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फरीदाबाद भाई-बहन आत्महत्या: जांच में आया नया मोड़, बेटियों को नन बनाना चाहती थी मां

Sun, 21 Oct 2018 03:54 PM IST
अमित भाटिया, अमर उजाला, फरीदाबाद
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suicide in faridabad - फोटो : amar ujala
दयालबाग में सामूहिक आत्महत्या करने वाले मैथ्यू परिवार में सभी खुशमिजाज और दिल खोलकर खर्च करने वाले थे। जेजे मैथ्यू ने कभी बचत करने की नहीं सोची और वर्तमान को ही खुलकर जीने की उनकी सोच थी, लेकिन उनकी मौत के महज सात माह में हंसता-खेलता परिवार काल के गाल में समा गया। उनकी पत्नी एग्नेस तीनों बेटियों को नन बनाना चाहती थी। इसीलिए उनकी शादी नहीं की थी।
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suicide in faridabad - फोटो : amar ujala
होटल राजहंस के स्टाफ क्वार्टर में रहने वाले मैथ्यू परिवार के पड़ोसी जब भी उनके बच्चों की शादी का जिक्र छेड़ते तो एग्नेस उन्हें चुप करवा देती थीं। इतना ही नहीं पड़ोसियों ने प्रदीप और संजू को कई बार नौकरी लगवाया, लेकिन वे छोड़कर आ जाते थे। स्टाफ क्वार्टर में मैथ्यू परिवार के पड़ोसी और होटल राजहंस के कर्मचारी ठाकुर सिंह ने बताया कि जेजे मैथ्यू बहुत ही हंसमुख स्वभाव के थे और काम सिखाने में उनके गुरु भी रहे हैं। वे अच्छा खाने पीने और वर्तमान में जीने पर विश्वास करते थे।
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suicide in faridabad - फोटो : amar ujala
यही वजह है कि  उनके परिवार के पास किसी तरह की बचत नहीं थी और इस वजह से उनके परिवार आर्थिक परेशानियां झेलनी पड़ीं। उन्होंने बताया कि होटल राजहंस में नौकरी लगने पर 1982 में मैथ्यू परिवार यहां रहने आया था। सभी बच्चों की शिक्षा यहीं हुई। उनकी बड़ी बेटी स्नातक तक पढ़ी थी, जबकि बाकी बच्चों ने 12वीं तक शिक्षा ली थी। एग्नेस मैथ्यू की भी बाद में राजहंस में नौकरी लग गई थी। बच्चों के बड़े होने पर उनके साथ स्टाफ में काम करने वाले कई लोगों ने लड़कियों के लिए किसी चर्च में जाकर लड़का देख शादी करने की बात कही, लेकिन एग्नेस मैथ्यू यही कहती कि वह अपनी बेटियों को नन बनाएंगी, इसलिए उनकी शादी नहीं कर रही हैं। कई बार कहने पर वह गुस्सा होने लगती और कहती कि उन्हें उनके परिवार के बारे में जानकारी नहीं है, इसलिए वे दखल न दें। 

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suicide in faridabad - फोटो : amar ujala
पड़ोसियों ने बेटों को नौकरी लगवाने की कोशिश की
ठाकुर सिंह के अनुसार पूरा परिवार खुलकर खर्चा करता था। बचत के बारे में शायद ही किसी ने कभी सोचा हो। सेवानिवृत्त होने से पहले मिसिज मैथ्यू की रीढ़ की हड्डी में दिक्कत आ गई थी। इस पर प्रदीप ने अपनी मां की जगह कुछ समय राजहंस में काम किया था। साथी कर्मचारियों ने अधिकारियों से बातकर उसे नौकरी लगवाने के लिए बात की थी, लेकिन उसने मना कर दिया। संजू को भी स्टाफ के एक साथी ने कंटेनर यार्ड में नौकरी लगवाई थी, वह एक माह बाद नौकरी छोड़कर आ गया था। आय का कोई साधन नहीं होने के कारण परिवार लगातार आर्थिक तंगी झेल रहा था।
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खून देख फैली हत्या की अफवाह
चारों भाई-बहनों के शव जब पुलिस ने निकाले तो वहां खून फैला हुआ था। इससे  घटनास्थल पर हत्या किए जाने की अफवाह फैल गई। चौकी प्रभारी रणधीर सिंह के अनुसार आत्महत्या करने पर जीभ बाहर निकल आती है और शौच निकल जाता है। यहां भी सभी की जीभ बाहर निकली हुई थी। रही बात खून निकलने की तो कई बार फांसी लगाकर आत्महत्या के दौरान नसें भी फट जाती है। इससे पहले इंटरनल ब्लीडिंग होती है और बाद में वह खून पानी की तरह नाक, कान और शौच के रास्ते से बाहर निकलने लगता है। इस मामले में भी यही हुआ है।

आत्महत्या के लिए किया नई रस्सियों का प्रयोग
आत्महत्या के लिए चारों भाई-बहनों ने प्लास्टिक की नई रस्सियां इस्तेमाल की थीं। पुलिस इसकी भी जांच कर रही है कि रस्सियां कहां से ली गई थी।
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