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शहीद ने पत्नी से फोन पर आखिरी बार कहा- ‘बच्चों को स्कूल से ले आ, मैं शाम को करूंगा बात’

Sun, 03 Mar 2019 01:24 AM IST
शाहरुख खान राजीव शर्मा, अमर उजाला, गाजियाबाद
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martyr vinod kumar - फोटो : अमर उजाला
कुपवाड़ा में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवान विनोद कुमार ने आखिरी बार शुक्रवार दोपहर डेढ़ बजे पत्नी नीतू से फोन पर बात की थी। उस वक्त दोनो बच्चों को स्कूल से लेने जा रही नीतू से विनोद ने शाम को बात करने का वादा किया था और कहा कि ‘मैं ऑपरेशन में हूं, बच्चों को ले आ, शाम को कैंप में पहुंचकर बात करूंगा’। 
 
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martyr vinod kumar - फोटो : अमर उजाला
शाम हुई तो विनोद का फोन नहीं उसकी शहादत की खबर मिली। पत्नी नीतू अब बिलख-बिलख कर यही कह रही है कि कोई उसकी विनोद से एक बार बात करा दे। सीआरपीएफ के शहीद हुए जवान विनोद कुमार का बेटा अंश (9) और बेटी एलिस अवनी (5) मोदीनगर के दयावती मोदी पब्लिक स्कूल में पढ़ते हैं। 
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martyr vinod kumar - फोटो : अमर उजाला
नीतू भी किराए के मकान में मोदीनगर में ही रहती हैं, लेकिन कुछ दिनों पूर्व उनके पैर में चोट लगने के कारण वह पतला में ससुराल में रह रही थीं। शुक्रवार दोपहर करीब डेढ़ बजे नीतू बच्चों को स्कूल से लाने मोदीनगर जा रही थी। इसी दौरान उन्होंने पति विनोद कुमार को फोन किया। विनोद ने बताया कि वह एक ऑपरेशन में हैं, आतंकवादी जिस घर में छिपे हैं उसमें आग लगा दी है, फिलहाल बात नहीं कर सकते। 

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martyr vinod kumar - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने नीतू से कहा कि ‘ऑपरेशन पूरा होने वाला है, तू बच्चों को स्कूल से ले आ, मैं शाम को फोन पर बात करुंगा’। कॉल डिस्कनेक्ट हो जाने के बाद नीतू बच्चों को लाने स्कूल चली गई। शाम को नीतू ने पति विनोद के फोन पर कॉल की, लेकिन रिसीव नहीं हुई। शाम पांच बजे विनोद की बटालियन के उच्चाधिकारियों का फोन आया और गोली लगने से विनोद की हालत गंभीर होने की बात कही। 
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martyr vinod kumar - फोटो : अमर उजाला
करीब दो घंटे बाद उनके अफसरों का दोबारा फोन आया और विनोद की शहादत की खबर परिजनों को दी। सभी ने सुबह तक पत्नी से विनोद की शहादत की बात को छिपाए रखा। शनिवार की सुबह जब शहीद की पत्नी नीतू को पता चला तो वह बिलखने लगी, नीतू बार-बार इसी बात को दोहरा रही है कि फोन पर बात करने का वादा कर पति उसे छोड़कर कैसे जा सकते हैं। 
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बड़े भाई पप्पू से ज्यादा था विनोद का जुड़ाव

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martyr vinod kumar - फोटो : अमर उजाला
चार भाई और दो बहनों में सबसे छोटे विनोद कुमार यूं तो परिवार के प्रत्येक सदस्य की चिंता करते थे, लेकिन उनका सबसे ज्यादा जुड़ाव बड़े भाई वीरेंद्र उर्फ पप्पू से था। शहादत से एक दिन पूर्व बृहस्पतिवार की रात विनोद ने भाई पप्पू से काफी देर बात की थी। उन्होंने घर-परिवार के बारे में बात की और ऑपरेशन के बारे में भी बताया था। परिजनों के मुताबिक विनोद प्रतिदिन करीब दो-तीन बार वीडियो कॉल करते थे।
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पिछले साल हो गया था पिता का निधन

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martyr vinod kumar - फोटो : अमर उजाला
शहीद विनोद कुमार के पिता चमन सिंह पहलवान थे। करीब 10 माह पूर्व उनका निधन हो गया था। परिवार अभी उनके जाने के सदमे से ही नहीं उभर पाया था कि वक्त ने एक और चोट परिवार को दे दी। अब विनोद के जाने से उनके भाई खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं। खेती में व्यस्त रहने वाले तीनों भाइयों को विनोद का बड़ा सहारा था।
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