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निर्भया केस: इस बस में दरिंदों ने की थी हैवानियत की हदें पार, खून के धब्बे और बाल बने थे सबूत, आज ऐसा है हाल

Fri, 20 Mar 2020 10:37 AM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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इसी बस में निर्भया के साथ हुई थी हैवानियत - फोटो : अमर उजाला
निर्भया के साथ दरिंदगी करने वाले चार दोषियों को आज सुबह फांसी दे दी गई। एक दोषी ने पहले ही जेल में आत्महत्या कर ली थी। वहीं एक अन्य नाबालिग दोषी गुमनामी में जी रहा है, लेकिन वो बस जिसमें दरिंदगी की इस घटना को अंजाम दिया गया वह आज भी उस दर्दनाक रात की पूरी कहानी को बयां कर रही है। 
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इसी बस में निर्भया के साथ हुई थी हैवानियत - फोटो : अमर उजाला।
यादव ट्रैवल्स की बस नंबर DL 1PC 0149 वही बस है जिसमें सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया था। इस बस को देखकर दिल्ली पुलिस से लेकर वसंत विहार इलाके के आसपास रहने वाले लोग आज भी गुस्से से बौखला उठते हैं। इस केस की जांच में शामिल रहे पुलिसकर्मियों का भी कहना है कि जब वह इस बस को देखते हैं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं और गुस्सा आ जाता है। 
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इसी बस में निर्भया के साथ हुई थी दरिंदगी - फोटो : अमर उजाला
निर्भया के साथ जिस बस में बर्बरता हुई वह किसी दिनेश यादव नाम के शख्स की थी। वह बस दिनेश को कभी वापस तो नहीं मिली, लेकिन उस रात के बाद बस भी कभी नहीं चली। आज सात साल बाद उस बस को देखने पर ऐसा लगता है मानो वह खुद निर्भया के साथ हुए हादसे को चीख-चीख कर दुनिया को बता रही हो।

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इसी बस में निर्भया के साथ हुई थी दरिंदगी - फोटो : अमर उजाला
निर्भया के बयान के मुताबिक जिन सीटों पर उसके साथ इतनी विभत्स वारदात को अंजाम दिया गया उन्हें देखकर तो किसी की भी आह निकल जाए। पीछे से दूसरी नंबर सीट आज भी आधे बिस्तर वाली स्थिति में पड़ी हुई है। यह सीट निर्भया के उस बयान की पुष्टि करती है जिसमें उसने पुलिस को बताया था कि एक ओर उसके दोस्त को पीटा जा रहा था, वहीं उसे बस की पीछे वाली सीट पर ले जाकर दरिंदे उसे नोच रहे थे। 
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इसी बस में निर्भया के साथ हुई थी दरिंदगी
बस सुबह व शाम के समय नोएडा सवारी लेकर जाती थी। इसके अलावा बिड़ला विद्या निकेतन स्कूल में लगी हुई थी। आरके पुरम के सेक्टर-तीन स्थित रविदास कैंप में रहने वाला रामसिंह इस बस का ड्राइवर था। वारदात वाले दिन वह अन्य आरोपियों को लेकर मुनिरका बस स्टैंड पर पहुंच गया। पीड़ित युवक व निर्भया इस बस में द्वारका जाने के लिए बैठ गए। इसके बाद आरोपियों ने चलती बस में पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। इसके बाद पीड़ित लड़के व निर्भया को एनएच-8 पर फेंक दिया था। आरोपियों ने पीड़ितों पर बस का पहिया चढ़ाने की कोशिश की थी।
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इसी बस में निर्भया के साथ हुई थी दरिंदगी
एसआईटी के एक अन्य सदस्य ने बताया था कि दोषियों ने बस को एनएच-8 पर दो बार घुमाया था और महिपालपुर फ्लाईओवर के नीचे से यू-टर्न लिया था। इस दौरान ये बस दिल्ली एयरपोर्ट होटल के सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई थी। यहीं से वह सुराग लगा था, जिससे पुलिस आरोपियों तक पहुंच गई। सीसीटीवी फुटेज से पुलिस सबसे पहले बस मालिक और फिर बस तक पहुंची थी। 
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इसी बस में निर्भया के साथ हुई थी दरिंदगी
आरोपियों ने बस को रविदास कैंप के पास खड़ा कर दिया था। आरोपियों ने बस की धुलाई भी कर दी थी। पुलिस ने सबसे पहले बस मालिक दिनेश यादव को उठाया था। सामूहिक दुष्कर्म की जांच के लिए बनी एसआईटी के एक सदस्य ने बताया कि बस से पुलिस को बहुत ही अहम सुराग मिले थे। बस से आरोपियों का ब्लड सैंपल व अन्य नमूने मिले थे। इनकी डीएनए जांच कराई गई थी। बस से पीड़िता के बाल भी मिले थे। इन बालों की भी डीएनए जांच कराई गई थी। यह नमूने ही आरोपियों को सजा दिलाने में अहम सबूत बने थे।
 

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इसी बस में निर्भया के साथ हुई थी दरिंदगी - फोटो : अमर उजाला
किसी कूड़े करकट की तरह पड़ी बस के अंदर लगे ओडोमीटर में 2,26,784 किलोमीटर तक की यात्रा दर्ज है। इसके आखिरी अंक उसी दौरान के हैं जब बस लगातार चल रही होगी, ओडोमीटर के अंक बढ़ रहे होंगे और उसके अंदर बिलखती, छटपटाती निर्भया किसी तरह उसे रोकने के लिए दरिंदों से लड़ रही होगी।

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निर्भया केस - फोटो : अमर उजाला
बस के पीले पर्दे जिसने उन दरिंदों को छिपा लिया था जब वह निर्भया के साथ हैवानियत कर रहे थे, वो आज बदरंग हो चुके हैं। ज्यादातर जगह से फट भी चुके हैं। सीट पर लगे गद्दे या तो हटा लिए गए हैं या उन्हें कीड़े खा गए हैं। अब बस की किसी खिड़की में शीशा भी नहीं है।
 
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निर्भया केस - फोटो : अमर उजाला
उस वक्त अगर यह बस लोगों के हाथ लग जाती तो शायद आज इसके पुर्जे भी न मिलते। लोगों के गुस्से से इसे बचाया जा सके और सारे सबूत पाए जा सकें इसके लिए पुलिस ने इसे बड़े ही गुपचुप तरीके से सुरक्षित रखने की योजना बनाई। पुलिस ने बेहद ही गुप्त तरीके से इस बस को त्यागराज स्टेडियम के बाहर खड़ी बहुत सी बसों के बीच ले जाकर खड़ा कर दिया था ताकि किसी को भी शक न हो।
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