ये ऐसे मां-बाप हैं जिनके पास घर का खर्च चलाने के पैसे भी नहीं हैं लेकिन ये अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। दिल्ली में यमुना के किनारे रहने वाले चिल्ला खादर इलाके के दो दर्जन से ज्यादा परिवारों के बच्चों का स्कूल में एडमिशन नहीं हो पा रहा है।
विज्ञापन
2 of 8
edcation
- फोटो : डेली मेल
ऐसे ही एक परिवार की गृहणी नन्हीं ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक चिट्ठी भेजी है। नन्हीं ने इसमें लिखा है कि मैंने 1000 रूपये बचाए हैं और इसे मैं आपको दे दूंगी। मैं आपसे भीख मांगती हूं, कृपया आप मेरी बेटी का दाखिला करा दीजिए।
विज्ञापन
3 of 8
edcation
नन्हीं की तरह इस इलाके में रहने वाले अन्य परिजनों ने भी केजरीवाल को खुला पत्र लिखकर अपने बच्चों के सरकारी स्कूल में एडमिसन के लिए गुहार लगाई है।
4 of 8
edcation
- फोटो : डेली मेल
भारतीय संविधान में 2009 में हुए संशोधन के बाद जोड़े गए अनुच्छेद 21-A में प्रावधान किया गया है कि 6 से 14 साल के बच्चों को अपनी मर्जी से शिक्षा प्राप्त करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। लेकिन जब हम अपने बच्चों का एडमिशन कराने सरकारी स्कूल में गए तो उन्होने आधार कार्ड न होने के कारण एडमिशन करने से मना कर दिया।
विज्ञापन
5 of 8
चार्टर्ड अकाउंटेंट
- फोटो : demo pic
अपनी बेटी के एडमिशन न होने से परेशान नन्हीं ने केजरीवाल को लिखे पत्र में बताया है कि मेरी बेटी पढ़ने में बहुत अच्छी है। जब मैं सब्जी बेचती हूं तो वो हिसाब लगाने में मेरी मदद करती है और उसकी गणित भी बहुत अच्छी है।
विज्ञापन
6 of 8
सिसोदिया-केजरीवाल।
- फोटो : फाइल फोटो
इसी इलाके में रहने वाले एक अन्य परिजन पंकज सीएम को पत्र में लिखते हैं कि मेरी तबीयत बहुत खराब रहती है और मैं रोजाना अपना काम छोड़कर अपने बेटे के एडमिशन के लिए चक्कर नहीं काट सकता।
विज्ञापन
7 of 8
आधार कार्ड
- फोटो : Getty Images
पंकज बताते हैं कि स्कूल वाले सही से जवाब भी नही देते हैं। बस यह कह कर एडमिशन के लिए मना कर देते हैं कि बच्चे का आधार कार्ड नहीं है। हमनें कहा कि आप एडमिशन कर दीजिए हम बाकी की चीजें बाद में जमा करा देंगे लेकिन स्कूल वाले कुछ जवाब नहीं देते।
हमने शिक्षा सलाहकार अतिसी मारलीना और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को भी मैसेज व कॉल किया लेकिन हमें वहा से कोई जवाब नही मिला।वैसे गरीब लोगों के बच्चों का सरकारी स्कूल में एडमिशन लेना कठिन कार्य नहीं है लेकिन आधार कार्ड और बैंक अकाउंट न होने के कारण हमारे बच्चों को सरकारी स्कूल में एडमिसन नहीं मिल पा रहा है।