नागरिकता कानून के खिलाफ जंतर मंतर पर प्रदर्शन करते प्रदर्शनकारी
- फोटो : अमर उजाला
असम के लखीमपुर निवासी रितूपर्णा ने कहा कि एलजीबीटी समूह के सदस्यों के लिए परेशानी और बढ़ जाएगी। क्योंकि कई सदस्यों को पहले ही परिवारों से दूर किया जा चुका है। कुछ सदस्यों ने दबी जुबान में यह भी कहा कि घरों में उनके साथ हुई हिंसा की वजह से छोड़कर आए हैं। उनके पास सिर्फ आधार कार्ड है जबकि दस्तावेजों के लिए दोबारा घर वापस लौटना संभव नहीं है।
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ट्रांसजेंडर सदस्यों का कहना था कि उनके स्कूली प्रमाण पत्र और पहचान पत्र में अलग अलग पहचान हैं। क्योंकि शुरुआती दिनों न तो घरवालों को इस बारे में जानकारी थी और अगर हुई भी तो इसे छुपाया गया। अब व्यस्क होने पर उन्हें आगे इतनी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा, अंदाजा नहीं था।
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रितुपर्णा का कहना है कि असम में एनआरसी की वजह से 2000 ट्रांस वुमेन को बाहर कर दिया गया। 24 वर्षीय रे ने बताया कि दस्तावेजों में वह पुरुष हैं। अगर देश में एनआरसी को लागू किया जाता है तो वह खुद को कैसे साबित कर सकेंगी।
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मनोचिकित्सक दिव्या का कहना है कि एनआरसी की वजह से कुछ व्यावहारिक दिक्कतों का एलजीबीटी समूह को सामना करना पड़ता है। इस वजह से पूरे देश की एनआरसी से उन्हें बाहर किए जाने का खतरा है। इस वजह से समूह के सदस्यों की चिंता और तनाव में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कुछ सदस्यों में डिप्रेशन की भी शिकायतें लगातार आ रही हैं।