चर्चा है कि अक्षय और पवन अलग-अलग क्यूरेटिव पिटीशन डालेंगे। अभी तक दोनों ने क्यूरेटिव पिटीशन नहीं डाली है, जिसका मतलब है कि इनकी फांसी एक फरवरी से आगे खिसक सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि कानून के अनुसार और तिहाड़ के जेल मैनुअल के हिसाब से दया याचिका खारिज होने के बाद भी दोषी को 14 दिन का समय दिया जाता है ताकि अपने सभी कानूनी अधिकारों का प्रयोग कर सके। अब प्रश्न उठता है कि क्या दोषी मुकेश के सभी विकल्प खत्म हो गए हैं तो उसे अकेले फांसी हो सकती है? तो इसका जवाब है, "नहीं"।