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मजदूरों के लिए चलीं बसें और ट्रेनें फिर भी पैदल चलने को मजबूर, कोई बच्चे से है दूर, कोई हुआ बेघर

Fri, 15 May 2020 01:09 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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पैदल घर जाते मजदूर - फोटो : अमर उजाला/एएनआई/पीटीआई
केंद्र सरकार समेत तमाम राज्यों की सरकारें भले ही प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए ट्रेनों और बसों का इंतजाम कर रही हों लेकिन मजदूरों का पलायन आज भी जारी है। वह लॉकडाउन के चलते पैदल ही सैकड़ों किलोमीटर का सफर करने को मजबूर हैं। आज सुबह ही दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर जाते सैकड़ों मजदूर देखे गए। सबकी अपनी-अपनी तकलीफें हैं। जानिए क्यों ये मजदूर ट्रेनों और बसों की सुविधाओं के बावजूद पैदल चलने को हैं मजबूर...
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बबीता नाम की महिला पैदल घर जाते हुए - फोटो : एएनआई
गौरतलब है कि शुक्रवार सुबह भी बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर दिल्ली-उत्तर प्रदेश बॉर्डर पर पैदल ही अपने गांवों की ओर जाते दिखे। एक महिला बबीता ने बताया कि, 'मेरा घर झांसी में है, मेरा ढाई साल का बच्चा रो रहा है और बस यही कह रहा कि मम्मी घर पर आ जाओ। हम पैदल चले जाएंगे, बस हमें रोके ना। कुछ साधन नहीं दे रहे तो पैदल तो जाने दो।यहां इंतजार करते हुए दो महीने हो गए मेरा बच्चा भूखा है वो कुछ खा नहीं रहा है।
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पैदल घर जाते मजदूर - फोटो : एएनआई
वहीं दिल्ली-गाजीपुर सीमा से अपने घर हरदोई जा रही एक महिला रीता ने बताया कि, 'मेरा घर हरदोई में है। मेरे मकान मालिक ने मुझे धक्के मारकर निकाल दिया क्योंकि मैं किराया नहीं दे सकी। मेरे बच्चे छोटे हैं लेकिन घर पैदल चलकर जाने के अलावा हमारे पास कोई विकल्प नहीं है।'

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- फोटो : ANI
हालांकि ऐसा नहीं है कि मजदूर सिर्फ पैदल जा रहे हैं। वह कई गाड़ियों में लिफ्ट लेकर भी घर जा रहे हैं। कोई घर पहुंच रहा है तो कोई बीच में ही पकड़ा जा रहा है। ऐसा ही कुछ कल फरीदाबाद में हुआ। फरीदाबाद के एनआईटी तीन के एसजीएम नगर स्थित मुल्ला होटल के समीप कैंटर में भर कर मजदूरों को जिले की सीमा से बाहर निकाला जा रहा है। जबकि पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लग रही है। बुधवार शाम को भी एक कैंटर में भर कर मजदूरों को बिहार ले जाया जा रहा था। आसपास के लोगों ने बताया कि उसमें लोगों को बिहार और उत्तर प्रदेश ले जाया जा रहा है। इसके लिए 2500 रुपये प्रति व्यक्ति किराया भी वसूला जा रहा है।
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- फोटो : lockdown in prayagraj
इस मामले की सूचना पुलिस को देने पर आरोपी चालक वहां से फरार हो गया। एनआईटी तीन चौकी प्रभारी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि मुल्ला होटल के पास कैंटर में भरकर मजदूरों को ले जाने की जानकारी नहीं है। सैनिक कॉलोनी की शिकायत मिली थी। वहां एक कैंटर को पकड़ा था। जिसमें कोई भी मजदूर नहीं मिला था।


 
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