इसमें 25 नस्लों के 250 से ज्यादा कुत्ते पहुंचे। इसमें नोएडा-ग्रेनो व दिल्ली, फरीदाबाद समेत अन्य शहरों के भी निवासी शामिल थे। बड़ी कीमत वाले विदेशी नस्ल के कुत्तों के बीच इस शो में देशी नस्ल के कुत्ते गिनती के थे, लेकिन बेहतर परवरिश पा रहे देशी नस्ल के कुत्तों की रंगत भी छाई और चर्चा का विषय बनी।
नोएडा सेक्टर-33 स्थित शिल्प हाट मैदान में रविवार को विभिन्न नस्ल के कुत्तों और उनके पालने और प्यार करने वालों का जमावड़ा लगा रहा। मौका था नोएडा प्राधिकरण की तरफ से आयोजित किए गए पेट-रोल कार्निवल-2025 के पहले डॉग शो का। इसमें 25 नस्लों के 250 से ज्यादा कुत्ते पहुंचे। इसमें नोएडा-ग्रेनो व दिल्ली, फरीदाबाद समेत अन्य शहरों के भी निवासी शामिल थे। बड़ी कीमत वाले विदेशी नस्ल के कुत्तों के बीच इस शो में देशी नस्ल के कुत्ते गिनती के थे, लेकिन बेहतर परवरिश पा रहे देशी नस्ल के कुत्तों की रंगत भी छाई और चर्चा का विषय बनी।
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डॉग शो
- फोटो : अमर उजाला
शो का उद्घाटन नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ लोकेश एम ने किया। सीईओ ने कहा कि कुत्ता हमें वफादारी के साथ निस्वार्थ प्यार सिखाता है। अपने कुत्ते को याद करते हुए सीईओ ने बताया कि आईएएस बनने से पहले उन्होंने पाला था। ट्रेनिंग के दौरान उस कुत्ते की करीब 10 साल बाद मौत हुई। आखिरी मौके पर वह नहीं पहुंच पाए थे। यह बात उनको हमेशा याद आती है।
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आयोजन के पीछे मकसद सभी पेट लवर को साथ लाने और कुत्तों के प्रति प्रेम व सामाजिकता बढ़ाने का था। सीईओ ने कहा, आज के समय में हर घर में बच्चों का स्क्रीन टाइम बड़ी समस्या बना हुआ है। अगर एक कुत्ता पाल लेंगे तो निश्चित ही बच्चे उसके साथ जुड़ेंगे और मोबाइल से कुछ दूरी बढ़ेगी।
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एसीईओ संजय खत्री ने भी अपने विचार रखे। विभिन्न प्रतियोगिताओं में तीनों विदेशी जज की तरफ से 12 टॉप प्रतिभागी कुत्तों का चयन किया गया। इनको पालने वालों को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही शाम को म्यूजिकल शो का भी आयोजन हुआ।
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सेक्टर-79 की सोसाइटी निवासी मधु सिंह अपने देशी नस्ल के कुत्ते को लेकर डॉग शो के मंच पर पहुंचीं। मंजू ने बताया, 10 अप्रैल को यह कुत्ता अचानक भूतल स्थित फ्लैट में पहुंचा। पहले दिन कुछ देर रुका और फिर अगले दिन दो घंटे रुका। इसके बाद तीसरे दिन रात भर फ्लैट के बाहर बैठा रहा। फिर मंजू ने उसे पाल लिया।
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कुछ निवासियों ने इस पर आपत्ति जताई और प्राधिकरण में शिकायत कर कुत्ते को पकड़ कर ले जाने के लिए कहा। मंजू ने रजिस्ट्रेशन करवा लिया। अब वही कुत्ता चाल और रंगत में विदेशी नस्लों से कहीं कम नहीं लगता है। कुत्ते का नाम लिमका सिंह रखा हुआ है। इसी तरह ग्रेनो वेस्ट से आए गद्दी देशी नस्ल के कुत्ते ने सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा। कुत्ता लेकर आईं डॉ. कविता, ने बताया कि कुत्ते का नाम भोलू रखा है। भोलू जब छोटा था तब वह हिमाचल से लेकर आई थीं।
डॉग शो में जर्मन शेफर्ड नस्ल के कुत्तों के बीच कई तरह की प्रतियोगिताएं हुईं। ट्रेनर की तरफ से दिए गए आदेश का पालन हो या गोले के बीच से छलांग लगाकर तेजी से निकलना। जर्मनी से आए जज फिलिप एंड्रिक ने विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता घोषित किए।
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विश्व में सबसे छोटे कुत्तों की नस्लों में चिहुआहुआ वहीं, सबसे बड़े कुत्तों की नस्ल में ग्रेट डेन शामिल है। ग्रेट डेन नस्ल के कुत्ते को लेकर दिल्ली के राजौरी गार्डेन निवासी हरजेश पहुंचे। फर्नीचर कारोबारी हरजेश ने बताया, उनके कुत्ते का नाम लिओन है। पूरे परिवार के साथ घुला-मिला है। वहीं चिहुआहुआ नस्ल का कुत्ता लेकर दिल्ली के किशनगंज रेलवे कॉलोनी से दिशानी अपने पापा गिरीश के साथ पहुंची।
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देखने में देशी बिल्ली से छोटा यह कुत्ता काफी चुलबुला होता है। गिरीश ने बताया कि इसे उन्होंने चीन से मंगवाया था। गिरीश अपने जायंट पूडल नस्ल के कुत्ते को लेकर भी पहुंचे थे। भूरे घुंघराले बालों वाले इस कुत्ते ने भी सभी का ध्यान खींचा। इसी तरह ग्रेटर फरीदाबाद से आए इटैलियन मास्टिफ ने भी अपनी धमक बिखेरी। इसे लेकर कुनाल बेसोया पहुंचे हुए थे। कुनाल ने बताया कि वह पेशे से वकील हैं।
डॉग शो में कुत्तों का फैशन शो भी करवाया गया। इसके लिए 1 हजार रुपये की फीस रखी गई थी और देशी नस्ल के कुत्तों को शामिल नहीं किया गया। मुख्य रूप से छोटे और फैंसी कुत्ते इसमें शामिल हुए। टॉय पूडल नस्ल के विभिन्न कुत्तों का फैशन रैंप पर देखते ही बना।