साख पर धक्का लगना भी पड़ा आप पर भारी
2015 के विधान सभा चुनाव में आप के खाते में 67 सीटें जाने की बड़ी वजह भ्रष्टाचार के खिलाफ पार्टी की लड़ाई थी। अरविंद केजरीवाल की साख ईमानदार व तेज-तर्रार नेता की थी, लेकिन बीते साढ़े चार सालों में आप के साथ विश्वसनीयता का संकट पैदा हो गया। एक तो पार्टी को पंजाब विधान सभा चुनाव व दिल्ली के एमसीडी चुनाव में करारी शिकस्त मिली। वहीं, भाजपा विरोध में अरविंद केजरीवाल उन्हीं नेताओं के साथ खड़े नजर आए, जिनके खिलाफ उन्होंने भ्रष्टाचार के बड़े-बड़े आरोप लगाए थे। इससे लोगों में 2015 जैसी सुहानुभूति नहीं रही।