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दिल्ली-एनसीआर के इन 4 सांसदों को मोदी ने चाय पर बुलाया, कैबिनेट में जगह मिलने की अटकलें तेज

Thu, 30 May 2019 04:23 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली-एनसीआर के चार सांसद बन सकते हैं मंत्री - फोटो : सोशल मीडिया
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नरेंद्र मोदी बतौर प्रधानमंत्री अपने दूसरे कार्यकाल के लिए बृहस्पतिवार को पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। दूसरे कार्यकाल में भी शपथ ग्रहण के लिए पीएम ने दरबार हॉल की जगह राष्ट्रपति भवन के बाहरी प्रांगण का चुनाव किया है।

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद प्रधानमंत्री पीएम मोदी और केंद्रीय मंत्रिमंडल के अन्य मंत्रियों को गुरुवार शाम सात बजे राष्ट्रपति भवन में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। हालांकि इससे पहले पीएम मोदी शाम 4.30 बजे उन सांसदों से चाय पर चर्चा करेंगे जो मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं।

बताया जा रहा है कि इन सांसदों में दिल्ली-एनसीआर के वो 4 सांसद भी हैं जो पिछली सरकार में मंत्री के पद पर रह चुके हैं। आगे जानिए कौन हैं वो सांसद और क्यों है इनका दावा मजबूत।  

डॉ. महेश शर्मा

महेश शर्मा
जिन सांसदों के पीएम के साथ चाय में चर्चा में शामिल होने की बात चल रही है उनमें सबसे प्रमुख हैं गौतमबुद्ध नगर से भाजपा सांसद डॉ. महेश शर्मा। हालांकि बताया जा रहा है कि पिछले कार्यकाल के दौरान डॉ.महेश शर्मा के पास जो भी मंत्रालय रहे थे, उनमें उन्होंने अच्छा काम किया था। पीएम की गुड लिस्ट में भी शामिल रहे। इसलिए माना जा रहा है कि इस बार भी गौतमबुद्धनगर का प्रतिनिधित्व रहेगा। केंद्रीय मंत्री होंगे या राज्य मंत्री, इसका फैसला पहले ही हो चुका है, इसके बारे में किसी को कानो कान खबर नहीं दी जा रही है।

सांसद डॉ. महेश शर्मा जब 2014 में सांसद बने थे तो क्षेत्र के लोगों को काफी अपेक्षाएं थीं। जितना लोग सोच रहे थे, उसे पूरा करने की उन्होंने कोशिश तो की, लेकिन खरे नहीं उतर पाए। यही कारण था कि जब 2019 के लिए चुनाव प्रचार में उतरे तो उन्हें काफी विरोध का सामना करना पड़ा पर उन्होंने हार की तरफ घूम रही सुई को रोका और इस बार रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की।

दरअसल, 2009 में जब डॉ. महेश शर्मा लोक सभा का चुनाव लड़े तो उन्हें बसपा प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह नागर ने हरा दिया। उस हार से उन्होंने सबक सीखा और जब नोएडा विधानसभा के 2012 में चुनाव हुए तो महेश विधायक बन गए। पहली जीत होने के बाद 2014 में उन्होंने सांसद के रूप में जीत हासिल की और अब 2019 में दोबारा सांसद बनने का गौरव हासिल किया।

