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- फोटो : vivek nigam
मेरी गोदी में खेली थी
बिरजू महारज ने छात्रा को याद करते हुए कहा कि वह एक बहुत ही होनहार, कोमल और सौम्य स्वाभाव की बच्ची थी। वह मेरे सामने ही पैदा हुई थी। उसके पिता का हमारे घर आनाजाना था, इसलिए वह भी हमारे घर आती थी और मैंने उसे अपनी गोद में भी खिलाया था। बिरजू महाराज इस बीच भावुक हो गए और बोले मुझे दुनियादारी की ज्यादा समझ नहीं है, हमारी दुनिया सिर्फ कथक तक ही सीमित है, लेकिन मैं इतना जरूर जानता हूं कि उसकी मौत के बारे में हमें हर हाल में जानना है।