भारतीय रिजर्व बैंक के 23वें गवर्नर रह चुके रघुराम राजन को आज घोषित होने वाले इकोनॉमिक्स का नोबल पुरस्कार मिल सकता है। नोबेल पुरस्कार की दौड़ में रघुराम राजन टॉप 6 लिस्ट में शुमार हो चुके हैं। अब दोपहर 2:30 बजे ही पता चलेगा कि आखिर उन्हें यह पुरस्कार मिलता है कि नहीं। लेकिन यह पुरस्कार मिल किस लिए मिल रहा है हम यही बात आपको अपनी स्टोरी में बताने वाले हैं। साथ ही रघुराम राजन के बारे में कुछ दिलचस्प बातें भी हम अपनी स्टोरी में बताएंगे।
विज्ञापन
2 of 10
रघुराम राजन
- फोटो : Getty Images - file
नोबेल पुरस्कारों की लिस्ट तैयार करने वाली रिसर्च कंपनी क्लैरिवेट एनालिटिक्स के अनुसार, कॉरपोरेट फाइनेंस से जु़ड़े निर्णयों के दायरे को बढ़ाने में अनोखे योगदान के लिए राजन के नाम पर विचार किया जा रहा है। राजन इस समय यूनिवसिर्टी ऑफ शिकागो के बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में कैथरीन डूसक मिलर डिस्टिंग्विश्ड सर्विस प्रोफेसर हैं।
विज्ञापन
3 of 10
RBI governor Raghuram Rajan
- फोटो : PTI
सबसे कम उम्र में बने IMF के प्रमुख अर्थशास्त्री- रघुराम राजन महज 40 साल की उम्र में ही आईएमएफ के चीफ इकोनॉमिस्ट बनने वाले पहले गैर-पश्चिमी और सबसे युवा व्यक्ति थे।
4 of 10
जनता को पसंद आया आरबीआई गर्वनर का काम
- फोटो : Reuters
2008 के वित्तिय संकट की तीन साल पहले ही कर दी थी घोषणा- आईएमएफ चीफ बनने के तीन साल बाद राजन साल 2005 में एक बार फिर सुर्खियों में आए। उन्होंने अमेरिका में इकोनॉमिस्ट और बैंकर्स की वार्षिक मीटिंग में 2008 के विश्वव्यापी वित्तीय संकट के आने की घोषणा उसी समय कर दी थी।
विज्ञापन
5 of 10
रघुराम राजन
- फोटो : ANI
उन्होंने वित्तिय संकट के आने कारण अपने पेपर में यह बताया था कि वित्तिय बाजार विकसित होकर अधिक जटिल और कम सुरक्षित हो गए हैं। राजन ने डेरिवेटिव्स जैसे क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप्स जोखिम भरे हैं ये करार दिया था। साल 2008 में इन्हीं क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप्स की वजह से अमेरिकी अर्थव्यवस्था गिर गई थी।
विज्ञापन
6 of 10
raghuram rajan
2013 में बने आरबीआई गवर्नर- 2013 में यूपीए-2 की सरकार ने रघुराम राजन को आरबीआई का गवर्नर नियुक्त किया था। हालांकि आरबीआई गवर्नर के रूप में राजन अभी और काम करते रहना चाहते थे, लेकिन कुछ विवादों के कारण ऐसा नहीं हो पाया और 2016 में वे फिर प्रोफेसर की नौकरी में अमेरिका लौट गए।
विज्ञापन
7 of 10
manmohan singh
जिस वक्त राजन को आरबीआई का गवर्नर बनाया गया था उस वक्त प्रधानमंत्री थे मनमोहन सिंह और दोनों में एक बात कॉमन थी। यह थी उनकी उम्र उस वक्त दोनों ही 50 साल के थे।
8 of 10
raghuram rajan
- फोटो : सोशल मीडिया
आईआईटी दिल्ली और आईआईएम अहमदाबाद में गोल्ड मेडलिस्ट रहे राजन को फॉरेन पॉलिसी मैगजीन के 2010 और 2012 के संस्करण में टॉप ग्लोबल थिंकर्स की टॉप 100 लिस्ट में शामिल किया गया था।
9 of 10
raghuram rajan
- फोटो : सोशल मीडिया
हाल ही में राजन एक बार फिर सुर्खियों में थे और वो भी अपनी एक पुस्तक को लेकर। राजन ने ‘आई डू व्हाट आई डू’ नाम की एक पुस्तक लिखी है जिसमें उन्होंने मोदी सरकार के नोटबंदी संबंधी निर्णय की आलोचना की है। अपनी इस किताब के माध्यम से राजन ने आरबीआई गवर्नर के रूप में अपने अनुभव भी साझा किए हैं। राजन इससे पहले भी 2011 में ‘फॉल्ट लाइंस’ नाम की पुस्तक लिख चुके हैं। इसमें उन्होंने बताया था कि किस तरह वित्तीय व्यवस्था की त्रुटियों की वजह से वर्ल्ड इकोनॉमी पर संकट मंडरा रहा है।
राजन को 2013 में रुपये के संकट से निपटने के लिए ब्रिटिश मैगजीन सेंट्रल बैंकिंग्स ने सेंट्रल बैंकर ऑफ द ईयर का अवार्ड दिया था। इसके साथ ही रघुराम राजन स्टॉकहोम स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, केलॉग स्कूल ऑफ मैनेजमेंट और एमआईटी स्लॉअन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के भी विजिटिंग प्रोफेसर रहे हैं।