वर्ष 2012 के दिसंबर की उस काली रात में मुनीरका के जिस बस स्टैंड से दर्दनाक कहानी की शुरुआत हुई थी वहां अब सात साल बाद हालात काफी बदल चुके हैं। यहां निर्भया अपने दोस्त के साथ घर जाने के लिए पहुंची थी, लेकिन उसे क्या मालूम था कि यह उसकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा और यहां से शुरू हुई उसके जीवन की दर्दनाक कहानी उसकी सांस थमने के साथ खत्म हो जाएगी।