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यूपी के 15 बड़े नेताओं में से 10 उलटफेर के शिकार, राजनीति से ज्यादा जिनपर हावी रहा वंश

Fri, 24 May 2019 06:11 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डिंपल यादव राहुल गांधी चौधरी अजीत सिंह - फोटो : अमर उजाला
यूपी के लोकसभा चुनाव के नतीजों में इसबार काफी उल्टफेर देखने को मिला। लगातार कई बार से चुनाव जीत रहे नेता इस बार हार गए। हारने वालों में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव, रालोद सुप्रीमो अजीत सिंह के बेटे जयंत चौधरी और शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा प्रमुख रहे। खास बात ये रही कि यूपी की जनता ने इस बार परिवारवाद के उपर बढ़कर विकास को प्रमुखता दी तो ऐसे नतीजे देखने को मिले।
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रालोद प्रमुख चौधरी अजित सिंह - फोटो : गूगल
मुजफ्फर नगर अजीत चौधरी, रालोद (चौधरी चरण के सिंह के बेटे), 07 बार सांसद रहे।
बागपत से 06 बार चुने गए। 2014 में मोदी लहर में हारे थे। इस बार भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। बागपत सीट की विरासत अपने बेटे को सौंपकर मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने पहुंचे चौधरी अजित सिंह भाजपा के डॉ. संजीव बालियान से हार गए। 
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पत्नी चारू चौधरी के साथ मतदान के बाद जयंत चौधरी - फोटो : अमर उजाला
बागपत जयंत चौधरी, रालोद (अजीत के बेटे)
2009 में मथुरा से चुने गए। 2014 में मिली हार। 2019 में फिर से उन्हें हार का सामना करना पड़ा। बागपत सीट पर उन्हें भाजपा के डॉ. सत्यपाल सिंह ने हराया। हालांकि दोनों जीत-हार में बेहद नजदीकी मुकाबला देखने को मिला। दोनों तरफ के नेताओं और कार्यकर्ताओं की सांसें अटकी रहीं।

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मुलायम सिंह - फोटो : अमर उजला
मैनपुरी (मुलायम सिंह यादव, सपा)
06 बार सांसद चुने गए। 2014 की मोदी लहर में भी जीते थे। इस बार भी सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने मोदी की सुनामी में भी मैनपुरी का किला बचा लिया। मुलायम ने कुल पांचवीं और लगातार चौथी जीत दर्ज की। हालांकि जीत के चौके में 2014 के मुकाबले वोटों का अंतर कम रहा।
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akhilesh yadav, nirahua - फोटो : Amar Ujala
आजमगढ़  अखिलेश यादव, सपा (मुलायम के बेटे)
कन्नौज से 2000 उपचुनाव, 2004, 2009 में जीते। मुख्यमंत्री बने तो छोड़ी सीट। इस बार पिता की विरासत संभाली और जीत दर्ज की। समाजवादी पार्टी का गढ़ मानी जाने वाली आजमगढ़ लोकसभा सीट पर यूं तो भाजपा ने भोजपुरी अभिनेता दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' को उतार कर जातीय समीकरण के आधार पर सेंध लगाने की पूरी कोशिश की, लेकिन अखिलेश अपनी साख बचाने में कामयाब रहे। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार निरहुआ को भारी अंतर से हरा कर अपनी जीत सुनिश्चित की है।
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डिंपल यादव (फाइल)
कन्नौज डिंपल यादव, सपा (मुलायम की पुत्रवधु, अखिलेश की पत्नी )
2012 और 2014 में दो बार कन्नौज से ही चुनी गईं और अबकी बार हार का मुंह देखना पड़ा। इस सीट पर भाजपा के सुब्रत पाठक और अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव में कांटे की टक्कर हुई। लेकिन बाद में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। 
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धर्मेंद्र यादव - फोटो : self
बदायूं धर्मेन्द्र यादव, सपा (मुलायम के भतीजे)
2004, 2009, 2014 में तीन बार बदायूं से ही सांसद रहे और 2019 में हार गए। 

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अक्षय यादव - फोटो : amar ujala
फिरोजाबाद अक्षय यादव, सपा (मुलायम के भतीजे, रामगोपाल यादव के बेटे),
2014 में इसी सीट से पहली दफा जीते थे और दूसरी बार हार हुई।

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पत्रकारों के सवाल के जबाव देते शिवपाल सिंह - फोटो : अमर उजाला
शिवपाल यादव, प्रसपा (मुलायम के भाई)
पहली बार लोकसभा के चुनावी मैदान उतरे और हार हुई।

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सोनिया गांधी और सुधा सिंह - फोटो : amar ujala
रायबरेली सोनिया गांधी, कांग्रेस (राजीव गांधी की पत्नी)
1999-2014 तक लगातार चार बार जीतीं। अबकी बार भी जीत दर्ज की। वह कांग्रेस की सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहीं, इसके बाद ये जिम्मेदारी उन्होंने अपने बेटे राहुल को सौंप दी।

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राहुल गांधी - फोटो : पीटीआई
अमेठी राहुल गांधी, कांग्रेस (कांग्रेस अध्यक्ष, सोनिया के बेटे)
2004-2014 तक तीन बार चुने गए और चौथी बार वह भाजपा की स्मृति ईरानी से 50 हजार से ज्यादा वोट से हार गए।

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शत्रुघ्न सिन्हा (फाइल)
लखनऊ पूनम सिन्हा, सपा (शत्रुध्न सिन्हा की पत्नी)
शत्रुध्न पटना साहिब से तीसरी बार चुनाव मैदान में उतरे तो पत्नी पहली बार लखनऊ से किस्मत आजमाने उतरीं और पहली ही बार में दिग्गज राजनाथ सिंह से हार गईं।

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मेनका गांधी
सुल्तानपुर मेनका गांधी, भाजपा (संजय गांधी की पत्नी),
1989-2014, 07 बार पहले सांसद रहीं। इस बार बेटे की सीट पर लड़ीं और मुश्किल से सीट बचाई। चुनाव प्रचार में वह कई विवादित बयान के लिए चर्चा में थीं।

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वरुण गांधी
पीलीभीत वरुण गांधी, भाजपा (मेनका के बेटे)
2009, 2014 में जीते। इस बार मां की सीट पर लड़े और जीत दर्ज की।

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कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद, भीम आर्मी
सहारनपुर इमरान मसूद, कांग्रेस (चाचा राशिद मसूद, पूर्व केंद्रीय मंत्री)
सहारनपुर से 2014 में लड़े थे, हारे। अबकी बार वह कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे थे और हार गए।
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सपा प्रत्याशी तबस्सुम हसन - फोटो : अमर उजाला
कैराना तबस्सुम हसन, सपा (पति मुनव्वर हसन और ससुर अख्तर हसन सांसद रहे)
2009 में पहली बार जीतीं। 2018 उपचुनाव भी जीता। इस बार वह भाजपा उम्मीदवार से हार गईं।
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