जिस गली में सुबह के समय बच्चों की आवाजें सुनाई देती थीं, वहां हादसे के बाद सिर्फ सायरन, मशीनों और चिंतित लोगों की आवाजें सुनाई दे रही थीं। माता-पिता बच्चों को घरों के भीतर लेकर चले गए। कई बच्चे खिड़कियों से मलबे को देखते रहे, शायद यह समझने की कोशिश करते हुए कि आखिर हुआ क्या है। मंगलवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे तक मुकुंदपुर के ईशू विहार की गली नंबर-एक रोज की तरह चहल-पहल से भरी थी। घरों में चाय बन रही थी, बच्चे स्कूल जाने की तैयारी में लगे थे और लोग दिन की शुरुआत कर रहे थे।