इंडिया रेप कैपिटल के नाम से बेशक दुनिया भारतीय महिलाओं की दयनीय हालत का आकलन करती हो, लेकिन देश की बेटियां मेट्रो, टैक्सी, हवाई जहाज, पुलिस, डॉक्टर से लेकर प्रशासनिक सेवाओं में अपनी पहचान बनाकर सफलता की सीढ़ियां चढ़ रहीं हैं। बेटियां तो वर्षों से देश का नाम रोशन कर रही हैं, लेकिन पहली बार राजपथ पर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के दौरे के दौरान दुनिया ने महिला सशक्तिकरण का निराला रूप भी देखा। देश की बेटियां आज सुरक्षा प्रहरी से लेकर हर क्षेत्र में अपनी मेहनत व काबलियत का लोहा मनवा रही हैं। इंटरनेशनल वूमन-डे पर अमर उजाला जांबाज व हौसलामंद हस्तियों से रूबरू करा रहा है, जो दुनिया समेत समाज की रूढ़िवादी सोच को नकारते और सफलता की बुलंदियों को छूते हुए देश की दूसरी और बेटियों को आगे बढ़ने का हौसला दे रही हैं।
विज्ञापन
गार्ड ऑफ ऑनर देकर पूजा ने बनाया इतिहास
2 of 14
पूजा ठाकुर
एयरफोर्स अधिकारी के साथ-साथ मैं नौ साल की बेटी की मां भी हूं। अपनी बेटी की परवरिश ऐसे करूंगी कि वह दूसरी बेटियों को आगे बढ़ने का हौसला व जरिया बने। अमेरिकी राष्ट्रपति को राष्ट्रपति भवन में गार्ड ऑफ ऑनर देने के बाद बेशक सेना में महिलाओं के प्रति सोच में बदलाव का नजरिया महसूस किया हो, लेकिन यह भी सच है कि आधी आबादी के हालात अभी भी दयनीय हैं।
विज्ञापन
पिता के सहयोग से ही मैं भारतीय वायु सेना में जा सकी
3 of 14
पूजा ठाकुर
हालांकि सशक्तिकरण से समाज में महिलाओं के प्रति आदर का भाव पैदा होगा। मेरे पिता सेना में अधिकारी थे और देश के कई शहरों के केंद्रीय विद्यालय में शिक्षा प्राप्त की और हर तरह के लोगों को जाना। पिता के सहयोग से ही मैं भारतीय वायु सेना में जा सकी पर हर बेटी को परिवार का साथ मिले, इसके लिए हम सभी को मिलकर काम करना चाहिए।
जस्सी आज हवा से बातें करतीं हैं
4 of 14
पायलट जस्सी
सपने तो सभी देखते है, लेकिन उन्हें साकार करना बड़ी बात है। मोहाली के छोटे से कस्बे खरड़ की जस्सी आज कैप्टन है, हवा से बातें करतीं हैं और दस सालों से विमान में सुरक्षित सफर कर रहीं है। जब मैं 12 साल की थी तब से ही पायलट बनने की ठान ली थी। 8वीं में देखा सपना पूरा हुआ और कैप्टन बन गई। जस्सी का कहना है कई साथी इस फील्ड में आने से मना भी किए लेकिन मेरा विश्वास नहीं डिगा। लड़कियां हर वो काम कर सकतीं है जो चैलेंजिंग माना जाता है। अमर उजाला से अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि कई बार यात्री यह कह बैठते हैं कि क्या महिलाएं विमान उड़ाएंगी वहीं अधिकतर लोग प्राउड फील करते हैं।
विज्ञापन
5 of 14
जस्सी
विमान की लैंडिंग के समय जब एनाउंसमेंट होता है कि महिला क्रू मेंबर ही फ्लाइंग कर रही थी तो यात्रियों को खुशी होती है। गो एयर के साथ जुड़ी जस्सी कहतीं हैं कि महिला दिवस के दिन ज्यादातर वे उसी विमान में होती है जिसमें सिर्फ महिला क्रू मेंबर होती है। उन्होंने कहा कि एविएशन सेक्टर में पुरुषों की तादाद ज्यादा है। लेकिन भारत ही ऐसा देश है जहां इस पेशे में बड़ी संख्या में महिलाएं भी हैं। पायलट मतलब पायलट होता है इसमें लड़की और लड़के का कोई भेद नहीं। कॉकपिट में दोनों मिलकर बेहतर काम करते हैं।