डॉ. महेश शर्मा के 2019 में चुनाव जीतने के 19 कारण

1- मोदी लहर का मिला फायदा, प्रत्याशी के रूप में लोग नाराज थे। मोदी के नाम पर मिल गए वोट।
2- बसपा के पूर्व मंत्री वेदराम भाटी, रविकांत मिश्रा व सपा नेता बिजेंद्र भाटी आदि को भाजपा में मिलाकर दूसरों दलों को झटका दिया।
3- हर जाति के वोटरों में भाजपा ने लगाई सेंध, गठबंधन प्रत्याशी के वोटर अंत समय में बिखर गए।
4- कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. अरविंद सिंह ने मतदान के तीन दिन पहले ही सारे हथियार डाल दिए, बूथों पर बस्ता लगाने वाले भी नहीं दिखे।
5- डॉ. महेश शर्मा का 25 साल का राजनीतिक अनुभव व चुनावी मैनेजमेंट की काट किसी दूसरे प्रत्याशी के पास नहीं थी।
6- एयरपोर्ट, संग्रहालय, पाकशाला इंस्टीट्यूट, ओखला पक्षी विहार व बॉटेनिकल गार्डन के अलावा पर्यटन सर्किट बनाना उपलब्धि भी काम आई।
7- नोएडा, ग्रेनो वेस्ट व ग्रेटर नोएडा शहरी वोटरों पर भाजपा का अच्छा प्रभाव रहा, गठबंधन प्रत्याशी शहरी वोटरों के पास पहुंचने में पीछे रहा।
8- चुनाव के वक्त मोदी, योगी, राजनाथ सिंह ने रैली की। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी महेश शर्मा के समर्थन में आईं।
9- पांच साल के अंदर नोएडा व ग्रेटर नोएडा में मोदी का पांच बार और योगी का आठ बार आना भी जनता में अच्छा संदेश गया।
10- क्षेत्रीय दलों की जातिवाद की नीति काम नहीं आई, धर्म के आधार पर वोटरों का बंटवारा अधिक हुआ।
11- पाकिस्तान को सबक सिखाने का फंडा वोटरों को अच्छा लगा। मोदी का डॉयलॉग कि पाक कह रहा कि मोदी ने मारा, चर्चित हुआ
12- जम्मू कश्मीर से 370 व 53ए हटाने को चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करना भी वोटरों को लुभा गया।
13- मजबूत भाजपा संगठन ने जीत को और आसान किया।
14- अबकी बार मोदी सरकार, मोदी ही आएगा और मोदी है तो मुमकिन जैसे नारे वोटरों को लुभा गए।
15- डॉ. महेश की साफ सुथरी छवि काम आई 
16- डॉ. महेश की पकड़ का ही नजीता रहा कि दूसरे दल के नेता दिन में अपने पार्टी प्रत्याशी का प्रचार करते थे और रात में डॉ. महेश से मिलते रहे।
17- आर्थिक रूप से मजबूत भाजपा प्रत्याशी के सामने गठबंधन प्रत्याशी सतवीर नागर काफी पीछे रहे।
18- आरएसएस में अच्छी पकड़ है। डॉ. महेश की राजनीतिक नींव संघ ही है।
19- डॉ. महेश को पांच साल चुनाव की तैयारी का समय मिला लेकिन गठबंधन प्रत्याशी पूरे क्षेत्र में घूम भी नहीं पाए।

वीके सिंह को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी 

जनरल वीके सिंह - फोटो : अमर उजाला
चुनाव में मिली शानदार जीत की बदौलत वीके सिंह का नाम एक बार फिर देशभर में सुर्खियों में है। वीके सिंह के बड़े चेहरे और बड़ी जीत की वजह से उन्हें केंद्र सरकार में विदेश राज्य मंत्री बनाया गया। इस पद की जिम्मेदारी भी उन्होंने बखूबी निभाई।

पूर्व सेनाध्यक्ष रहने के अनुभव की वजह से उन्होंने कई ऑपरेशन को सफल बनाकर विदेशों में फंसे देश के नागरिकों को सुरक्षित अपने वतन में पहुंचाया। इस बार फिर बड़ी जीत पाकर सुर्खियों में आए वीके सिंह को इस बार पहले से बड़ी जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है। उन्हें कैबिनेट में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।

वर्ष 2014 में जनरल वीके सिंह ने 5.67 लाख रिकार्ड मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। वेस्ट यूपी की बागपत, मेरठ, कैराना, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर और मथुरा की सीटों पर भी जीत का अंतर लाखों में रहा था।

