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जिस मैदान में लिखी सफलता की कहानी, उसी में विलीन होगा जांबाज

Sun, 03 Mar 2019 11:15 AM IST
vivek shukla अरुण चट्ठा, गाजियाबाद
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vinod kumar
इसे संयोग ही कहेंगे कि विनोद कुमार जिस मिट्टी में खेले बड़े हुए आज उसी में पंचतत्व में विलीन हो जाएंगे। नटखट छात्र से एथलीट चैंपियन बनाने और फिर सीआरपीएफ तक की मंजिली तय कराने वाला जनता इंटर कालेज पतला का मैदान आज हजारों लोगों के साथ गम में डूबा होगा। उसे भी उतना ही गम होगा जितना शहीद की पत्नी, परिजनों व देश के अन्य लोगों को। क्योंकि उसने भी परिवार की तरह विनोद को एक छात्र से जांबाज सैनिक बनाने की कहानी लिखी है। 
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martyr vinod kumar - फोटो : अमर उजाला
इसी मैदान ने करीब पांच वर्ष की कड़ी मेहनत के बाद देश सेवा के लिए सीआरपीएफ को एक जांबाज सैनिक तैयार करके दिया, जो आज करीब 15 वर्ष की देश सेवा करने के बाद अपने सर्वोच्च बलिदान के साथ तिरंगे में लिपट कर उसी मैदान की मिट्टी में विलीन होने को लौटेगा। उसकी देशभक्ति खुशबू अब इस मैदान में हमेशा उन युवाओं के लिए प्रेरणा देती रहेगी जिनके सपनों में देश की सेवा सर्वोच्च है। सात दिसंबर 1983 को पतला के किसान परिवार में जन्मे विनोद कुमार ने छठी कक्षा में जनता इंटर कालेज में दाखिला लिया। यहां से उनके जीवन में बड़े परिवर्तन का दौर शुरू हो गया। कालेज में एनसीसी होने के कारण बड़ी संख्या युवा सेना में जाने की तैयारी कर रहे थे। उनमें से दर्जनों हर वर्ष सेना व अर्द्ध सैनिक बलों में भर्ती हो जाते थे। 
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vinod kumar
अब 1999 में जैसे ही विनोद ने हाईस्कूल की परीक्षा पास की तो 11वीं में दाखिला लेते ही एनसीसी के लिए आवेदन कर मैदान के ट्रैक पर दौड़ शुरू कर दी। उन्हें पता था कि एनसीसी के रास्ते सेना में जाने का रास्ता आसान हो जाएगा, क्योंकि एनसीसी सर्टिफिकेट के आधार पर भर्ती में कुछ छूट मिल जाती है। युवा विनोद ने 11वीं में दाखिला के बाद ही भर्ती में हिस्सा लेना शुरू कर दिया, लेकिन पांच वर्षों तक मंजिल हासिल नहीं हुई। 

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martyr vinod kumar - फोटो : अमर उजाला
शुरूआत की कुछ भर्तियों में असफलता मिली, लेकिन उसके बाद भी उनका हौसला नहीं टूटा। देश सेवा का जुनून इस कदर सवार था कि 1999 से 2004 तक कालेज के उसी ट्रैक को नहीं छोड़ा, जिस पर आज भी सैकड़ों युवा सुबह-शाम दौड़ते हैं। 2001 में इंटर कालेज से निकले तो बीए में पतला डिग्री कालेज में दाखिला ले लिया, लेकिन इंटर कालेज के मैदान का साथ नहीं छोड़ा। यहां पर निरंतर प्रैक्टिस जारी रही। 2004 में बीए की परीक्षा पास की, लेकिन तब तक 25 से अधिक भर्तियां देख चुके थे। कुछ महीने बाद ही पांच वर्षों की मेहनत सफलता में बदली और विनोद सीआरपीएफ में बतौर सिपाही भर्ती हो गए। 
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vinod kumar
15 दिन में पतला इंटर कालेज ने खोए दो शूरवीर 
जनता इंटर कालेज ने 15 दिनों में अपने दो जांबाज शूरवीर खोए दिए हैं। कालेज से पढ़े और मैदान में दौड़े अजय कुमार बीते महीने कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए। 20 राष्ट्रीय राइफल में तैनात पतला से सटे बसा टिकरी निवासी अजय शहीद हुए थे, जिनका 19 फरवरी को पतला इंटर कालेज के इसी मैदान में अंतिम संस्कार किया गया था। एक के बाद एक दो सैनिकों की शहादत से पूरा क्षेत्र गम में डूबा है। 
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vinod kumar
बचपन से ही सेना में भर्ती होने का था जुनून 
जनता इंटर कालेज पतला के प्रधानाचार्य सुनील कुमार ने बताया कि विनोद बहुत ही सज्जन बच्चा था। उसमें बचपन से ही सेना में जाने का जुनून था। मुझे याद है कि कालेज से एनसीसी बी-सर्टिफिकेट लाने वाले विनोद ने 11वीं में दाखिला लेते ही एनसीसी के लिए आवेदन किया था। सुबह-शाम उसे हम सभी स्कूल के मैदान में ट्रैक पर दौड़ते देखते थे। आज उसकी शहादत से हर कोई दुखी है।
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