फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राहुल गांधी ने 'पंजा' लहराने के लिए चली थी ये 6 चाल जो हो गई फेल, 'चौकीदार' बना सिरदर्द

Fri, 24 May 2019 06:39 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 7
rahul gandhi - फोटो : rahul gandhi
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भले ही यह कहते है कि भाजपा से हमारी लड़ाई वैचारिक है, लेकिन कांग्रेस देश में वैचारिक लड़ाई लड़ नहीं पाई। प्रत्याशी अपने-अपने दमखम पर ही चुनाव लड़ते दिखे। कांग्रेस में पार्टी नहीं प्रत्याशी चुनाव लड़ते रहे। वहीं भाजपा सिर्फ मोदी व राष्ट्रवाद के नाम पर चुनाव लड़ते दिखी। राहुल गांधी इनका तोड़ क्यों नहीं ढूंढ पाए और उनकी 6 चालें जो जिनके चलते उनकी पार्टी को 542 में से केवल 52 सीटों पर सिमटना पड़ा।
विज्ञापन

2 of 7
मीडिया को संबोधित करते राहुल गांधी - फोटो : ANI
चौकीदार चोर है का नारा- अपने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान चौकीदार चोर है का नारा लगाने और लगवाने वाले राहुल गांधी को अपना यही नारा भारी पड़ गया। माना जा रहा है कि इस नारे ने निचले तबके को नाराज कर दिया। राहुल के इसी नारे का नरेंद्र मोदी ने बेहद चतुराई से प्रयोग कर इसे जनभावनाओं से तो जोड़ा ही पूरे देश को चौकीदार बताकर उनके इस नारे को ही फेल कर दिया। ये नारा कामयाब होता तो शायद कांग्रेस की ऐसी दुर्गति न होती।
विज्ञापन

3 of 7
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी - फोटो : PTI
गठबंधन के चक्कर में की देरी- कांग्रेस ने गठबंधन के चक्कर में कई राज्यों जैसे हरियाणा, दिल्ली व अन्य राज्यों में उम्मीदवारों के नाम घोषित करने में देर कर दिया। दिल्ली जैसे राज्य में आप से गठबंधन न हो पाने से भी कार्यकर्ताओं का उत्साह काफी कम हुआ। पूरे देश में कांग्रेस पार्टी से गठबंधन के लिए बड़ी-बड़ी पार्टियां भी तैयार नहीं थीं। यूपी में सपा-बसपा के साथ कांग्रेस चाहकर भी गठबंधन नहीं कर सकी। 

4 of 7
Rahul Gandhi - फोटो : file photo
अंतिम समय में खोला प्रियंका का पत्ता, नहीं चला जादू- प्रियंका गांधी को औपचारिक राजनीति में उतारने में कांग्रेस ने काफी देर कर दी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर प्रियंका को साल-दो साल पहले ही कांग्रेस ले आती तो शायद कुछ और ही परिणाम होते। इसके साथ ही प्रियंका के नाम की चर्चा होने के बावजूद उन्हें वाराणसी से या फिर अन्य किसी सीट से चुनाव न लड़वाना भी कांग्रेस के खिलाफ गया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का जादू मतदाताओं पर नहीं चला। पूर्वांचल की अधिकांश सीटों पर कांग्रेस कहीं भी सीधी लड़ाई में नहीं नजर आई। हर जगह तीसरे नंबर पर ही संघर्ष करती रही। प्रियंका का रोड शो भी वैसा ही रहा, जिस तरह पहले तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी या राहुल गांधी का रोड शो रहा था। उनके रोड शो में भी भीड़ जुटी, लेकिन यह भीड़ मतों में नहीं बदल पाई।
विज्ञापन

5 of 7
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
नहीं बन पाए सशक्त विपक्ष का चेहरा- राहुल गांधी विपक्ष के लिए सशक्त चेहरा नहीं बन पाए। राहुल वो विकल्प नहीं बन पाए जिसके लिए भारत की जनता सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक कराने वाले नरेंद्र मोदी नकार दे। चाहे समाज का निचला तबका हो या उच्च वर्ग सभी यही कहते रहे कि 'मोदी नहीं तो कौन'? यानी लोगों को नरेंद्र मोदी के सामने कोई ऐसा चेहरा नहीं दिखा जो देश का पीएम बन सके।
विज्ञापन

6 of 7
lok sabah election 2019, PM Modi and Rahul Gandhi - फोटो : Amar ujala
नहीं ढूंढ पाए बालाकोट एयरस्ट्राइक का जवाब- राहुल गांधी बालाकोट में किए गए एयरस्ट्राइक का जवाब नहीं ढूंढ पाए। पुलवामा हमले के बाद जहां पीएम मोदी और अमित शाह लगातार रैलियों के संबोधन में लगे रहे वहीं कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष इस बात की काट नहीं खोज पाया। पुलवामा के बाद पाकिस्तान पर बालाकोट हमला हुआ जिसका काट भी कोई नहीं खोज पाया। यही वो चीज थी जिसने भाजपा की जीत सुनिश्चित कर दी। लोगों को भरोसा दिलाया गया कि मोदी जैसा अब तक कोई पीएम नहीं हुआ जिसके शासन में सेना ने पाकिस्तान को घर में घुसकर मारा हो। यही बात भाजपा ने अपनी चुनावी रैलियों में भी भुनाई जो असरदार रही।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
rahul gandhi - फोटो : पीटीआई
मीडिया में खुद को पीएम मोदी जैसा प्रोजेक्ट नहीं कर सके- राहुल गांधी मीडिया के सामने भी अपने आप को उस तरह नहीं रख पाए जिस तरह पीएम मोदी ने रखा। वह लगातार इंटरव्यू देते रहे और अपनी बात लोगों तक पहुंचाते रहे। वहीं राहुल गांधी चार चरण चुनाव बीत जाने के बाद मीडिया के सामने आए। उन्होंने तब जाकर अपनी रैलियों के दौरान ही मीडिया को इंटरव्यू देना शुरू किया। अपनी बात पहुंचाने में उन्होंने देर कर दी, जिसका परिणाम रहा कि लोगों तक उनकी बात नहीं पहुंच सकी और उन्हें करारी हार झेलनी पड़ी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें