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निर्भया कांड के 6 सालः उस बस में आज भी मौजूद हैं दरिंदगी के निशां, जिससे दहल गया था पूरा देश

Sat, 15 Dec 2018 05:05 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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VIDEO: इस बस में हुई थी निर्भया के साथ दरिंदगी - फोटो : self
6 साल पहले भारत की राजधानी में 16 दिसंबर 2012 की उस ठंडी रात को ऐसी दरिंदगी को अंजाम दिया गया, जिससे न सिर्फ पूरा देश आक्रोश से उबल उठा था बल्कि बड़ी संख्या में बच्चे, नौजवान और बूढ़े सभी सड़कों पर उतर आए थे। महिलाएं पहली बार अपने हक के लिए सड़कों पर उतरी थीं और देश की संसद से लेकर विश्व मीडिया में भारत की महिलाओं की स्थिति पर बहस तेज हो गई थी। उस काली रात में दिल्ली की सड़कों पर DL 1PC 0149 नंबर की बस दौड़ती रही और हैवानियत की सारी हदें पार होती रहीं। किसी को पता न चला। वो बस जो निर्भया की जिंदगी का काल बन गई आज ऐसी अवस्था में है कि उसे देखकर कोई भी सच में डर जाए। आइए जानते हैं कि निर्भया गैंगरेप में इस्तेमाल हुई उस बस का आज कैसा है हाल...
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nirbhaya gangrape bus
दिनेश यादव नाम के शख्स पर रजिस्टर ये बस उसे फिर कभी वापस नहीं मिली। इस बस को देखकर आपको आज भी यही लगेगा कि जैसे ये खुद निर्भया से होने वाली दरिंदगी की दास्तां चीख-चीख कर आपको बता रही हो। बस के अंदर घुसते ही आपको बस का ओडोमीटर दिखाई देगा जिसमें आपको 2,26,784 किलोमीटर दिखाई देगा। यानी इस कांड से पहले यह बस इतने किलोमीटर चल चुकी थी।
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nirbhaya gangrape bus - फोटो : अमर उजाला
बस के डैशबोर्ड और इंजन पर जंग लग चुका है और डैशबोर्ड के पास सीट के नीचे एक बेल्ट का बकल गिरा दिखाई देगा। कुछ महीने पहले तक इसे साकेत कोर्ट परिसर में पार्क कर सुरक्षित रखा गया था। हालांकि बस मालिक के दो-दो बार आवेदन करने पर भी पुलिस ने इस बस को उसे नहीं सौंपा।

इसकी वजह ये है कि उस वक्त केस ताजा था और ये बस सड़क पर उतरने के बाद कानून-व्यवस्था में अवरोध पैदा कर सकती थी। इस बस को पुलिस ने वारदात के अगले दिन यानी 17 दिसंबर को दिल्ली के संत रविदास कैंप से बरामद किया था, जहां इस केस के 6 में से 4 दोषी रहते थे। यह बस केस में पर्याप्त फॉरेंसिक सबूत जुटाने का माध्यम थी।