विज्ञापन
महिलाओं को रात में भी सुरक्षित घूमने की मिले आजादी
6 of 14
स्वाति मालीवाल
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष से पहले स्वाति मालीवाल एक महिला होने के नाते मेरी पहली प्राथमिकता है दिल्ली को रेप कैपिटल के नाम से मुक्त करना। दिल्ली के हर इलाके में पुरुषों की तरह ही महिलाओं को भी आधी रात को सुरक्षित घूमने की आजादी मिले। स्वाति कहती हैं कि महिला आयोग अध्यक्ष होने से पहले मैं एक महिला भी हूं और मानती हूं कि सिर्फ एक दिन महिलाओं के नाम करके समाज में बदलाव नहीं लाया जा सकता।
विज्ञापन
7 of 14
स्वाति मालीवाल
स्वाति कहती हैं कि दिल्ली सरकार की हेल्पलाइन 181 बेशक दिल्ली महिला आयोग को मिल गयी हो, लेकिन अभी उसमें बहुत बदलाव करने की जरूरत है। इस हेल्पलाइन के साथ 22 गाड़ियां और काउंसलर जुड़ेंगे, ताकि जैसे ही मदद की कॉल आए, काउंसलर व मदद टीम तत्काल उक्त स्थान पर पर पहुंचकर मदद कर सके। महिलाओं को एफआईआर, हॉस्पिटल समेत कानूनी जानकारियां दी जाएंगी। महिला दिवस पर हम अक्सर महिलाओं को ही सम्मानित करते हैं। यदि इस खास दिन महिलाओं की सुरक्षा और मदद करने वाले पुरुषों को सम्मानित किया जाए।
खून से लथपथ महिला की मदद के लिए दौड़ी
8 of 14
गीतिका तोमर
वूमन पीसीआर में पहला दिन और सीपी सर्कल पर हिट एंड रन केस देख कदम एकदम से रुक गए। मैं कार चालक को पकड़ने के बजाय सीधे अधेड़ उम्र की महिला की मदद के लिए दौड़ी। खून से लथपथ पड़ी महिला को देख उसे अस्पताल पहुंचाने की जल्दी में किसी और बात पर ध्यान नहीं दिया। यह घटना बेशक कहने को छोटी होगी, लेकिन वर्दी पहनकर पहली वूमन पीसीआर ड्यूटी में न भूलने वाली है। उस पल बस ऐसा लगा कि वो मेरी ही मां हो, महिला को उठाने में मेरी वर्दी खून से रंग गई थी। इस घटना को मैंने अपने घरवालों भी बताया और परिवार ने ऐसे ही हर जरूरतमंद की मदद करने के लिए प्रेरित किया। ये कहना है दिल्ली की पहली वूमन पीसीआर कांस्टेबल गीतिका तोमर (24) का।
ग्रेजुएशन के बाद पुलिस की वर्दी से लगाव हुआ
9 of 14
गीतिका तोमर
उत्तर प्रदेश स्थित बागपत जिला के बड़ोत के हसनपुर जीवनी गांव की गीतिका एक किसान की बेटी हैं। ग्रेजुएशन के बाद पुलिस की वर्दी से लगाव हुआ और परीक्षा पास करके दिल्ली पुलिस में भर्ती हो गईं। गीतिका के साथ हरियाणा के महेंद्रगढ़ की बबली यादव और रेवाड़ी की रेखा यादव भी मूविंग पीसीआर में महिलाओं को सुरक्षा का अहसास दिला रही हैं। महिला कर्मियों का कहना कि वे 12 घंटे की ड्यूटी के बाद जब घर जाती हैं, तो मन में सुखद अहसास होता है कि हमारे कारण अब महिलाएं बिना डरे पीसीआर में मदद मांगने आ रही हैं।
मेट्रो महिला ड्राइवर देश की आम लड़कियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा बन रही हैं
10 of 14
महिला मेट्रो चालक
