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Building Collapse: इम्तिहान के 26 दिन पहले मलबे में दब गई छात्रों की सालभर की मेहनत, लाइब्रेरी में फंसा भविष्य

Tue, 02 Jun 2026 08:56 AM IST
Vijay Singh Pundir सचिन कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सैदुल्लाजाब और आसपास का क्षेत्र लंबे समय से मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों का प्रमुख केंद्र रहा है यहां देश के विभिन्न राज्यों से आए हजारों छात्र किराये के कमरों और छात्रावासों में रहकर अपने भविष्य को संवारने का प्रयास करते हैं। एफएमजीई की तैयारी कर रहे एक छात्र का कहना है कि इमारत गिरने का दुख तो है ही, लेकिन सबसे अधिक चिंता उन नोट्स की है जिन्हें तैयार करने में महीनों की मेहनत लगी थी।
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Delhi Building Collapse - फोटो : अमर उजाला
दक्षिण दिल्ली के सैदुल्लाजाब इलाके में इमारत ढहने की घटना ने केवल एक भवन को नहीं, बल्कि सैकड़ों छात्रों के सपनों और वर्षों की मेहनत को भी गहरी चोट पहुंचाई है। इस हादसे के बाद मेडिकल और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के सामने पढ़ाई जारी रखने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। विशेष रूप से फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई) की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह हादसा बेहद मुश्किल समय में सामने आया है, क्योंकि परीक्षा में अब केवल 26 दिन शेष हैं।
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Delhi Building Collapses - फोटो : अमर उजाला
हादसे के समय इमारत से सटी एक लाइब्रेरी में 150 से अधिक छात्र सेल्फ स्टडी कर रहे थे। अचानक इमारत गिरने और अफरा-तफरी मचने के बीच छात्रों को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा। इस दौरान उनके नोट्स, किताबें, लैपटॉप, टैबलेट, मोवाइल फोन और अन्य अध्ययन सामग्री लाइब्रेरी में ही छूट गई, जो अब मलबे और क्षतिग्रस्त इमारतों के बीच फंसी हुई है।
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Delhi Building Collapses - फोटो : अमर उजाला
सैदुल्लाजाब और आसपास का क्षेत्र लंबे समय से मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों का प्रमुख केंद्र रहा है यहां देश के विभिन्न राज्यों से आए हजारों छात्र किराये के कमरों और छात्रावासों में रहकर अपने भविष्य को संवारने का प्रयास करते हैं। लेकिन इस हादसे ने उनकी दिनचर्या, तैयारी और मानसिक संतुलन को झकझोर कर रख दिया है।

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Saket Building Collapse - फोटो : अमर उजाला
रात में नींद नहीं आती 
छात्र सौरभ बताते हैं कि उस दिन क्लास देर से शुरू हुई थी, जिसके कारण बड़ी संख्या में छात्र हादसे के समय इमारत में मौजूद नहीं थे और एक बड़ी त्रासदी बच गई। बावजूद इसके, घटना का भयावह दृश्य और इमारत गिरने की आवाज अब भी छात्रों के मन में ताजा है। कई छात्रों ने बताया कि उन्हें रात में नींद नहीं आती और वे लगातार उस घटना को याद कर परेशान हो जाते हैं।
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Saket Building Collapse - फोटो : PTI
नोट्स के लिए छात्र लगा रहे पुलिस से गुहार
एफएमजीई की तैयारी कर रहे छात्र मूसा बताते हैं कि इमारत गिरने का दुख तो है ही, लेकिन सबसे अधिक चिंता उन नोट्स की है जिन्हें तैयार करने में महीनों की मेहनत लगी थी। उनके अनुसार यदि प्रशासन मलबे से अध्ययन सामग्री और दस्तावेज निकालने में मदद कर दे तो तैयारी को फिर से पटरी पर लाया जा सकता है। कई अन्य छात्रों की भी यही चिंता है।
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Delhi Building Collapses - फोटो : अमर उजाला
इमारत गिरने की आवाज सुनते ही सब छोड़कर भागी
असम की रहने वाली छात्रा अटलांटा भी सोमवार दोपहर अपना सामान लेने मौके पर पहुंचीं। उन्होंने 2019 में रूस से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी और वर्तमान में एफएमजीई की तैयारी कर रही थीं। हादसे के समय वह लाइब्रेरी में पढ़ रही थीं। इमारत गिरने की आवाज सुनते ही वह अपना लैपटॉप, आईफोन, चार्जर, पर्स, किताबें और नोट्स वहीं छोड़कर बाहर भागीं। अब उनका पूरा अध्ययन सामग्री और निजी सामान अंदर है।
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Saket Building Collapse - फोटो : अमर उजाला
हमारी तैयारी एक झटके में प्रभावित हो गई
एफएमजीई अभ्यर्थी फैजल के अनुसार इमारत का ढहना एक बड़ा नुकसान है, उससे भी बड़ा नुकसान उनकी पढ़ाई की सामग्री का है। साल भर की मेहनत और तैयारी एक झटके में प्रभावित हो गई है। हादसे के बाद बचाव दल को मलबे के बीच किताबें, नोट्स, पहचान पत्र, एडमिट कार्ड और अन्य दस्तावेज बिखरे मिले। छात्रों का कहना है कि इन दस्तावेजों और नोट्स को दोबारा तैयार करना लगभग असंभव है।
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