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खिलवाड़: मरीजों की नजर जब एक्सपायरी डेट पर गई तो उड़े होश

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जिला अस्पताल में मरीजों को एक्सपायरी फ्ल्यूड डेक्सट्रोज नॉर्मल सलाइन (डीएनएस) चढ़ा दिया गया, जिसके बाद उन्होंने और तबियत बिगड़ने की शिकायत की। कुछ मरीजों की नजर जब एक्सपायरी डेट पर गई, तब मामला खुला। इस पर मरीजों और उनके परिजनों ने हंगामा किया। पुलिस को भी बुलाना पड़ा। डीएम ने सीएमएस से मामले की जानकारी ली। सीएमएस ने जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। (भाव्य नरेश/अमर उजाला, नोएडा)
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खिलवाड़: मरीजों की नजर जब एक्सपायरी डेट पर गई तो उड़े होश

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सेक्टर-22 निवासी सतीश ने बताया कि वो तेज बुखार और खुजली की शिकायत के चलते अस्पताल के सेकंड फ्लोर स्थित मेडिसिन वार्ड में भर्ती हुए थे। बुधवार सुबह करीब 7 बजे उनको और कई अन्य रोगियों को अचानक चक्कर, उल्टी आने और घबराहट की शिकायत होने लगी। डीएनएस के पैकेट पर एक्सपायरी डेट जून 2015 लिखी हुई थी। कुछ अन्य मरीजों के डीएनएस के पैकेट की जांच की गई तो उस पर भी एक्सपायरी तारीख जून 2015 मिली।

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पुलिस को फोन करने के बाद मेडिकल स्टाफ को सूचना दी गई। सेकंड फ्लोर का स्टाफ वार्ड में आ गया लेकिन ड्यूटी पर तैनात इमरजेंसी डॉक्टर नहीं आए। पुलिस के आने के बाद इमरजेंसी डॉक्टर और सीएमएस मौके पर पहुंचे और एक्सपायरी डीएनएस के पैकेट साथ में ले गए।

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वार्ड में भर्ती कई रोगियों की तबियत अचानक खराब हो गई। एक मरीज ने डीएनएस के पैकेट को पढ़ा, जिसमें तारीख एक्सपायरी थी। अस्पताल का स्टाफ जल्दी-जल्दी एक्सपायरी डीएनएस इकट्ठा करने में जुट गया।
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मोरना से आए मरीज सोनू के मुताबिक मरीजों को नाराज होता देख अस्पताल के स्टाफ ने बुरा व्यवहार शुरू कर दिया। किसी भी तरह की दवा देने या फ्ल्यूड चढ़ाने से पहले एक्सपायरी डेट की जांच करनी चाहिए लेकिन ऐसा किया नहीं गया।
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मरीज के परिजनों का कहना था कि रात में मरीजों का ध्यान नहीं रखा जाता है। मरीज परेशान होते रहते हैं और स्टाफ व डॉक्टर कोई सुनवाई नहीं करते। सुबह एक्सपायरी डीएनएस और मरीजों की तबियत बिगड़ने की बात सामने आई तो एक घंटे तक कोई भी डॉक्टर नहीं आया।
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डॉक्टरों के मुताबिक, एक्सपायरी डीएनएस के पैकेट में यदि कहीं भी हल्का छेद होगा तो उसमें वातावरण में मौजूद बैक्टीरिया पहुंच जाते हैं। इससे शरीर में विषाक्त पदार्थ डीएनएस के जरिये पहुंच जाते हैं, जिससे उल्टी, ब्लड प्रेशर गिरना, चक्कर आना, बेहोशी छाना जैसी दिक्कत हो सकती है। इससे मरीज को सेप्टीसीमिया भी हो सकता है। बताया जाता है कि सेकंड फ्लोर पर दो पेटी एक्सपायरी डीएनएस पहुंचा था।
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सीएमएस के मुताबिक दो मरीजों ने एक्सपायरी डीएनएस चढ़ाने की मौखिक शिकायत की है। जांच के लिए अस्पताल के डॉक्टरों की एक कमेटी गठित कर दी गई है। स्टोर इंचार्ज की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह छह माह के भीतर एक्सपायरी दवाओं और फ्ल्यूड को अलग रखें।
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