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दिल्ली की मनहूस सुबह: चीखों के बीच इंसानियत, कुछ ने बनाए वीडियो; तो कुछ ने ढंके जख्म, सामने आईं भयवाह तस्वीरें

Tue, 02 Jun 2026 07:11 PM IST
विकास कुमार ज्योति सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

घटना के समय पास ही मौजूद एक स्थानीय निवासी ने बताया, हम चाय पी रहे थे। अचानक बहुत तेज आवाज हुई। पहले तो समझ ही नहीं आया कि क्या हुआ है। अंधेरा सा छा गया था। जब बाहर निकलकर देखा तो मकान पूरी तरह गिर चुका था। एक व्यक्ति आधा मलबे में दबा हुआ था। वह दर्द से कराह रहा था। हमने मिलकर उसे निकाला। 
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मुकुंदपुर में सिलिंडर फटने से गिरा मकान - फोटो : अमर उजाला
जिस गली में सुबह के समय बच्चों की आवाजें सुनाई देती थीं, वहां हादसे के बाद सिर्फ सायरन, मशीनों और चिंतित लोगों की आवाजें सुनाई दे रही थीं। माता-पिता बच्चों को घरों के भीतर लेकर चले गए। कई बच्चे खिड़कियों से मलबे को देखते रहे, शायद यह समझने की कोशिश करते हुए कि आखिर हुआ क्या है। मंगलवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे तक मुकुंदपुर के ईशू विहार की गली नंबर-एक रोज की तरह चहल-पहल से भरी थी। घरों में चाय बन रही थी, बच्चे स्कूल जाने की तैयारी में लगे थे और लोग दिन की शुरुआत कर रहे थे। 
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मकान का मलबा - फोटो : अमर उजाला
लोगों ने करीब से देखी मौत
फिर अचानक एक ऐसा धमाका हुआ जिसने कुछ ही सेकंड में पूरे मोहल्ले की जिंदगी बदल दी। पहले तेज आवाज सुनाई दी, फिर धरती कांपने जैसी अनुभूति हुई। लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले एक इमारत मलबे में तब्दील हो चुकी थी। धूल का गुबार आसमान में छा गया। चीखें सुनाई देने लगीं। कोई अपनों को ढूंढ रहा था, कोई मलबे में दबे लोगों को बचाने के लिए दौड़ पड़ा। घटना के कई घंटे बाद भी गली में सन्नाटा और दहशत साथ-साथ मौजूद थे। टूटी दीवारें, बिखरा सामान और लोगों के चेहरों पर उभरा डर बता रहा था कि यह सिर्फ एक इमारत का ढहना नहीं था। लोगों ने मौत को करीब से देखा था।
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मकान का मलबा - फोटो : अमर उजाला
ऐसा लगा जैसे बम गिरा हो...
घटना के समय पास ही मौजूद एक स्थानीय निवासी ने बताया, हम चाय पी रहे थे। अचानक बहुत तेज आवाज हुई। पहले तो समझ ही नहीं आया कि क्या हुआ है। अंधेरा सा छा गया था। जब बाहर निकलकर देखा तो मकान पूरी तरह गिर चुका था। एक व्यक्ति आधा मलबे में दबा हुआ था। वह दर्द से कराह रहा था। हमने मिलकर उसे निकाला। उसके हाथों की खाल निकल चुकी थी। बाल पूरी तरह झुलस गए थे। शरीर से खून बह रहा था। वह दृश्य शायद जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे। वहीं, एक पड़ोसी ने बताया, धमाके इतना जोरदार था, कि आसपास के मकानों को भी नुकसान पहुंचा है। इतना तेज कि घर का दरवाजा निकल कर सामने वाली बिल्डिंग तक जाकर गिरा। पड़ोसी के मकान में मलबा घुस गया। कुछ पल के लिए ऐसा लगा जैसे किसी ने कोई बम फेंक दिया हो।

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घटनास्थल पर एनडीआरएफ व दमकलकर्मी - फोटो : अमर उजाला
भगवान ने बचा लिया
धमाके के बाद अपने घर की दीवारों में आई दरारें दिखाते हुए एक पड़ोस में रहने वाले एक युवक ने कांप रही आवाज में बताया, कि मेरे घर की दीवारों में दरार आ गई है। जिस दीवार के उस पार धमाका हुआ, उसी से सटा मेरा गैस सिलिंडर रखा था। बाहर बाइक में भी पेट्रोल भरा था। अगर आग यहां तक पहुंच जाती तो क्या होता, सोचकर ही डर लग रहा है। भगवान ने बचा लिया।
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घटनास्थल पर एनडीआरएफ व दमकलकर्मी - फोटो : अमर उजाला
एक बदला हुआ ट्यूशन टाइम, कई जिंदगियां बचा गया
मोहल्ले की एक महिला बार-बार अपनी बच्ची को सीने से लगाए हुए थी। वह बताती हैं कि कुछ दिन पहले बच्चों के ट्यूशन का समय बदला गया था। इस वक्त बच्चे अक्सर गली में खेलते थे। कुछ दिन पहले ही ट्यूशन का समय बदल गया। धमाका सुनते ही मैं अपनी छोटी बच्ची को लेकर ऊपर भाग गई। मैं तो यही सोचती हूं कि अगर बच्चे बाहर होते तो क्या होता। उनकी आंखों में राहत थी, लेकिन उस राहत के पीछे एक अनकहा डर भी था।
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घटनास्थल पर एनडीआरएफ व दमकलकर्मी - फोटो : अमर उजाला
जब कैमरे संवेदना पर भारी पड़ गए
इस हादसे का सबसे दर्दनाक दृश्य शायद मलबे से कुछ दूरी पर दिखाई दिया। स्थानीय महिलाओं और पड़ोसियों ने बताया, कि एक घायल महिला सड़क किनारे पड़ी थी। धमाके और मलबे की वजह से उसके शरीर पर कपड़े भी नहीं बचे थे। एक महिला ने कहा, लोग मदद करने की जगह वीडियो बना रहे थे। कोई उन्हें ढकने तक नहीं आया। हमने उन्हें ढका और फिर एंबुलेंस बुलवाई। उस समय लगा कि हादसे से ज्यादा डरावना लोगों का व्यवहार है।
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मुकुंदपुर हादसा - फोटो : ANI
10 सेकंड में बदल गई पूरी गली
सुबह करीब 9:30 बजे जोरदार धमाका
कुछ ही सेकंड में इमारत मलबे में तब्दील
आसपास के मकानों में दरारें
गली में धूल का घना गुबार
लोगों ने खुद शुरू किया राहत कार्य
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