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उसी में महिला शिक्षिका भी उसका सहयोग करती रही। एक बार भी महिला ने शिक्षिका होने का कर्त्तव्य नहीं निभाया और उन्हीं के शोषण के कारण ही उनकी बेटी ने जान दी है। माता-पिता ने कहा कि वह अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए हर स्तर से लड़ाई लडेंगे, भले ही उन्हें अदालत या आंदोलन का ही रास्ता क्यों न अपनाना पडे़।