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30 दिनों में तीन ग्रहण ने बढ़ाई धार्मिक विद्वानों की चिंता, पहला चंद्र ग्रहण आज, जानिए हर जरूरी बात

Fri, 05 Jun 2020 11:27 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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lunar eclipse - फोटो : max pixel
58 साल बाद पहली बार ऐसा मौका आया है जब जून माह में एक साथ 2 ग्रहण लगने जा रहे हैं। इस महीने में सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों ही लगने वाले हैं। पांच जून को चंद्र ग्रहण लगेगा और इसके बाद 21 जून को सूर्य ग्रहण लगेगा। वहीं तीस दिनों के अंदर तीन ग्रहण लगेंगे। तीसरा ग्रहण जुलाई में है। एक महीने के अंदर तीन ग्रहण लगने से धार्मिक विद्वान काफी चिंता में हैं। ऐसे में आज लगने वाले चंद्र ग्रहण का समय क्या होगा, इसका हम पर क्या प्रभाव पड़ेगा व आने वाले ग्रहण को लेकर विद्वान क्या उपाय कर रहे हैं जानिए सबकुछ....
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चंद्र एवं सूर्य ग्रहण। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
58 साल बाद बन रहा विशेष संयोग
इस महीने में सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों ही लगने वाले हैं। पांच जून को चंद्र ग्रहण लगेगा और इसके बाद 21 जून को सूर्य ग्रहण लगेगा। ज्योतिषियों के अनुसार ऐसा योग 1962 में बना था। जब शनि मकर राशि में वक्री था। इस बार भी वही योग बन रहा है। ज्योतिषियों ने बताया कि इस बार हिंदी पंचांग के अनुसार एक ही माह में तीन ग्रहण होने वाले हैं। इसमें पांच जून को चंद्र ग्रहण, 21 जून को सूर्य ग्रहण और पांच जुलाई को फिर से चंद्र ग्रहण होगा।
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चंद्र ग्रहण - फोटो : पेक्सेल्स
शनि के मकर राशि में वक्री रहते एक महीने में 2 चंद्र और एक सूर्य ग्रहण
ज्योतिषाचार्य पंडित सर्वेश पांडे ने बताया कि इस समय शनि मकर राशि में वक्री है। 5 जून को ज्येष्ठ की मास की पूर्णिमा है। हालांकि इस चंद ग्रहण का भारत में प्रभाव नहीं पड़ेगा। देश में 21 जून को आषाढ़ मास की अमावस्या है। उन्होंने कहा कि 21 जून को खंडग्रास यानी आंशिक सूर्य ग्रहण रहेगा। ये ग्रहण भारत के अलावा यूरोप और अन्य देशों में भी दिखेगा। ग्रहण का स्पर्श सुबह 10.14 मिनट पर, ग्रहण का मध्य 11.56 मिनट पर और ग्रहण का मोक्ष 1.38 मिनट पर होगा। ग्रहण का सूतक काल 20 जून की रात 10.14 मिनट से आरंभ हो जाएगा। सूतक जो 21 जून की दोपहर 1.38 तक रहेगा।

