ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि निजी क्षेत्र में कार्यरत कुछ महिलाओं ने कार्पोरेशन की इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए खुद को चार-चार बार गर्भवती दिखाया और मातृत्व अवकाश का लाभ लिया।
ईएसआईसी के एक अधिकारी ने कहा कि विभाग अधिकारियों की मिलीभगत से यह सारा खेल चल रहा था। इसमें कई ठेकेदार भी हैं, जो विभिन्न संस्थानों को मैनपावर देते हैं। इन ठेकेदारों की भी विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों से मिलीभगत थी, जिससे उनके बिल निचले स्तर पर ही पास हो जाते हैं। हालांकि, हर तीन माह में विभाग की विजिलेंस टीम ऑडिट करती थी, मगर उन्हें भी इस जालसाजी का पता नहीं लग सका।
कैसे खुला मामला
विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि डेढ़ साल पहले विभाग की विजिलेंस रिपोर्ट में मातृत्व अवकाश के दो-तीन मामले में गड़बड़ी सामने आई थी। विभाग ने ऑनलाइन आए आवेदनों की महिलाओं के मूल दस्तावेज से मिलान किया गया तो वह अलग-अलग पाए गए। फर्जी दस्तावेज के आधार पर महिलाओं का अवकाश का पूरा लाभ दिया गया। सूत्रों की माने तो विभाग कर्मचारियों ने मिलकर इस तरह करीब 10 करोड़ से ज्यादा का घोटाला किया है।
जांच के लिए बनाई गई स्पेशल टास्क फोर्स
घोटाला सामने आने के बाद ईएसआईसी क्षेत्रीय कार्यालय ने विभागीय स्तर पर मामले की गंभीरता से जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया है। इस टीम में चार अधिकारी शामिल हैं, जो हर दस्तावेज की गंभीरता से जांच करेंगे। 10 से 15 दिन में इस मामले में कुछ नए भी खुलासे किए जा सकते हैं।
मातृत्व अवकाश के नाम पर विभाग में कुछ अनियमितताएं सामने आई हैं। विभाग की ऑडिट रिपोर्ट सीबीआई और दिल्ली मुख्यालय की विजिलेंस को सौंप दी गई है। - डीके मिश्रा, आयुक्त क्षेत्रीय कार्यालय-ईएसआईसी, फरीदाबाद।