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nirbhaya gangrape bus - फोटो : अमर उजाला
पूरे विश्व में देश को शर्मसार करने वाली इस भयानक वारदात के अगले दिन जब लोग जागे तो इस खबर ने उन्हें सन्न कर दिया। इसके बाद पूरे देश में तमाम धरने-प्रदर्शन हुए और लोगों ने मांग की कि इस बस को आग लगा देना चाहिए। निर्भया से हैवानियत इसी बस में हुई थी जिसके कारण यह बस सबूतों के लिहाज से बेहद अहम थी और यही वजह है कि इसे सुरक्षित रखना पुलिस की सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी। लोगों के गुस्से से इसे बचाया जा सके और सारे सबूत पाए जा सकें इसके लिए पुलिस ने इसे बड़े ही गुपचुप तरीके से सुरक्षित रखने का प्लान बनाया। पुलिस ने बेहद ही सीक्रेट तरीके से इस बस को त्यागराज स्टेडियम के बाहर खड़ी बहुत सी बसों के बीच ले जाकर खड़ा कर दिया ताकि किसी को भी शक न हो।
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nirbhaya gangrape bus
इस बस में कोई प्रवेश न कर सके, यहां से सामान न चुरा सके और इसका तोड़-फोड़ या जला न सके, इसके लिए पुलिस ने सादे कपड़ों में सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए। यह वही जगह थी जहां सड़क के किनारे स्टेडियम के पास खड़ी इस बस की जांच फॉरेंसिक एक्सपर्ट ने की और बाद में इन्हीं सबूतों से 6 लोग दोषी सिद्ध हुए। इन बीते 6 सालों में यह बस साकेत कोर्ट में पार्क रही और बाद में वसंत विहार पुलिस स्टेशन में। इस बस की रखवाली पुलिस टीम द्वारा बीते अप्रैल तक की जाती रही। क्योंकि अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया था कि थाने अपने प्रांगण में पड़े सभी पुराने वाहनों को साफ कर दें और कैंपस साफ-सुथरा रखें। बीते अप्रैल में इस बस ने पूरे 6 साल बाद फिर चली और वही रास्ता अपनाया जो उस काली रात(16 दिसंबर 2012) को लिया था। हालांकि इस बार यह बस क्रेन के जरिए इन रास्तों से गुजरी और चुपचाप पश्चिम दिल्ली में वहां पहुंची जहां आज भी वो पार्क है। यह एक डंप यार्ड में पार्क है।
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nirbhaya gangrape bus - फोटो : अमर उजाला
बस की सीटों की बात की जाए तो पीछे से दूसरी सीट ऐसी है जैसे बिस्तर बनाया गया हो। यह निर्भया के उस बयान की पुष्टि करते हैं जिसमें उसने पुलिस को बताया था कि एक ओर उसके दोस्त को पीटा जा रहा था वहीं उसे बस की पीछे वाली सीट पर ले जाकर उसके साथ गैंगरेप किया। बस के पीले पर्दे जिसने उन दरिंदों को छिपा लिया था जब वह निर्भया के साथ हैवानियत कर रहे थे, वो आज बदरंग हो चुके हैं। ज्यादातर जगह से फट भी चुके हैं। सीट पर लगे गद्दे या हटा लिए गए हैं या उन्हें कीड़े खा गए हैं। अब बस की किसी खिड़की में शीशा नहीं है। इन्हें 2013 में जब इस केस की शुरुआती दौर की सुनवाई चल रही थी तो साकेत कोर्ट में प्रदर्शनकारियों ने तोड़ दिया था।
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nirbhaya gangrape bus - फोटो : अमर उजाला
इस केस से शुरू से जुड़े रहे एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि, 'अब इस बस को कोई नहीं खरीदेगा। इसे किसी दिन कबाड़ में बेच दिया जाएगा। शुरुआत में इस बस के मालिक दिनेश यादव ने इसे वापस पाने की कोशिश की थी लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि इसे दोबारा वापस पा लेने से कुछ नहीं होगा। इस बस की पूरी कीमत आज के समय में 5000 से ज्यादा की नहीं होगी।'

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nirbhaya gangrape bus - फोटो : अमर उजाला
अफसर ने बस के मालिक के बारे में और बात बताते हुए कहा कि ट्रेवल एजेंसी चलाने वाले दिनेश को जालसाजी करन के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वह नोएडा में रहता था और उसकी 11 बसें थीं जो बुराड़ी के एक फर्जी पते पर रजिस्टर कराई गई थीं। अधिकारी ने बताया, उसकी सभी 11 बसें जब्त कर ली गईं।
वह फर्जी पते पर बसे रजिस्टर कराने के लिए जेल गया। उसका व्यापार बड़ा था और एक बड़ी ट्रवेल एजेंसी चलाता था, इसलिए पैसे और आर्थिक नुकसान का उस पर ज्यादा असर न पड़ा हो। लेकिन जब आपको पुलिस, जेल और अदालत के चक्कर लगाने पड़ते हैं तो सारा गेम ही बदल जाता है। हमने अच्छे-अच्छों को दवाब में टूटते देखा है।

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nirbhaya gangrape bus - फोटो : अमर उजाला
16 दिसंबर 2012 की इस वारदात के पहले बस ने दो साल में 8 बार चालान भरा और 6 बार जब्त किया गया। लेकिन हर बार दिनेश यादव फाइन भरने के बाद इसे सड़क पर ले आता था। इस वारदात के हफ्तों बाद तक यादव के नोएडा सेक्टर-62 स्थित ऑफिस पर प्रदर्शनकारियों ने हंगामा किया था। इसके चलते लगभग एक साल तक दिनेश और उसके भाई को अपना फोन बंद रखना पड़ा। ये वो नंबर थे जो बस के पीछे अंकित थे और इस घटना के बाद इनकी फोटो काफी प्रसारित की गई। इन नंबरों पर दिनेश को गालियों भरे फोन आने लगे थे और इसी वजह से इन्होंने अपना ऑफिस भी बदल लिया।
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nirbhaya gangrape bus
नोएडा सेक्टर 62 के अन्य ट्रवेल ऑपरेटर्स का कहना है कि यादव ने अपनी कंपनी का नाम बदल लिया है और दिल्ली शिफ्ट हो गया है। हालांकि जब उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। दिनेश के फोन पर कॉल करने पर भी उसने बात करने से मना कर दिया। उनके ट्रवेल ऑफिस के बाहर एक ड्राइवर ने बताया कि अब यादव परिवार वापस ट्रवेल के बिजनेस में आ गया है। इस बार उनकी बसें जीपीएस भी लगा है ताकि ड्राइवरों की निगरानी हो सके।
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