निर्भया के चारों दोषियों मुकेश सिंह, विनय शर्मा, पवन गुप्ता और अक्षय ठाकुर को मौत की सजा दे दी गई है। सुबह ठीक 5.30 बजे इन्हें फांसी पर लटका दिया गया। निचली अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक दिन में फांसी रुकवाने की सभी चालें नाकाम होने के बावजूद निर्भया के दरिंदे मौत से बचने के लिए आखिरी पल तक तिकड़म में लगे रहे, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। आइए जानते हैं निर्भया को अपनी हवस का शिकार बनाने वाले उन दोषियों के बारे में, जिन्होंने मानवता को शर्मसार कर दिया। इन सभी दोषियों को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है।
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निर्भया का दोषी पवन गुप्ता
- फोटो : सोशल मीडिया
पवन गुप्ता
घटना में शामिल पवन गुप्ता (22) पेशे से एक फल विक्रेता था। पवन अपने काम के साथ ग्रेजुएशन की तैयारी भी कर रहा था। पवन गुप्ता ने भी विनय शर्मा के साथ संगीत कार्यक्रम में होने की बात कही थी। पवन पिछले कुछ दिनों तक मंडोली जेल में था और सात दिसंबर को उसे तिहाड़ जेल में शिफ्ट किया गया है। दरअसल मंडोली जेल में फांसी की व्यवस्था नहीं है इसलिए उसे तिहाड़ में शिफ्ट किया गया था।
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विनय शर्मा
- फोटो : सोशल मीडिया
विनय शर्मा
गैंगरेप के दौरान राम सिंह के अलावा विनय शर्मा (23) ने भी बस चलाई थी। ये पेशे से एक फिटनेस ट्रेनर था। यह तिहाड़ में ही यूनिवर्सिटी के परीक्षा की तैयारियां कर रहा था। चौंका देने वाली बात है कि विनय ने भी राम सिंह की तरह खुद को मारने की कोशिश की लेकिन वह नाकाम रहा। यह राम सिंह का पड़ोसी था।
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निर्भया का दोषी अक्षय कुमार सिंह
- फोटो : सोशल मीडिया
अक्षय कुमार सिंह
बिहार का रहने वाला अक्षय अपनी पढ़ाई छोड़कर दिल्ली भाग आया था। अक्षय जेल में रहने के दौरान खबरों में आया था। उसने जेल में अपनी जान को खतरा बताया था और सुरक्षा की मांग उठाई थी।अक्षय घटना के पांच दिन बाद उसके गांव (बिहार) से पकड़ा गया था।
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निर्भया का दोषी मुकेश सिंह
- फोटो : सोशल मीडिया
मुकेश सिंह
बस की सफाई का काम करने वाला मुकेश (29) भी इस बर्बरता का मुख्य आरोपी है। उसने गैंगरेप के बाद निर्भया पर लोहे की रॉड से हमला किया था। ये राम सिंह का छोटा भाई था। मुकेश ड्राइविंग और क्लीनर का काम करता था। मुकेश दक्षिणी दिल्ली के रविदास झुग्गी कैंप में राम सिंह के साथ ही रहता था।
उल्लेखनीय है कि इस केस में छह आरोपियों को धर-दबोचा गया था, जिनमें से एक की जेल में ही मौत हो गई थी। वहीं एक नाबालिग था, जिसे रिहा कर दिया गया। बता दें कि मुख्य दोषी राम सिंह को माना गया था, जोकि वारदात की रात बस चला रहा था। उसने जेल के अंदर ही खुद को फांसी लगा ली थी।