पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया के दोषियों की ओर से फांसी टलवाने के लिए दायर याचिका गुरुवार को खारिज कर उनकी फांसी का रास्ता साफ कर दिया। इससे पहले दोषियों ने अपने कानूनी विकल्पों का प्रयोग करके फांसी को तीन बार टलवाने में सफलता हासिल कर ली थी, लेकिन इस बार याचिका पर संज्ञान लेते हुए न्यायाधीश ने कहा कि याचिका में ऐसा कोई भी ठोस कारण नहीं है, जिसके आधार पर फांसी पर रोक लगाई जा सके। इस आदेश के बाद निर्भया के चारों दोषियों को शुक्रवार सुबह साढ़े 5 बजे तिहाड़ जेल में फांसी पर लटकाया जाएगा और इसके साथ ही इतिहास रच जाएगा।
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- फोटो : सोशल मीडिया
दरअसल तिहाड़ जेल में अब तक एक साथ चार लोगों को फांसी नहीं दी गई है और पहली बार गुरुवार की सुबह ऐसा होगा। बता दें कि फांसी हमेशा सुबह-सुबह ही होती है। इन दोषियों को भी सुबह 5:30 बजे फांसी दे दी जाएगी। सुपरिटेंडेंट और डिप्टी सुपरिटेंडेंट फांसी के तय वक्त से कुछ मिनट पहले ही दोषियों के सेल में जाएंगे। सुपरिटेंडेंट पहले दोषियों की पहचान करेंगे कि वो वही हैं, जिसका नाम वॉरंट में है। फिर वो दोषियों को उसकी मातृभाषा में वॉरंट पढ़कर सुनाएंगे। उसके बाद सुपरिटेंडेंट की ही मौजूदगी में मुजरिम की बातें रिकॉर्ड की जाएंगी। फिर सुपरिटेंडेंट, जहां फांसी दी जानी है, वहां चले जाएंगे।
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- फोटो : अमर उजाला
काले कपड़े पहनाकर हाथ बांधकर ले जाया जाएगा फांसी घर
डिप्टी सुपरिटेंडेंट सेल में ही रहेंगे और उनकी मौजूदगी में दोषियों को काले कपड़े पहनाकर, उसके हाथ पीछे से बांध दिए जाएंगे। फिर उसे फांसी के तख्ते की तरफ ले जाया जाएगा। उस वक्त डिप्टी सुपरिटेंडेंट, हेड वॉर्डन और छह वॉर्डन उसके साथ होंगे। दो वॉर्डन पीछे चल रहे होंगे, दो आगे और एक-एक तरफ से दोषियों की बांह पकड़ी जाएगी। सभी दोषी फांसी वाली जगह पहुंचेंगे। उस जगह सुपरिटेंडेंट, मजिस्ट्रेट और मेडिकल ऑफिसर पहले से मौजूद होंगे। सुपरिटेंडेंट, मजिस्ट्रेट को बताएगा कि उन्होंने दोषियों की पहचान कर ली है और उसे वॉरंट उसकी मातृभाषा में पढ़कर सुना दिया है।
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- फोटो : अमर उजाला
कैदी को फिर हैंगमैन (जल्लाद) के हवाले कर दिया जाएगा। फिर दोषियों को फांसी के तख्ते पर खड़ा किया जाएगा और उसे फांसी के फंदे के ठीक नीचे खड़ा करेंगे। उस वक्त तक वॉर्डन उसकी बांहें पकड़कर रखेंगे। इसके बाद जल्लाद दोषियों के दोनों पैर टाइट बांध देगा और उसके चेहरों पर नकाब डाल देगा। फिर उन्हें फांसी का फंदा पहनाया जाएगा। इसके बाद जैसे ही जेल सुपरिटेंडेंट इशारा करेगा, हैंगमैन (जल्लाद) लीवर को खींच देगा। इससे दोषी जिन दो फट्टों पर खड़े होंगे वो नीचे वेल में गिर जाएंगे और दोषी फंदे से लटक जाएंगे।
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- फोटो : अमर उजाला
सभी दोषियों का शरीर आधे घंटे तक लटकती रहेंगी। आधे घंटे के बाद डॉक्टर उन्हें मरा हुआ घोषित करेगा। उसके बाद उनके शरीर को उतारा जाएगा और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया जाएगा। सुपरिटेंडेंट ये पुष्टि करता है कि फांसी की सजा पूरी हुई। हर फांसी के तुरंत बाद सुपरिटेंडेंट, इंस्पेक्टर जनरल को रिपोर्ट देता है। फिर वो वॉरंट उस कोर्ट को वापस लौटा देते हैं, जिसने ये जारी किया था।
पोस्टमॉर्टम के बाद दोषियों के मृत शरीर परिवार वालों को सौंप दिए जाएंगे। अगर कोई सुरक्षा कारण है तो जेल सुपरिटेंडेंट की मौजूदगी में शव को जलाया या दफनाया जाता है। यहां ये ध्यान देने वाली बात है कि फांसी की सजा पब्लिक हॉलीडे यानी सरकारी छुट्टी के दिन नहीं होती।
(ये जानकारी दिल्ली के जेल मैनुअल और तिहाड़ के पूर्व जेलर सुनील गुप्ता से बातचीत पर आधारित है। सुनिल गुप्ता के सामने आठ फांसी हुई हैं - रंगा-बिल्ला, करतार सिंह-उजागर सिंह, सतवंत सिंह-केहर सिंह, मकबूल भट्ट, अफजल गुरु की फांसी।)