अब 2019 में  सपा-बसपा-रालोद के गठबंधन के बाद वेस्ट यूपी में समीकरण बदले तो बागपत, मुजफ्फरनगर और मेरठ समेत कई लोकसभा सीट भाजपा के हाथ से जाते-जाते बामुश्किल बची।

राव इंद्रजीत सिंह

राव इंद्रजीत सिंह
गुड़गांव लोकसभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार राव इंद्रजीत सिंह ने सभी विरोधियों को चारों खाने चित ही नहीं किया, बल्कि रिकार्ड जीत भी हासिल की। उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर हर मामले में पिछले चुनावों की तुलना में बड़ी जीत के साथ अपना वर्चस्व बरकरार रखा। उन्होंने जीत एवं वोट हासिल करने और जीत के अंतर के मामले में अपने सभी आंकड़े पीछे छोड़ दिए। वहीं हरियाणा में सबसे अधिक पांच बार लोकसभा चुनाव जीतने का रिकार्ड भी बनाया।

वर्ष 2009 में अस्तित्व में आए गुड़गांव लोकसभा क्षेत्र से राव इंद्रजीत सिंह ने लगातार तीसरी बार जीत हासिल की है। वह वर्ष 1998 और 2004 में महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीते थे। राव इंद्रजीत सिंह ने लोकसभा चुनाव लड़ने के दौरान पिछले चुनाव में सबसे अधिक 6,44,780 (48.82 प्रतिशत) वोट प्राप्त किए थे। इसके अलावा सबसे अधिक 2,74,722 वोट से जीत हासिल की थी।

मगर इस बार उन्होंने वोट प्राप्त करने और जीतने के अंतर के आंकड़े को पीछे छोड़ दिया। इस बार उन्होंने करीब 8,32,000 (60.55 प्रतिशत) वोट प्राप्त किए। वहीं 3,55,000 वोट से कांग्रेस उम्मीदवार कैप्टन अजय यादव को हराया।

पिता एवं भाई की हार का चुकता किया हिसाब

राव इंद्रजीत सिंह ने इस चुनाव में कैप्टन अजय यादव को हराकर उनके खानदान के परिजनों के हाथों अपने खानदान के परिजनों के हारने के सिलसिले को भी बंद कर हिसाब चुकता कर लिया है। कैप्टन अजय यादव के पिता अभय यादव ने राव इंद्रजीत सिंह के पिता राव बीरेंद्र सिंह को वर्ष 1952 में रेवाड़ी विधानसभा क्षेत्र में चुनाव हराया था। वहीं, वर्ष 1989 में रेवाड़ी विधानसभा के उपचुनाव में कैप्टन अजय यादव ने राव इंद्रजीत सिंह के भाई राव अजित सिंह को हराया था।

रंग लाई बेटी की मेहनत, भारी मतों से जीते पिता

पिता बेटी की कामयाबी में हमेशा ही अहम भूमिका निभाता है और मुश्किलों में ढाल बनकर उसके संग खड़ा रहता है। लेकिन बेटियां भी अब अपने पिता की सफलता में कहीं न कहीं महती भूमिका निभा रही हैं। कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश किया है भाजपा प्रत्याशी राव इंद्रजीत सिंह की बेटी आरती राव ने। लोक सभा चुनाव में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की बेटी अपने पिता के समर्थन में चुनाव मैदान में आ कर हलचल बढ़ा दी थी। चुनाव प्रचार के दौरान विशाल रैली, जनसभा व अपने भाषण से किसी मंझे हुए नेता की तरह मंच पर नजर आई। वह एक उम्मीदवार की तरह लोकसभा क्षेत्र में प्रचार किया था। 

