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फांसी कोठी: जिसे देखते ही खड़े हो जाते हैं कैदियों के रोंगटे, आंखों के सामने नाचने लगती है मौत

Sun, 15 Dec 2019 11:33 AM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कैसी होती है फांसी कोठी - फोटो : अमर उजाला
16 दिसंबर, 2019 को निर्भया के साथ हुई दरिंदगी को सात साल हो जाएंगे। विडंबना है कि देश की बहादुर बेटी के साथ दरिंदगी की सारी हदें पार करने वाले छह हैवानों में से पांच अब भी जिंदा हैं। उनमें से चार को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। चारों की फांसी को लेकर देशभर में हलचल तेज हो गई है। पूरे देश को इंतजार है कि कब उनके खिलाफ ब्लैक वारंट जारी होगा और कब चारों हैवानों को फांसी कोठी यानी डेथ सेल में शिफ्ट किया जाएगा। आपको बता रहे हैं कैसा होता है डेथ सेल और क्या क्या सुविधाएं होती हैं उस कोठी के अंदर?
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निर्भया के दोषी - फोटो : सोशल मीडिया
फांसी कोठी जेल के कैदी सेल से बिल्कुल दूर किसी सुनसान हिस्से में होती है। इस बारे में जेल में बंद कैदियों को भी पता नहीं होता कि फांसी कोठी किस जगह पर है। अदालत से ब्लैक वारंट जारी होने के बाद फांसी से पहले कैदी को फांसी कोठी में ही रखा जाता है।
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निर्भया के दोषी
यह एक बिल्कुल छोटा सा कमरा होता है, जिसमें जरूरत से जरा भी ज्यादा जगह नहीं होती। फांसी कोठी में इतना घना अंधेरा होता है कि बाहर की धूप भी बड़ी मुश्किल से अंदर तक पहुंच पाती है। इस कमरे में कैदी के लिए सिर्फ एक कंबल और पीने के पानी की सुविधा होती है।

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निर्भया के लिए इंसाफ की मांग - फोटो : SELF
फांसी कोठी में क्या चल रहा है या किन लोगों को रखा जाना है, इस बारे में जेल में बंद किसी कैदी को पता नहीं होता। यह कोठी अपने आप में इतनी भयावह होती है कि कैदी को उसके भीतर जाते ही मौत सामने नजर आने लगती है। कई बार तो कोठी से घबरा कर कैदियों की तबीयत भी खराब हो चुकी है। 
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निर्भया के दोषी
इस कोठी की सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी होती है कि इसके आसपास सुरक्षा गार्डों के अलावा और कोई नहीं होता। सुरक्षा की दृष्टि से वहां भेजे जाने वाले कैदियों को पजामे में नाड़ा तक नहीं पहनने दिया जाता। उनके पास छोटी से छोटी भी ऐसी चीज नहीं होती जिससे वे खुद को नुकसान पहुंचा पाएं। 
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जेल
एक फांसी कोठी में एक ही कैदी को रखा जाता है। यानी कैदी उस कोठी में बिल्कुल अकेला होता है। फांसी के निर्धारित समय से 24 घंटे पहले मात्र आधे घंटे के लिए कैदी को बाहर खुली हवा में टहलने की अनुमति मिलती है, वो भी कड़ी सुरक्षा के बीच।
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जेल - फोटो : Social media
इनसब के बावजूद डेथ सेल में कैदी की सेहत का पूरा ध्यान रखा जाता है। मेडिकल चेकअप के बिना कैदी को फांसी नहीं दी जा सकती। जिस समय फांसी दी जाती है, उस वक्त जेल में सभी कैदी अपने-अपने सेल के अंदर होते हैं। जेल के किसी कोने में किसी भी तरह का काम नहीं होता। 
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