इसी बस में हुई थी हैवानियत
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और जैसे यह काफी नहीं था, तो मुझे न्याय दिलाने के लिए लड़ रहे मेरे मां-पापा अब न्यायिक और कानूनी पेचीदगियों की हैवानियत के शिकार बन रहे हैं।
कौन हूं मैं, क्या आपको याद है?
भले ही मैं आपलोगों के बीच नहीं, लेकिन आज भी रोज अन्याय का जहर पी रही हूं। अरे, आपलोग तो मुझे भूल गए होंगे। मैं निर्भया हूं। आप ही लोगों ने तो मुझे यह नाम दिया था। वही निर्भया जिसके साथ छह लोगों ने 16 दिसंबर 2012, रविवार की रात चलती बस में हैवानियत की थी।