लोकसभा चुनाव के नतीजों में पीएम मोदी की सुनामी के बीच कई नेता ऐसे भी रहे, जिन्होंने लगातार पांचवीं बार चुनाव जीतकर रिकार्ड बना डाला। इनमें एक संभल, जालौन, गुड़गांव और हिमाचल के हमीरपुर सीट है, जबकि सपा संरक्षक ने मोदी की सुनामी में भी मैनपुरी का किला बचा लिया। उनकी कुल पांचवी और लगातार चौथी जीत दर्ज है।
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फाइल फोटो
रायबरेली की जनता ने पांचवीं बार जनादेश देकर सोनिया गांधी को संसद भेजकर इतिहास रच दिया है। गांधी परिवार में सोनिया पहली सांसद बन गई हैं, जिन्होंने एक ही सीट पर सबसे अधिक बार चुनाव जीता है। सोनिया ने पहला चुनाव अमेठी संसदीय सीट से जीता था। इसके बाद रायबरेली से लगातार पांचवीं बार जीत दर्ज की। उन्होंने सास व पति को भी पीछे छोड़ दिया है। पति दिवंगत राजीव गांधी चार बार तो सास दिवंगत इंदिरा गांधी तीन बार सांसद बनीं थीं। इस चुनाव में सोनिया छठवीं बार सांसद चुनी गईं हैं। वर्ष 1999 में पहली बार सोनिया गांधी ने अमेठी संसदीय सीट से जीत हासिल की। वर्ष 2004 में सोनिया अमेठी की सीट बेटे राहुल के लिए छोड़कर रायबरेली आ गई थीं। सोनिया ने लगातार 2004, 2006 (उप चुनाव), 2009, 2014 के बाद वर्ष 2019 में रायबरेली संसदीय सीट से जीत दर्ज की है।
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मुलायम सिंह यादव
- फोटो : amar ujala
सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने मोदी की सुनामी में भी मैनपुरी का किला बचा लिया। मुलायम ने कुल पांचवीं और लगातार चौथी जीत दर्ज की। हालांकि जीत के चौके में 2014 के मुकाबले वोटों का अंतर कम रहा।
कब कितने वोट से जीते मुलायम
लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे
सपा प्रत्याशी मुलायम सिंह यादव- 524926
भाजपा प्रत्याशी प्रेम सिंह शाक्य- 430537
जीत का अंतर - 94389
लोकसभा चुनाव वर्ष 2014
सपा प्रत्याशी मुलायम सिंह यादव - 595455
भाजपा प्रत्याशी शत्रुघन सिंह चौहान - 231117
जीत का अंतर - 364338
लोकसभा चुनाव वर्ष 2009
सपा प्रत्याशी मुलायम सिंह यादव - 392308
बसपा प्रत्याशी विनय शाक्य - 219239
जीत का अंतर 173069
लोकसभा चुनाव वर्ष 2004
सपा प्रत्याशी मुलायम सिंह यादव - 460470
बसपा प्रत्याशी अशोक शाक्य - 122600
जीत का अंतर 337870
लोकसभा चुनाव वर्ष 1996
सपा प्रत्याशी मुलायम सिंह यादव - 273303
भाजपा प्रत्याशी उपदेश सिंह चौहान - 221345
जीत का अंतर - 51958
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शफीकुर्रहमान
- फोटो : self
उम्र 86 साल से अधिक। चार बार विधायक और चार बार सांसद रह चुके डा. शफीकुर्रहमान बर्क अब पांचवीं बार संभल से सांसद चुने गए हैं। उम्र और अनुभव में वह मंडल के सबसे वरिष्ठ राजनेता हैं। अपने सियासी तेवरों के कारण उनकी अलग पहचान हैं। संसद में उन्होंने 1996 में कदम रखा। जनता दल के टिकट पर वर्ष 1996 के चुनाव में मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। इसके बाद वर्ष 1998 और 2004 में मुरादाबाद संसदीय सीट से सपा के सांसद चुने गए। जबकि 2009 में संभल लोकसभा क्षेत्र से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े और चौथी बार सांसद चुने गए। वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव उन्होंने सपा से लड़ा था पर मामूली अंतर से हार गए थे। अब वर्ष 2019 में सपा-बसपा-रालोद के गठबंधन से चुनाव जीते हैं और पांचवीं बार सांसद चुने गए हैं।
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भाजपा प्रत्याशी भानु प्रताप वर्मा
जालौन भोगनीपुर गरौठा संसदीय सीट पर लगातार दूसरी बार जीत दर्ज कर भाजपा प्रत्याशी भानु प्रताप वर्मा अब पांचवीं मर्तबा सांसद बनेंगे। भानु ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी गठबंधन के प्रत्याशी अजय सिंह पंकज को 1,58,377 वोटों से हराया है। जबकि कांग्रेस का प्रदर्शन 2014 की तरह ही करारी हार वाला रहा। शाम के वक्त जैसे ही भाजपा प्रत्याशी की जीत की घोषणा हुई, समर्थकों में उत्साह छा गया। जगह जगह पर भाजपाइयों ने मिठाई बांटकर जीत की खुशी मनाई।
वहीं, हरियाणा की गुड़गांव लोकसभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार राव इंद्रजीत सिंह ने सभी विरोधियों को चारों खाने चित ही नहीं किया, बल्कि रिकार्ड जीत भी हासिल की। उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर हर मामले में पिछले चुनावों की तुलना में बड़ी जीत के साथ अपना वर्चस्व बरकरार रखा। उन्होंने जीत एवं वोट हासिल करने और जीत के अंतर के मामले में अपने सभी आंकड़े पीछे छोड़ दिए। वहीं हरियाणा में सबसे अधिक पांच बार लोकसभा चुनाव जीतने का रिकार्ड भी बनाया। वर्ष 2009 में अस्तित्व में आए गुड़गांव लोकसभा क्षेत्र से राव इंद्रजीत सिंह ने लगातार तीसरी बार जीत हासिल की है। वह वर्ष 1998 और 2004 में महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र से चुनाव जीते थे।