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lunar eclipse - फोटो : pti
किन पर रहेगा संकट
फरीदाबाद के काली मंदिर संस्थान के प्रधान राकेश कुमार ने कहा कि जब मिथुन राशि में सूर्य या चंद्र ग्रहण होता है तो उच्च पदों पर स्थित महिलाएं, मंत्री, कला क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए समय कष्टकारी होता है। उन्होंने कहा कि इस बार के सूर्य ग्रहण से कोरोना महामारी संकट कटेगा। विश्व को महामारी से निजात मिलेगी। 
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lunar eclipse 2019 - फोटो : ani
चिंता का है विषय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार  सूर्य ग्रहण और चंद्रग्रहण का पूरी दुनिया पर असर होता है। बीते साल दिसंबर में जब सूर्य ग्रहण लगा था, तो कई ज्योतिषियों ने कहा था कि यह ग्रहण दुनिया के लिए कष्टकारी होगा। स्थिति यह है कि आज पूरी दुनिया एक लाइलाज महामारी से लॉकडाउन है। इस साल जून और जुलाई के महीने में करीब 30 दिन के अंदर तीन ग्रहण लगने जा रहे हैं ऐसे में इसका क्या असर होगा। यह ज्योतिष के जानकारों एवं धर्म गुरुओं के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। ज्योतिष महर्षि  पंडित प्रकाश जोशी ने बताया कि इस वर्ष आषाढ़ के महीने में 6 जून से 5 जुलाई के बीच तीन ग्रहण लगने जा रहे हैं। इनमें से दो ग्रहण भारत में दृश्य होंगे।
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lunar eclipse 2019 - फोटो : ani
कब होगा ग्रहण-  
पहला ग्रहण 5/6 जून को लगने वाला चंद्र ग्रहण यूरोप, भारत सहित एशिया, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में भी दिखाई देगा।
दूसरा ग्रहण 21 जून को पड़ने वाला सूर्य ग्रहण भारत सहित एशिया के कई दूसरे राज्यों, यूरोप और अफ्रीका में भी दिखेगा।
वहीं तीसरा 4/5 जुलाई को लगने जा रहा चंद्र ग्रहण अफ्रीका और अमेरिका में नजर आएगा।
इन तीनों ग्रहणों में से पहले दो ग्रहण, जो कि आषाढ़ कृष्ण पक्ष में पड़ेंगे, वह भारत में दृश्य होंगे। अंतिम ग्रहण जो कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष में है वह भारत में दिखाई नहीं देगा। इन ग्रहणों का मिथुन और धनु राशि के अक्ष को पीड़ित करना अमेरिका और पश्चिम के देशों के लिए विशेष रूप से अशुभ होगा।
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lunar eclipse 2019 - फोटो : ani
क्या है महत्वपूर्ण-  
पंडित प्रकाश जोशी ने बताया कि विश्व के लिए 21 जून का सूर्य ग्रहण बेहद संवेदनशील है। मिथुन राशि में होने जा रहे इस ग्रहण के समय मंगल जलीय राशि मीन में स्थित होकर सूर्य, बुध, चंद्रमा और राहु को देखेंगे जिससे अशुभ स्थिति का निर्माण होगा। इसके साथ ही ग्रहण के समय 6 ग्रह शनि, गुरु, शुक्र और बुध वक्र होंगे। राहु केतु हमेश वक्र चलते हैं इसलिए इनको मिलकर कुल 6 ग्रह वक्री रहेंगे। जो शुभ फलदायी नहीं है। इस स्थिति में संपूर्ण विश्व में बड़ी उथल-पुथल मचेगी।  

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lunar eclipse 2019 - फोटो : ani
कैसा रहेगा असर-  
ग्रहण के समय इन बड़े ग्रहों का वक्री होना प्राकृतिक आपदाओं जैसे अत्यधिक वर्षा, समुद्री चक्रवात, तूफान, महामारी आदि से जन-धन की हानि  कर सकता है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका को जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई में भयंकर वर्षा एवं बाढ़ से जूझना पड़ सकता है। ऐसे में महामारी और भोजन का संकट इन देशों में कई स्थानों पर हो सकता है।  
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Lunar eclipse
क्या होंगे उपाय-  
ग्रहण से पूर्व इससे दुष्प्रभाव से बचाव के लिए शहर के मंदिरों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। शहर के सभी प्रमुख मंदिरों सेक्टर 56 लक्ष्मी नारायण मंदिर,  सेक्टर 19 सनातन धर्म मंदिर, सेक्टर 12 कलरिया बाबा मंदिर आदि में ग्रहण का दुष्प्रभाव रोकने के लिए जाप अनुष्ठान किए जाएंगे।  शहर के मंदिरों के पट आठ जून को  भक्तों के लिए खोले जाने से पहले 5-6 को पहला ग्रहण लग रहा है। जिसके चलते मंदिर पट खोलने से पहले मंदिर को अच्छी तरह सैनिटाइज किया जाएगा। पंडित सतीश झा केअनुसार ग्रहण के बाद मंदिरों और घरों को अच्छी तरह धुलने की प्रथा रही है, जिससे बीमारियों का प्रसार ना हो। पंडित वीरेंद्र नाथ ने कहा हर ग्रहण के बाद मंदिर को अच्छी तरह सैनिटाइज किया जाएगा।
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