प्रियंका गांधी से की खुद की तुलना

लोकसभा चुनाव में मां और भाई के समर्थन में आई प्रियंका गांधी वाड्रा ने उन्हें जीत दिलाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन सिर्फ चुनावी मौसम में जनता के बीच जाने और लुभावने वादे करने से बात नहीं बनती। इसी को उदाहरण बनाकर चुनाव प्रचार के दौरान आरती ने अपनी तुलना प्रियंका गांधी से करते हुए कहा कि मैं सिर्फ चुनावी मौसम में ही नजर आने वाली नहीं हूं, बल्कि हर समय आप लोगों के बीच में रहूंगी। मैं हरियाणा की बेटी हूं, यहां की समस्याओं को बखूबी समझती हूं। आरती पूरी तरह से पिता राव इंद्रजीत की राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर स्थापित हो रही हैं। वह इंटरनेशनल शूटर के तौर पर पद्मश्री अवॉर्ड से भी नवाजी जा चुकी हैं।

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कृष्णपाल गुर्जर

कृष्णपाल गुर्जर (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook
भाजपा प्रत्याशी कृष्णपाल गुर्जर ने अपनी जीत के भारी अंतर से फिर एक नया इतिहास लिखा है। ऐसे में माना जा रहा है कि मोदी सरकार में सामाजिक अधिकारिता एवं न्याय मंत्री ने नई सरकार के मंत्रिमंडल में भी अपनी जगह निर्धारित कर ली है। छात्र जीवन से ही राजनीतिक सफर करने वाले कृष्णपाल गुर्जर के संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से अच्छे संबंध माने जाते हैं।

यही कारण है कि वर्ष 2014 में जब भाजपा की सरकार आई तो फरीदाबाद सीट से जीते अपने प्रत्याशी कृष्णपाल गुर्जर को पार्टी ने मंत्रिमंडल में शामिल किया। 1977 से लोकसभा सीट बनने के बाद से यह पहला मौका था, जब इस सीट से जीतने वाले सांसद को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। उनसे पूर्व तीन बार भाजपा के ही रामचंद्र बैंदा तीन बार यहां से सांसद रहे थे, मगर कभी मंत्री नहीं बन सके।

कांग्रेस के टिकट से अवतार सिंह भड़ाना भी इसी सीट से तीन बार सांसद चुने जा चुके हैं, मगर मंत्री पद उन्हें भी नहीं मिला। कांग्रेस के टिकट से भजनलाल को भी यहां की जनता से जिताकर संसद पहुंचाया था, मगर मंत्री पद उन्हें भी नहीं मिल पाया।

1992 से 2000 के बीच हुई मोदी से नजदीकियां:

कृष्णपाल गुर्जर की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नजदीकियां 1992 से 2000 के बीच हुई थीं। उस समय भाजपा ने मोदी को हरियाणा का प्रभारी बनाया था। ऐसे में उनका फरीदाबाद काफी आना जाना रहता था। पूर्व में फरीदाबाद में हुई एक रैली में अपने संबंधों को मोदी ने खुद भी स्वीकार करते हुए सार्वजनिक किया था। मई 2009 और सितंबर 2012 में हुई मोदी की दो रैलियों में उनका प्रेम कृष्णपाल के पक्ष में साफ नजर आया था। उन्होंने मंच से कहा था कि कृष्णपाल गुर्जर के साथ स्कूटर पर बैठकर उन्होंने फरीदाबाद की काफी खाक छानी है।

कृष्णपाल गुर्जर का राजनीतिक सफर:

- छात्र राजनीति से ही सक्रिय कृष्णपाल गुर्जर ने 1994 में नगर निगम से अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत की।
- 1996 में मेवला महाराजपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे।
- हरियाणा विकास पार्टी और भाजपा गठबंधन में परिवहन मंत्री रहे।
- वर्ष 2000 में फिर से मेवला-महाराजपुर सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक बने और भाजपा विधायक दल के नेता चुने गए।
- 2005 में मेवला-महाराजपुर सीट से फिर चुनाव लड़े, मगर महेंद्र प्रताप सिंह के सामने हार गए।
- वर्ष 2009 में तिगांव विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते।
- 2009 से लेकर 2013 तक हरियाणा में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद पर रहे।
- 2014 में करीब 4.67 लाख वोट से कांग्रेस के अवतार भड़ाना को रिकॉर्ड मतों से हराया।
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