दिल्ली मेट्रो में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाती महिला ड्राइवर देश की आम लड़कियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा बन रही हैं। मेट्रो की सभी लाइनों पर कुल 69 महिला ड्राइवर कार्यरत हैं। महिला चालकों का कहना है कि जब रात में वे मेट्रो ट्रेन चलाती हैं तो महिला यात्री देखकर कहती हैं कि अब उन्हें कोई डर नहीं।
11 of 14
महिला मेट्रो चालक
यात्रियों का यही भरोसा उन्हें बढ़ने की प्रेरणा देता है। महिला चालकों का कहना है कि जब मेट्रो की चाबी पकड़ी तो यात्रियों में बेहद उत्सुकता होती थी। ड्राइवर कोच मेट्रो ट्रेन में लेडीज कोच से सटा होता है। लड़कियां खासकर महिलाएं बड़ी उत्सुकता से देखती हैं। उनकी उत्सुकता उनकी बेटियों को भी पुरुषों के इन क्षेत्रों में जोड़ने का काम कर सकती हैं। कई महिला और पुरुष यात्री आकर पूछ भी लेते हैं कि आपको डर नहीं लगता। इस पर वह भी हंसते हुए कहती हैं कि जिम्मेदारी के एहसास कभी डर नहीं लाता।
कैपिटल ऑफ रेप में रफ्तार भरती बेटी
12 of 14
मोनिका कैब ड्राइवर
बुराड़ी की मोनिका (24) तीन सालों से कैपिटल ऑफ रेप कही जाने वाली असुरक्षित दिल्ली की सड़कों पर रफ्तार भरते हुए अपनी टैक्सी में पुरुष यात्रियों को भी सुरक्षित सफर का अहसास कराती हैं। मोनिका बताती है कि 12वीं की पढ़ाई के बाद मैंने कुछ अलग करने की सोची। दो भाइयों ने बस एक ही बात कही हम तेरे साथ हैं, जा जी ले अपनी जिंदगी। मैंने सखा कैब को चुना, जोकि एनसीआर में सेवाएं देती है। कॉल सेंटर की मदद से यात्री कैब बुक कराते हैं, जिसमें उन्हें अपने पते से कैब बुक करानी पड़ती है। हालांकि दुनिया हर तरह की होती है, लेकिन कभी पुरुष यात्रियों के चलते डर नहीं लगा।
पर्यावरणविद ने बदलाव के लिए किया शोध का इस्तेमाल
13 of 14
सुनीता नारायण
वैज्ञानिक तथ्यों के खिलाफ जाने वाले हर मसले पर सुनीता नारायण मोर्चा खोल सकती हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनके सामने पेप्सी व कोका कोला जैसी बड़ी कंपनियां हैं, चिकन के बड़े-बड़े कारोबारी या डीजल व ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री। सुनीता हर उस मसले के खिलाफ खड़ी रहती हैं, जिससे पर्यावरण व आम लोगों की सेहत जुड़ी है। सुनीता नारायण ने पेप्सी व कोका कोला में कीटनाशकों की मौजूदगी का पता लगाया। शहद व चिकन में एंटीबायोटिक होने का प्रमाण दिया।
ऊंचाई छू लेने की चाह में कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा
14 of 14
कविता अग्रवाल
घर में नहीं बैठने की जिद ने उत्तर रेलवे की पहली महिला असिस्टेंट स्टेशन मास्टर के पद पर बैठाया। इतने पर ही नहीं रुकीं, आगे बढ़ने की चाह ने उत्तर रेलवे में असिस्टेंट ट्रैफिक मैनेजर पद भी दिलाया। ऊंचाई छू लेने की चाह में कविता अग्रवाल ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। आगरा में पली-बढ़ी कविता ने दिल्ली मंडल के कंप्यूटरीकरण में भी काफी योगदान दिया। कंप्यूटरसेल की हेड भी रहीं। कविता अग्रवाल दयाल बाग यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद रेलवे की परीक्षा में शामिल हुईं और निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर पहली असिस्टेंट स्टेशन मैनेजर बनीं।