Nirbhaya Rape Case
निर्भया के माता-पिता की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं लेते। सुबकते हुए कहते हैं कि 16 दिसंबर 2012 से 16 दिसंबर 2018 की सुबह तक एक भी दिन ऐसा नहीं गया, जब किसी अखबार की हेडलाइन में दुष्कर्म, छेड़छाड़ की खबर न हो। जब भी ऐसी कोई खबर पढ़ते हैं तो दिल के जख्म ताजा हो जाते हैं। हम उन बेटियों व उनके परिजनों का दर्द समझते हैं। जिस पर गुजरती है, वहीं समझता है। 16 दिसंबर 2012 को जब निर्भया कांड हुआ तो देश ही नहीं, दुनियाभर में बवाल दिखा। सरकार ने भी महिला सुरक्षा पर बड़े-बड़े वायदे किए, लेकिन कोई बदलाव देखने को नहीं मिला। आज भी बेटियां सुरक्षित नहीं हैं?