martyr vinod kumar
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शुरूआत की कुछ भर्तियों में असफलता मिली, लेकिन उसके बाद भी उनका हौसला नहीं टूटा। देश सेवा का जुनून इस कदर सवार था कि 1999 से 2004 तक कालेज के उसी ट्रैक को नहीं छोड़ा, जिस पर आज भी सैकड़ों युवा सुबह-शाम दौड़ते हैं। 2001 में इंटर कालेज से निकले तो बीए में पतला डिग्री कालेज में दाखिला ले लिया, लेकिन इंटर कालेज के मैदान का साथ नहीं छोड़ा। यहां पर निरंतर प्रैक्टिस जारी रही। 2004 में बीए की परीक्षा पास की, लेकिन तब तक 25 से अधिक भर्तियां देख चुके थे। कुछ महीने बाद ही पांच वर्षों की मेहनत सफलता में बदली और विनोद सीआरपीएफ में बतौर सिपाही भर्ती हो गए।