोजेक्ट के लिए बचा लिए। बता दें कि हरेंद्र के पिता को पोलियो है और उन्हें चलने में कठिनाई होती है। हरेंद्र दो भाई हैं, विवेक 17 साल का है और हिमांशु 7 साल का है। हरेंद्र का पसंदीदा विषय मैथ्स है और वो हमेशा क्लास में प्रथम, द्वितिय या तृतीय ही आता है।